इराक और सीरिया ने बंद पड़ी रणनीतिक तेल पाइपलाइन को फिर शुरू करने के लिए समझौता किया है। जानिए कैसे यह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का विकल्प बन सकती है और क्यों पूरी दुनिया की नजर इस फैसले पर है।
मध्य पूर्व की ऊर्जा राजनीति में बड़ा मोड़ आता दिख रहा है। लंबे समय से बंद पड़ी एक रणनीतिक तेल पाइपलाइन को दोबारा चालू करने की दिशा में इराक और सीरिया ने अहम कदम उठाया है। दोनों देशों ने एक ऐसे समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिससे भविष्य में तेल निर्यात के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर निर्भरता कम करने का रास्ता खुल सकता है।
यह समझौता अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन में आयोजित एक निवेश सम्मेलन के दौरान हुआ, जहां इराक में अमेरिकी निवेश और ऊर्जा सहयोग पर चर्चा की गई।
2003 से बंद पाइपलाइन को फिर मिलेगी जिंदगी
समझौते का मकसद उत्तरी इराक के किर्कुक से सीरिया के भूमध्यसागरीय (Mediterranean) तट तक जाने वाली ऐतिहासिक तेल पाइपलाइन को फिर से तैयार करना है। अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन के मुताबिक यह पाइपलाइन प्रतिदिन 7 लाख बैरल तेल ढोने की क्षमता रखती है।
2003 में इराक युद्ध के दौरान क्षतिग्रस्त होने के बाद यह पाइपलाइन पूरी तरह बंद हो गई थी। अब इसे फिर से चालू करने की योजना को क्षेत्र की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
अमेरिका की मौजूदगी में हुआ समझौता
समझौते पर बसरा ऑयल कंपनी के CEO बासेम अब्दुल करीम नस्र और सीरियन पेट्रोलियम कंपनी के CEO यूसुफ कब्लावी ने हस्ताक्षर किए। इस मौके पर अमेरिकी ऊर्जा सचिव क्रिस राइट भी मौजूद रहे।
राइट ने कहा कि इराक में ऊर्जा क्षेत्र में सुधार, तेल उत्पादन बढ़ाने और पड़ोसी देशों पर निर्भरता घटाने की बड़ी संभावनाएं हैं। उनका मानना है कि मजबूत ऊर्जा ढांचा क्षेत्र में आर्थिक स्थिरता और निवेश को भी बढ़ावा देगा।
होर्मुज संकट ने बढ़ाई नई राह की जरूरत
इराक लंबे समय से अपने अधिकांश तेल निर्यात के लिए दक्षिणी शहर बसरा और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर निर्भर रहा है। लेकिन अमेरिका-ईरान तनाव के दौरान इस समुद्री मार्ग पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से इराक के तेल निर्यात पर गंभीर असर पड़ा।
यही वजह है कि अब वैकल्पिक पाइपलाइन नेटवर्क को मजबूत करना इराक की प्राथमिकता बन गया है।
तेल उत्पादन में आई बड़ी गिरावट
OPEC के आंकड़ों के अनुसार, फरवरी में अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर हमलों से पहले इराक का तेल उत्पादन करीब 42 लाख बैरल प्रतिदिन था। जून तक यह घटकर लगभग 19 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया, यानी उत्पादन में 50 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।
इस गिरावट ने इराक के लिए सुरक्षित और वैकल्पिक निर्यात मार्गों की जरूरत को और भी अहम बना दिया है।
पूरे खाड़ी क्षेत्र में पाइपलाइन विस्तार की होड़
सिर्फ इराक ही नहीं, बल्कि खाड़ी के कई देश भी होर्मुज पर अपनी निर्भरता कम करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।
- संयुक्त अरब अमीरात ओमान की खाड़ी स्थित फुजैराह तक अपनी पाइपलाइन क्षमता बढ़ा रहा है।
- वहीं सऊदी अरब भी रेड सी तक जाने वाली पाइपलाइन की क्षमता बढ़ाने पर विचार कर रहा है, ताकि तेल निर्यात के लिए वैकल्पिक मार्ग तैयार हो सके।
हालांकि ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि नई पाइपलाइनें समुद्री जोखिम कम कर सकती हैं, लेकिन क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा ढांचे पर संभावित खतरों को पूरी तरह खत्म नहीं कर सकतीं।
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