भजनलाल शर्मा कैबिनेट ने पेंशनर्स और कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए फेस ऑथेन्टिकेशन से जीवन प्रमाण पत्र की सुविधा दी। साथ ही राजस्थान इंडस्ट्रियल पॉलिसी, जल संरक्षण अभियान, गांवों के मास्टर प्लान और हजारों करोड़ के निवेश को मंजूरी मिली।
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जयपुर
राजस्थान सरकार की शुक्रवार को हुई कैबिनेट बैठक में ऐसा फैसला लिया गया, जिसने लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स की रोजमर्रा की सबसे बड़ी झंझट को आसान कर दिया। अब पेंशनर्स को हर साल जीवन प्रमाण पत्र के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। मोबाइल से फेस ऑथेन्टिकेशन के जरिए जीवन प्रमाण पत्र जमा किया जा सकेगा। इतना ही नहीं, अब अराजपत्रित कर्मचारी भी एसएसओ आईडी के माध्यम से जीवन प्रमाण पत्र जारी कर सकेंगे।
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मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमण्डल और मंत्रिपरिषद की बैठकों में एक साथ अन्य कई बड़े फैसले हुए—राजस्थान को ग्लोबल इंडस्ट्रियल हब बनाने की नई नीति, गांवों के लिए मास्टर प्लान, बिजली-पानी पर राहत, जल संरक्षण अभियान और हजारों करोड़ के औद्योगिक निवेश को मंजूरी। यानी सरकार ने कर्मचारियों से लेकर उद्योग और गांवों तक, कई मोर्चों पर एक साथ बड़ा दांव खेला है।
पेंशनर्स और विशेष योग्यजन को बड़ी राहत
उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने बताया कि मंत्रिमण्डल ने राजस्थान सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1996 में तीन अहम संशोधनों को मंजूरी दी है। अब विशेष योग्यजन बच्चों को स्थाई विकलांगता प्रमाण पत्र हर तीन साल में दोबारा जमा नहीं करना होगा। संशोधित नियम 67 के तहत एक बार जमा किया गया प्रमाण पत्र ही मान्य रहेगा।
वहीं नियम 134 में बदलाव के बाद पेंशनर्स मोबाइल एप के जरिए फेस ऑथेन्टिकेशन तकनीक से वार्षिक जीवन प्रमाण पत्र जमा कर सकेंगे। सबसे अहम बदलाव यह रहा कि अब राजपत्रित अधिकारियों के साथ अराजपत्रित कर्मचारी भी—चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को छोड़कर—एसएसओ आईडी से जीवन प्रमाण पत्र जारी करने के लिए अधिकृत होंगे।
सरकार ने परिवार पेंशन प्रक्रिया भी आसान कर दी है। पहले दो राजपत्रित अधिकारियों या सम्मानित व्यक्तियों के प्रमाणीकरण की जरूरत होती थी, अब केवल एक अधिकारी या सम्मानित व्यक्ति का प्रमाणीकरण ही पर्याप्त होगा।
राजस्थान को ‘ग्लोबल इंडस्ट्रियल हब’ बनाने की तैयारी
कैबिनेट ने राजस्थान इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट पॉलिसी को मंजूरी दी, जिसका लक्ष्य राज्य की अर्थव्यवस्था को 2028-29 तक 350 बिलियन डॉलर तक पहुंचाना है। पत्रकार वार्ता में सुरेश सिंह रावत और हीरालाल नागर के साथ कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने बताया कि यह नीति ‘4जी’—ग्रीन, गवर्नेंस, ग्रोथ और ग्लोबलाइजेशन—पर आधारित होगी।
इसके तहत अक्षय ऊर्जा, सर्कुलर इकोनॉमी, पर्यावरण अनुकूल उद्योग, सेमीकंडक्टर, डाटा सेंटर, डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग, टेक्सटाइल, जेम्स एंड ज्वैलरी, टूरिज्म, डेयरी और एग्रो प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों को बढ़ावा दिया जाएगा।
रीको और नॉन-रीको क्षेत्रों में नए CETP और इंटीग्रेटेड रिसोर्स रिकवरी पार्क बनाए जाएंगे। डीएमआईसी कॉरिडोर में नोड आधारित औद्योगिक पार्क विकसित किए जाएंगे। सरकार फास्ट ट्रैक अप्रूवल, लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी और प्लग एंड प्ले सुविधाओं को भी बढ़ावा देगी।
गांवों का ब्लूप्रिंट तैयार, 26 मई को विशेष ग्राम सभाएं
मंत्रिपरिषद की बैठक में मुख्यमंत्री विकसित ग्राम-शहरी वार्ड अभियान की समीक्षा भी हुई। यह अभियान 19 मार्च से 15 मई 2026 तक चला, जिसमें 457 पंचायत समितियों की 14,403 ग्राम पंचायतों और 309 नगरीय निकायों के 10,245 वार्डों से सुझाव लिए गए।
महिलाओं, युवाओं, किसानों, कारीगरों और दिव्यांगजनों से मिले सुझावों के आधार पर ड्राफ्ट मास्टर प्लान तैयार किए गए हैं। अब 26 मई को प्रदेशभर की ग्राम पंचायतों में विशेष ग्राम सभाएं आयोजित कर इन्हें मंजूरी दिलाई जाएगी।
‘जल चौपाल’ से लेकर ‘जल गौरव सम्मान’ तक
सरकार ने 25 मई से 5 जून तक ‘वंदे गंगा जल संरक्षण-जन अभियान’ चलाने की भी रणनीति बनाई है। इसकी शुरुआत नदियों, बांधों और तालाबों के पूजन और डी-सिल्टिंग से होगी। ग्राम पंचायतों और शहरी क्षेत्रों में जल स्रोतों की सफाई, श्रमदान, दीप प्रज्ज्वलन, किसान चौपाल, ड्रिप और स्प्रिंकलर तकनीक पर कार्यशालाएं आयोजित होंगी। विश्व पर्यावरण दिवस पर उत्कृष्ट कार्य करने वाले जल योद्धाओं, पंचायतों और संस्थाओं को “जल गौरव सम्मान” दिया जाएगा।
सरकार का दावा—मांग से ज्यादा बिजली उपलब्ध
भीषण गर्मी के बीच बिजली और पानी की स्थिति पर भी कैबिनेट में चर्चा हुई। ऊर्जा राज्यमंत्री हीरालाल नागर ने बताया कि 20 मई को राज्य में बिजली की अधिकतम मांग 16,487 मेगावाट रही, जबकि उपलब्धता 16,580 मेगावाट थी। यानी मांग से ज्यादा बिजली उपलब्ध रही।
सरकार ने गर्मी से पहले हैंडपंपों और नलकूपों की मरम्मत के लिए विशेष अभियान चलाया। साथ ही हेल्पलाइन 181 पर आने वाली बिजली और पेयजल शिकायतों का 24 घंटे में समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
जैसलमेर में हजारों करोड़ का निवेश
कैबिनेट ने जैसलमेर में औद्योगिक परियोजनाओं को भी मंजूरी दी। Dalmia Cement को रामगढ़ क्षेत्र में 121.42 हेक्टेयर भूमि आवंटित की गई है, जहां करीब 3,047 करोड़ रुपए के निवेश से 3.6 मिलियन टन क्षमता का सीमेंट संयंत्र लगाया जाएगा। इससे लगभग 820 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। वहीं JK Cement को रेलवे लाइन परियोजना के लिए 71.37 हेक्टेयर भूमि आवंटन को मंजूरी दी गई है।
इसके अलावा जैसलमेर, बाड़मेर और बीकानेर में अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए भी भूमि आवंटन को हरी झंडी दी गई, जिससे नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन और स्थानीय रोजगार दोनों बढ़ेंगे।
बैठक में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन द्वारा “एग्रीकोला मेडल” मिलने पर मंत्रिपरिषद ने अभिनंदन प्रस्ताव भी पारित किया। बताया गया कि प्रधानमंत्री ने यह सम्मान देश के किसानों और पशुपालकों को समर्पित किया है।
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