MPUAT की टीम ने खेरवाड़ा और गोगुन्दा कृषि कॉलेजों का किया बारीकी से निरीक्षण | भवन, लैब, लाइब्रेरी से लेकर छात्रों तक परखी हर व्यवस्था, अब रिपोर्ट के आधार पर होगा फैसला

एमपीयूएटी उदयपुर की त्रि-सदस्यीय समिति ने राजकीय कृषि महाविद्यालय खेरवाड़ा और गोगुन्दा का संबद्धता प्रक्रिया के तहत निरीक्षण किया। भवन, प्रयोगशालाओं, पुस्तकालय, कक्षाओं और शैक्षणिक व्यवस्थाओं का मूल्यांकन कर रिपोर्ट तैयार की जाएगी।

उदयपुर। महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमपीयूएटी), उदयपुर से संबद्धता (Affiliation) की प्रक्रिया के तहत शुक्रवार को विश्वविद्यालय की त्रि-सदस्यीय निरीक्षण समिति ने राजकीय कृषि महाविद्यालय, खेरवाड़ा और राजकीय कृषि महाविद्यालय, गोगुन्दा का विस्तृत स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान कॉलेजों की आधारभूत सुविधाओं, शैक्षणिक व्यवस्थाओं और संसाधनों का गहन मूल्यांकन किया गया। समिति अपनी विस्तृत रिपोर्ट और अनुशंसाएं विश्वविद्यालय को सौंपेगी, जिसके आधार पर आगे की प्रक्रिया तय होगी।

निरीक्षण समिति में डॉ. एल. एन. महावर (प्रोफेसर, उद्यानिकी विभाग, राजस्थान कृषि महाविद्यालय, उदयपुर) अध्यक्ष के रूप में शामिल रहे। उनके साथ डॉ. रमेश बाबू (प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, कीट विज्ञान विभाग) और डॉ. जी. एल. मीणा (प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, कृषि अर्थशास्त्र विभाग) सदस्य के रूप में मौजूद रहे।

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भवन, प्रयोगशाला, लाइब्रेरी और कृषि भूमि तक का हुआ मूल्यांकन

समिति ने दोनों महाविद्यालयों में भवनों, कक्षाओं, प्रयोगशालाओं, पुस्तकालय, कृषि भूमि, उपकरणों, संकाय, मानव संसाधन और अन्य आधारभूत सुविधाओं का विस्तृत निरीक्षण किया। आवश्यक अभिलेखों का सत्यापन किया गया तथा नियमानुसार फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी भी कराई गई।

निरीक्षण में पाया गया कि राजकीय कृषि महाविद्यालय, खेरवाड़ा का भवन लगभग पूरी तरह तैयार है और शैक्षणिक गतिविधियों के संचालन के लिए अधिकांश आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हैं। वहीं राजकीय कृषि महाविद्यालय, गोगुन्दा में भवन निर्माण कार्य अभी जारी है। समिति ने माना कि शेष निर्माण पूरा होने के बाद वहां भी अधोसंरचनात्मक सुविधाएं पूर्ण रूप से विकसित हो जाएंगी।

कक्षाओं में पहुंची समिति, विद्यार्थियों से भी किया संवाद

निरीक्षण के दौरान दोनों महाविद्यालयों में नियमित शिक्षण कार्य और परीक्षाएं संचालित होती मिलीं। समिति ने विभिन्न कक्षाओं का निरीक्षण कर विद्यार्थियों से भी सीधा संवाद किया।

समिति ने पाया कि विद्यार्थियों की उपस्थिति शत-प्रतिशत नहीं थी, लेकिन एक सकारात्मक पहलू यह सामने आया कि कक्षाओं में उपस्थित छात्राओं की संख्या छात्रों से अधिक थी। समिति ने इसे कृषि शिक्षा में बालिकाओं की बढ़ती भागीदारी का उत्साहजनक संकेत बताया।

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विद्यार्थियों को दी टिकाऊ और प्राकृतिक खेती अपनाने की सीख

विद्यार्थियों के साथ आयोजित संवाद कार्यक्रम में समिति ने भविष्य के कृषि विशेषज्ञों से किसानों को पर्यावरण-अनुकूल खेती के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया।

समिति के सदस्यों ने कहा कि किसानों को हरित खाद (ग्रीन मैन्योरिंग) के अधिक उपयोग, रासायनिक उर्वरकों के संतुलित एवं न्यूनतम प्रयोग, जैविक और कार्बनिक उर्वरकों को बढ़ावा देने के लिए जागरूक किया जाना चाहिए। साथ ही मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों के उपयोग और प्राकृतिक संसाधनों के वैज्ञानिक प्रबंधन पर भी विशेष बल दिया गया।

अब विश्वविद्यालय को सौंपी जाएगी विस्तृत रिपोर्ट

विश्वविद्यालय के निर्देशानुसार निरीक्षण के दौरान जुटाए गए सभी तथ्य, दस्तावेज, फोटोग्राफ और वीडियोग्राफी के आधार पर समिति अपनी विस्तृत निरीक्षण रिपोर्ट और अनुशंसाएं संयोजक एवं निदेशक, आवासीय निर्देशन निदेशालय, महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर को सौंपेगी।

निरीक्षण के दौरान ये अधिकारी रहे मौजूद

निरीक्षण के दौरान डॉ. दिनेश हंस (अधिष्ठाता), डॉ. रेखा पंचाल (अधिष्ठाता), श्री राजीव शर्मा (नोडल अधिकारी), डॉ. जितेन्द्र कुमार, डॉ. महेन्द्र गोरा, डॉ. के. के. चन्देल, श्री विजेन्द्र, श्री मुकेश कुमार चौधरी, डॉ. अर्जुन सिंह राजपूत, डॉ. बीरेन्द्र, डॉ. सुरेश कुमार, डॉ. मुकेश कुमार यादव, डॉ. आशीष राजा जांगिड़, डॉ. सुरेन्द्र कुमार धायल तथा डॉ. नरेन्द्र चौधरी सहित विद्या संबल योजना के अंतर्गत कार्यरत अतिथि संकाय, अशैक्षणिक कार्मिक और अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

सभी अधिकारियों और कर्मचारियों ने निरीक्षण समिति को आवश्यक अभिलेख, सूचनाएं और अन्य सहयोग उपलब्ध कराया। समिति ने महाविद्यालय प्रशासन की व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए विश्वास जताया कि दोनों महाविद्यालय विश्वविद्यालय के शैक्षणिक एवं अधोसंरचनात्मक मानकों को पूरा करते हुए गुणवत्तापूर्ण कृषि शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

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