Rohtak Court ने 2011 के Kalanaur Mandi Murder Case में Former MLA Balbir Singh alias Bali Pehalwan समेत 7 आरोपियों को Life Imprisonment की सजा सुनाई।
रोहतक। 15 साल पहले अनाज मंडी में चली गोलियों की गूंज आखिरकार अदालत के फैसले तक पहुंच गई। रोहतक की अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश कपिल राठी की अदालत ने 2011 के हत्या मामले में इंडियन नेशनल लोकदल (INLD) के पूर्व विधायक बलवीर सिंह उर्फ बाली पहलवान समेत सात आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है।
मामला 5 मई 2011 का है। कलानौर की अनाज मंडी में दो गुटों के बीच विवाद के बाद फायरिंग हो गई थी। गोलियों की चपेट में निगाना गांव के आढ़ती विष्णु राम आ गए और उनकी मौत हो गई। घटना में कई अन्य लोग भी घायल हुए थे।
इस हत्याकांड में शुरुआत में 19 लोगों को आरोपी बनाया गया था। विष्णु राम के बहनोई और बसाना गांव के पूर्व सरपंच सीताराम राठी की शिकायत पर कलानौर थाने में एफआईआर दर्ज हुई थी। आरोपियों पर हत्या, हत्या के प्रयास, दंगा, आपराधिक साजिश और आर्म्स एक्ट से जुड़े आरोप लगाए गए।
मामले में सुनवाई आगे बढ़ी तो 19 आरोपियों की तस्वीर बदलती चली गई। छह आरोपियों की मुकदमे के दौरान मौत हो गई, जबकि छह अन्य के खिलाफ अभियोजन पर्याप्त सबूत पेश नहीं कर सका। अदालत ने उन्हें बरी कर दिया। अब सात आरोपी दोषी ठहराए गए हैं।
इन दोषियों में पूर्व विधायक बाली पहलवान के अलावा सुनील कुमार, दिनेश कुमार, राजेश, पवन, सुनील और मुकेश शामिल हैं। सभी मोखरा गांव के रहने वाले हैं।
आखिर उस दिन हुआ क्या था?
कलानौर मंडी में हुए विवाद की वजह को लेकर मामले में दो तरह की बातें सामने आईं। एक पक्ष के मुताबिक बाली पहलवान के कुछ साथी पशुओं के लिए चारा या दान जुटाने के सिलसिले में बाजार पहुंचे थे। वहीं उनकी एक आढ़ती राठी से कहासुनी हो गई, जिसने बाद में हिंसक रूप ले लिया।
दूसरे पक्ष के मुताबिक विवाद की जड़ 5 लाख रुपये की कथित सुरक्षा राशि की मांग थी। इसी को लेकर दोनों पक्ष आमने-सामने आए और देखते ही देखते मामला फायरिंग तक पहुंच गया।
गिरफ्तारी रोकने के लिए गांव में जुटे थे समर्थक
हत्याकांड के बाद बाली पहलवान की गिरफ्तारी भी आसान नहीं रही। उनके पैतृक गांव मोखरा में ग्रामीणों और हथियारबंद समर्थकों ने पुलिस को उन्हें गिरफ्तार करने से रोकने का प्रयास किया था। बाद में बाली पहलवान ने 27 मई 2011 को आत्मसमर्पण कर दिया।
जमानत मिलने से पहले उन्होंने करीब सात साल हिरासत में बिताए।
51 गवाहों की गवाही के बाद फैसला
इस लंबे चले मुकदमे में अभियोजन पक्ष ने घायल प्रत्यक्षदर्शियों समेत 51 गवाह पेश किए। इन्हीं गवाहियों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने पूर्व विधायक सहित सात आरोपियों को हत्या के मामले में दोषी माना और सभी को उम्रकैद की सजा सुनाई।
इस फैसले के साथ 2011 में कलानौर अनाज मंडी में हुई उस खूनी झड़प का 15 साल लंबा कानूनी अध्याय अब एक अहम पड़ाव पर पहुंच गया है।
नई हवा खबरें अपने मोबाइल पर नियमित और डायरेक्ट प्राप्त करने के लिए व्हाट्सएप नंबर 9460426838 सेव करें और ‘Hi’ और अपना नाम, स्टेट और सिटी लिखकर मैसेज करें। आप अपनी खबर या रचना भी इस नंबर पर भेज सकते हैं।
