राजस्थान कैबिनेट ने कर्मचारियों के लिए प्रमोशन में 2 साल की छूट, दिव्यांगों को 2016 से नोशनल बेनेफिट और पुत्र वधू को अनुकम्पा नियुक्ति समेत कई बड़े फैसले किए।
जयपुर, 13 अगस्त। राजस्थान में सरकारी कर्मचारियों के लिए गुरुवार की कैबिनेट बैठक कई अहम फैसले लेकर आई। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में हुई बैठक में पदोन्नति, दिव्यांग कर्मचारियों के प्रमोशन, अनुकम्पा नियुक्ति, प्रशिक्षण के दौरान नौकरी छोड़ने पर वसूली और महिला कर्मचारियों की छुट्टियों से जुड़े कई फैसलों को मंजूरी दी गई।
सबसे बड़ा फैसला वर्ष 2026-27 में पदोन्नति के लिए वांछित अनुभव में दो साल की सशर्त छूट देने का है। इसके अलावा सरकारी कर्मचारी की मृत्यु की स्थिति में उसकी पुत्र वधू को भी अनुकम्पा नियुक्ति के दायरे में लाया गया है। दिव्यांग कर्मचारियों को पदोन्नति में आरक्षण का 30 जून 2016 से नोशनल बेनेफिट देने का भी निर्णय हुआ है।
प्रमोशन के लिए दो साल की छूट, लेकिन शर्त भी लागू
उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचन्द बैरवा ने बताया कि वर्ष 2026-27 में पदोन्नति के लिए वांछित अनुभव में दो साल की छूट दी जाएगी। यह लाभ उन्हीं कार्मिकों को मिलेगा, जिन्हें वर्ष 2023-24, 2024-25 और 2025-26 में यह छूट नहीं मिली थी।
इसके लिए विभिन्न सेवा नियमों में संशोधन कर दो साल के सशर्त शिथिलन का प्रावधान किया जाएगा। सरकार का कहना है कि इससे अनुभव की कमी के कारण खाली रह जाने वाले पदों को भरा जा सकेगा।
दिव्यांग कर्मचारियों को 2016 से मिलेगा नोशनल बेनेफिट
कैबिनेट ने राजस्थान दिव्यांगजन अधिकार (संशोधन) नियम-2026 को भी मंजूरी दी है। इसके तहत सरकारी सेवा में कार्यरत दिव्यांग कर्मचारियों को पदोन्नति में आरक्षण का नोशनल बेनेफिट 30 जून 2016 से दिया जाएगा।
राज्य में दिव्यांग कर्मचारियों को पदोन्नति में चार प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा है। इस फैसले को वर्ष 2026-27 की बजट घोषणा की अनुपालना से जोड़ते हुए लिया गया है।
सरकारी कर्मचारी की मौत के बाद अब बहू भी नौकरी की हकदार
कैबिनेट ने अनुकम्पा नियुक्ति से जुड़े नियम में भी बड़ा बदलाव किया है। मृत सरकारी कर्मचारी के पात्र आश्रितों की सूची में अब ‘पुत्र वधू’ को भी शामिल किया जाएगा।
इस फैसले से मृतक सरकारी कर्मचारी की पुत्र वधू को भी अनुकम्पा नियुक्ति मिल सकेगी, ताकि परिवार के भरण-पोषण में मदद मिल सके।
प्रशिक्षण के दौरान नौकरी छोड़ी तो वेतन-भत्ते की वसूली नहीं
राजपत्रित पद पर नियुक्ति के बाद प्रशिक्षण के दौरान या प्रशिक्षण समाप्त होने के दो साल के भीतर नौकरी छोड़ने के मामले में भी कर्मचारियों को राहत दी गई है।
अब ऐसे मामलों में कर्मचारी से केवल प्रशिक्षण पर हुआ खर्च वसूला जाएगा। वेतन-भत्तों की वसूली नहीं होगी।
वहीं, यदि कर्मचारी राज्य या केंद्र सरकार के किसी विभाग अथवा उपक्रम में नई नियुक्ति मिलने के कारण पद छोड़ता है तो उससे प्रशिक्षण खर्च और प्रशिक्षण अवधि में मिले वेतन-भत्तों की भी वसूली नहीं होगी।
एकल महिला कर्मचारियों को अब साल में 6 चरणों में Child Care Leave
राज्य की एकल महिला कर्मचारियों के लिए भी कैबिनेट ने राहत दी है। अब Child Care Leave एक कैलेंडर वर्ष में तीन के बजाय छह चरणों में स्वीकृत की जा सकेगी।
सरोगेसी के जरिए मातृत्व प्राप्त करने वाली महिला कर्मचारियों के लिए भी अवकाश से जुड़ा प्रावधान किया गया है। सरोगेट मदर को 180 दिन और कमीशनिंग मदर को 90 दिन का मातृत्व अवकाश मिलेगा।
इन प्रावधानों के लिए राजस्थान सेवा नियम-1951 में संशोधन को मंजूरी दी गई है।
वार्डन भर्ती का रास्ता खुला, 470 पदों पर भर्ती संभव
जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग के राजकीय आवासीय विद्यालयों और छात्रावासों में वार्डन के पदों पर भर्ती का रास्ता भी साफ किया गया है।
नियमों में संशोधन के बाद छात्रावास अधीक्षक महिला ग्रेड-2 के 254 पद सहित कुल 470 पद राजस्थान अधीनस्थ एवं मंत्रालयिक सेवा समान पात्रता परीक्षा के माध्यम से भरे जा सकेंगे।
अब तक इन पदों को शिक्षा विभाग से प्रतिनियुक्ति के जरिए भरा जाता था।
वन विभाग में भी प्रमोशन के रास्ते खुलेंगे
कैबिनेट ने राजस्थान वन अधीनस्थ सेवा नियम-2015 में संशोधन को भी मंजूरी दी है। इससे वनरक्षक से सहायक वनपाल, सहायक वनपाल से वनपाल और सर्वेयर से कनिष्ठ अभियंता के पदों पर पदोन्नति का रास्ता खुलेगा।
महिला एवं बाल विकास विभाग के सेवा नियमों में संशोधन को भी मंजूरी दी गई है। इससे ICDS में संयुक्त निदेशक तथा कार्यक्रम निदेशक/अतिरिक्त निदेशक के दो नए पदनाम शामिल किए जाएंगे और विभागीय पदोन्नति के अतिरिक्त अवसर मिलेंगे।
कर्मचारियों के अलावा कैबिनेट ने ये बड़े फैसले भी लिए
पेड़ काटने पर अब एक लाख तक जुर्माना और जेल
पर्यावरण संरक्षण के लिए द राजस्थान ट्रीज (प्रोटेक्शन) बिल-2026 के प्रारूप को मंजूरी दी गई है। इसे आगामी विधानसभा सत्र में पेश किया जाएगा।
प्रस्तावित कानून में खेजड़ी, रोहिड़ा, बरगद, पीपल, लसोड़ा, तेंदू, महुआ, कैर और चिरोंजी सहित 29 महत्वपूर्ण वृक्ष प्रजातियों के संरक्षण पर जोर दिया गया है।
गैर-वन भूमि पर खड़े पेड़ों को अधिकृत अनुमति के बिना काटने पर एक साल तक की जेल या एक लाख रुपए तक जुर्माना अथवा दोनों का प्रावधान किया गया है। पेड़ काटने की अनुमति मिलने पर उसके स्थान पर निर्धारित संख्या में नए पेड़ लगाने होंगे।
राजस्थान में UCC बिल का ड्राफ्ट मंजूर
कैबिनेट ने राजस्थान यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल-2026 के प्रारूप को भी मंजूरी दी है। इसे आगामी विधानसभा सत्र में पेश किया जाएगा।
प्रस्तावित कानून में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, भरण-पोषण और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े कानूनों को एक समान और व्यवस्थित करने का प्रावधान है। इसके तहत कानून लागू होने के बाद होने वाले सभी विवाहों का 60 दिनों के भीतर पंजीकरण अनिवार्य होगा।
बहुविवाह पर रोक का प्रावधान है, जबकि अलग-अलग धर्मों की पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार विवाह करने की स्वतंत्रता बनी रहेगी। प्रस्तावित प्रावधान अनुसूचित जनजातियों और संविधान के तहत संरक्षित पारंपरिक अधिकारों वाले वर्गों पर लागू नहीं होंगे।
लिव-इन संबंध शुरू करने और समाप्त करने की लिखित सूचना या पंजीकरण का प्रावधान भी प्रस्तावित है।
1971 के युद्ध के 35 शहीद परिवारों को अब मिलेगा नौकरी का हक
1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान गंभीर रूप से घायल होने के बाद 1 जनवरी से 31 अक्टूबर 1972 के बीच शहीद हुए 35 सैनिकों को भी ऑपरेशन कैक्टस लिली के तहत बैटल कैजुअल्टी घोषित किया गया है।
कैबिनेट ने नियमों में संशोधन कर इनके परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का रास्ता साफ किया है। इसके लिए निर्धारित समय सीमा को 31 दिसंबर 1971 से बढ़ाकर 31 अक्टूबर 1972 किया गया है।
गांवों में पानी की व्यवस्था के लिए नई नीति
ग्रामीण क्षेत्रों में नल से नियमित और स्वच्छ जलापूर्ति के लिए संचालन एवं संधारण नीति को मंजूरी दी गई है। इसमें जल जीवन मिशन 2.0 के प्रावधान शामिल किए गए हैं।
ग्राम पंचायत, ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति, क्लस्टर समिति, ब्लॉक, जिला और राज्य स्तर पर निगरानी एवं संचालन का ढांचा बनाया जाएगा।
उद्योग और सौर परियोजनाओं के लिए जमीन आवंटन
कैबिनेट ने जैसलमेर के पारेवर में अल्ट्राटेक सीमेंट लिमिटेड को करीब 306 हेक्टेयर औद्योगिक भूमि आवंटित करने को मंजूरी दी है।
इसके साथ ही बीकानेर और जैसलमेर में सौर ऊर्जा तथा जैसलमेर और बाड़मेर में सोलर-विंड हाइब्रिड परियोजनाओं के लिए भूमि आवंटन के प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई।
जैसलमेर के चिन्नू गांव में एस्केप जलाशय निर्माण से प्रभावित 21 गैर-खातेदार काश्तकारों को उसी गांव में भूमि आवंटित करने के प्रस्ताव को भी कैबिनेट ने मंजूरी दी है।
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