DMA ने रेजिडेंट डॉक्टरों के लिए मानवीय कार्य परिस्थितियों, नियमित अवकाश और 24-36 घंटे की लगातार ड्यूटी समाप्त करने की मांग उठाई है। डॉ. अमित व्यास ने छुट्टियां रोकने वालों को चेतावनी दी।
नई दिल्ली
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देशभर के मेडिकल कॉलेजों में रेजिडेंट डॉक्टरों से लगातार 24 से 36 घंटे तक ड्यूटी लेने की प्रथा के खिलाफ अब आवाज और तेज हो गई है। डेमोक्रेटिक मेडिकल एसोसिएशन (DMA) ने साफ कहा है कि रेजिडेंट डॉक्टरों को न केवल नियमानुसार अवकाश मिलना चाहिए, बल्कि उनकी ड्यूटी भी मानवीय और वैज्ञानिक आधार पर तय होनी चाहिए।
संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि किसी मेडिकल कॉलेज या विभाग द्वारा डॉक्टरों को निर्धारित अवकाश से वंचित किया गया या अमानवीय कार्य परिस्थितियों में काम करने को मजबूर किया गया तो उसके खिलाफ प्रशासनिक, संगठनात्मक और कानूनी स्तर पर कार्रवाई की जाएगी।
रोहतक मॉडल को बताया मिसाल
DMA ने हरियाणा के पंडित बी.डी. शर्मा यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज़, रोहतक द्वारा 5 फरवरी 2025 को जारी आदेश का स्वागत किया है। इस आदेश के अनुसार MD, MS और MDS रेजिडेंट डॉक्टरों को अब वर्ष के 52 रविवारों में से केवल 10 रविवार ड्यूटी करनी होगी। इसके बदले उन्हें 10 अतिरिक्त अवकाश दिए जाएंगे, जिन्हें वे एक साथ लेकर अपने परिवार के साथ समय बिता सकेंगे।
इसके अलावा नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप 20 आकस्मिक अवकाश (Casual Leave) देने का भी प्रावधान किया गया है।
इन लोगों ने उठाया था मुद्दा
DMA के अनुसार इस फैसले के पीछे लंबे समय से चल रहे संवाद और प्रयासों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। संगठन ने बताया कि डॉ. अमित व्यास, डॉ. शुभ प्रताप सोलंकी, भानु कुमार और DMA की पूरी टीम ने लगातार डॉक्टरों की समस्याओं को उठाया।
इस दौरान हरियाणा भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मोहन लाल बड़ोली, पूर्व स्वास्थ्य मंत्री डॉ. कमल गुप्ता, विधायक सावित्री देवी जिंदल, विश्वविद्यालय के कुलपति और डीन अकादमिक अफेयर्स के साथ कई दौर की चर्चाएं भी हुईं।
DMA ने याद दिलाए पुराने नियम
संगठन ने सेंट्रल रेजिडेंसी स्कीम-1992 का हवाला देते हुए कहा कि—
- सप्ताह में 48 घंटे से अधिक नियमित कार्य लेना उचित नहीं है।
- एक बार में 12 घंटे से अधिक लगातार ड्यूटी करवाना निर्धारित मानकों के विपरीत है।
इसके बावजूद देश के कई मेडिकल कॉलेजों में आज भी रेजिडेंट डॉक्टरों से 24, 30 और यहां तक कि 36 घंटे तक लगातार काम लिया जा रहा है।
संविधान और BNS का भी दिया हवाला
DMA ने कहा कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 प्रत्येक नागरिक को जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार देता है, जबकि अनुच्छेद 42 मानवीय कार्य परिस्थितियों और उचित कार्य समय सुनिश्चित करने की बात करता है।
संगठन का कहना है कि यदि किसी डॉक्टर को लगातार ड्यूटी, नींद और भोजन से वंचित रखने, मानसिक उत्पीड़न, सार्वजनिक अपमान या अवैध कार्य परिस्थितियों में काम करने को मजबूर किया जाता है, तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत कार्रवाई की मांग की जा सकती है।
DMA की पांच बड़ी मांगें
DMA ने केंद्र और राज्यों से मांग की है कि—
- देश के सभी मेडिकल कॉलेजों में रोहतक मॉडल जैसी अवकाश नीति लागू की जाए।
- सेंट्रल रेजिडेंसी स्कीम-1992 को सख्ती से लागू किया जाए।
- रेजिडेंट डॉक्टरों की ड्यूटी अवधि वैज्ञानिक और मानवीय आधार पर तय हो।
- 24 से 36 घंटे तक लगातार ड्यूटी की व्यवस्था खत्म की जाए।
- डॉक्टरों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
‘छुट्टियां रोकना बर्दाश्त नहीं करेंगे’
DMA के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अमित व्यास ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी मेडिकल कॉलेज या विभाग द्वारा रेजिडेंट डॉक्टरों की छुट्टियां रोकना या मनमाने ढंग से समाप्त करना स्वीकार्य नहीं है।
उन्होंने कहा कि यदि किसी संस्थान द्वारा डॉक्टरों को नियमानुसार अवकाश देने से इनकार किया जाता है, तो DMA उसके खिलाफ हर स्तर पर संघर्ष करेगा और आवश्यक कानूनी कदम उठाने से भी पीछे नहीं हटेगा।
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