राजस्थान वाणिज्यिक कर विभाग की कार्रवाई में 137 फर्मों की जांच हुई, जिनमें 106 फर्जी मिलीं। इनका 547.58 करोड़ का कारोबार और 77.65 करोड़ ITC जांच के दायरे में आया।
जयपुर। राजस्थान में फर्जी फर्मों के जरिए टैक्स चोरी का खेल कितना बड़ा हो सकता है, इसकी तस्वीर सोमवार को सामने आई एक बड़ी कार्रवाई से मिली। वाणिज्यिक कर विभाग ने प्रदेशभर में एक साथ 137 फर्मों को जांच के घेरे में लिया, लेकिन जांच आगे बढ़ी तो इनमें से 106 फर्में फर्जी निकलीं।
यानी जिन फर्मों के नाम पर करोड़ों का कारोबार और ITC का लेन-देन चल रहा था, उनमें बड़ी संख्या में वास्तविक कारोबार का ही अस्तित्व नहीं मिला। जांच में इन 106 फर्जी फर्मों का कारोबार 547.58 करोड़ रुपए तक पहुंचा हुआ मिला। इनके जरिए करीब 77.65 करोड़ रुपए के ITC से जुड़े लेन-देन सामने आए।
कागजों पर कारोबार, आंकड़ा 547 करोड़ के पार
विभाग की कार्रवाई सोमवार सुबह 10 बजे शुरू हुई और देर रात तक चली। 16 जॉन की टीमों ने संदिग्ध फर्मों के पंजीयन, कारोबार और ITC लेजर को खंगाला। जिन 106 फर्मों को फर्जी पाया गया, उनका कुल कारोबार 54,758.41 लाख रुपए दर्ज था। इनके साथ जुड़े ITC की राशि 7,765.02 लाख रुपए थी।
जांच के दौरान ITC लेजर में 806.93 लाख रुपए की राशि उपलब्ध मिली। विभाग ने इसमें से 464.94 लाख रुपए यानी करीब 4.65 करोड़ रुपए का ITC ब्लॉक कर दिया।
78 फर्मों का कनेक्शन राज्य क्षेत्र से
106 फर्जी फर्मों में 78 राज्य क्षेत्राधिकार और 28 केंद्र क्षेत्राधिकार की निकलीं राज्य क्षेत्राधिकार वाली 78 फर्मों का कारोबार 460 करोड़ रुपए से ज्यादा रहा। इनके साथ संबंधित ITC करीब 60.28 करोड़ रुपए था। केंद्र क्षेत्राधिकार की 28 फर्मों का कारोबार भी करीब 87.58 करोड़ रुपए निकला और इनसे जुड़ा ITC करीब 17.37 करोड़ रुपए रहा।
असली फर्मों में भी मिला ITC का खेल
जांच यहीं खत्म नहीं हुई। विभाग ने 31 वास्तविक फर्मों की भी पड़ताल की और वहां भी कर संबंधी अनियमितताएं सामने आईं। इन 31 फर्मों का कारोबार 18.93 करोड़ रुपए था और करीब 2.26 करोड़ रुपए का ITC जांच के दायरे में आया। इनके ITC लेजर में उपलब्ध 77.45 लाख रुपए में से 17.60 लाख रुपए का ITC ब्लॉक किया गया। इनमें 25 फर्में राज्य और 6 फर्में केंद्र क्षेत्राधिकार से संबंधित थीं।
असली कारोबार के बिना इनवॉइस से ITC तक
विभाग की नजर अब उस तरीके पर है, जिसके जरिए फर्जी फर्मों का इस्तेमाल किया जा रहा है। जांच में खास तौर पर बिना वास्तविक कारोबार के इनवॉइस जारी करने, अपात्र ITC लेने और उसे दूसरी फर्मों तक पहुंचाने जैसी गतिविधियों को देखा जा रहा है।
तकनीकी और डेटा आधारित जांच के जरिए विभाग ऐसे लेन-देन को पकड़ने की कोशिश कर रहा है, जहां फर्म का पंजीयन तो है, लेकिन उसके नाम पर दिखाया गया कारोबार वास्तविक गतिविधियों से मेल नहीं खाता।
सोमवार की कार्रवाई ने यह भी साफ कर दिया कि मामला सिर्फ कुछ फर्जी पंजीयन तक सीमित नहीं है। 106 फर्जी फर्मों के नाम पर 547 करोड़ रुपए से ज्यादा का कारोबार दर्ज होना इस पूरे नेटवर्क की संभावित गहराई की ओर इशारा करता है।म अब विभाग जांच में सामने आए साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगा।
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