जयपुर में राजस्थान दिवस समारोह–2026 के तहत चैंबर ऑफ कॉमर्स सभागार में ‘राजस्थान स्थापना से आज तक राष्ट्र निर्माण में राजस्थानियों का योगदान’ विषय पर परिचर्चा आयोजित हुई, जिसमें कई प्रमुख वक्ताओं ने विचार रखे।
जयपुर
राजस्थान दिवस समारोह–2026 के अवसर पर गुरुवार को राजस्थान चैंबर ऑफ कॉमर्स (Rajasthan Chamber of Commerce) परिसर स्थित श्री भैरोंसिंह शेखावत सभागार में एक ऐसा मंच सजा, जहां इतिहास, संस्कृति और विकास की धारा एक साथ बहती दिखाई दी। राजस्थान दिवस समारोह समिति, राजस्थान चैंबर ऑफ कॉमर्स और जयपुर फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में प्रदेश के प्रबुद्धजन, उद्योगपति, जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता बड़ी संख्या में जुटे।
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समारोह का सबसे अहम पड़ाव रही परिचर्चा— ‘राजस्थान स्थापना से आज तक राष्ट्र के निर्माण में राजस्थानियों का योगदान’। इस चर्चा में वक्ताओं ने राजस्थान के ऐतिहासिक संघर्ष, सांस्कृतिक विरासत और व्यापारिक उद्यमशीलता को देश के विकास की मजबूत धुरी बताया।
राजस्थान चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष डॉ. के. एल. जैन ने अपने उद्बोधन में कहा कि ऐसे आयोजन समाज को अपनी जड़ों से जोड़ते हैं और नई पीढ़ी को अपने गौरवशाली इतिहास से परिचित कराते हैं। उन्होंने कहा कि राजस्थान की परंपराएं, त्याग और उद्यमशीलता आज भी समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। डॉ. जैन ने प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मोहनलाल सुखाड़िया और भैरों सिंह शेखावत के विकास कार्यों को याद करते हुए कहा कि इन नेताओं ने राज्य को प्रगति की मजबूत दिशा दी।
राजस्थान चैम्बर के मानद सचिव और राजस्थान दिवस समारोह समिति के अध्यक्ष ललित तिवाड़ी ने कार्यक्रम की पृष्ठभूमि बताते हुए कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य राजस्थान के गौरवशाली इतिहास और राष्ट्र निर्माण में प्रदेश के योगदान को नई पीढ़ी तक पहुँचाना है। उन्होंने बताया कि राजस्थान का गठन चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन हुआ था, जो हिंदू नववर्ष का पहला दिन भी है, इसलिए इस दिन का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व और भी बढ़ जाता है।
जयपुर फाउंडेशन के अध्यक्ष सियाशरण लशकरी ने अपने विचार रखते हुए कहा कि राजस्थान की समृद्ध विरासत को संरक्षित रखना और उसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना हम सबकी जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम में राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष के प्रतिनिधि विनोद मिश्रा भी उपस्थित रहे। वहीं सिविल लाइंस विधायक डॉ. गोपाल शर्मा ने कहा कि राजस्थान का विकास केवल सरकारी योजनाओं से नहीं बल्कि समाज की सक्रिय भागीदारी और उद्यमशीलता से ही संभव है। उन्होंने युवाओं से शिक्षा, कौशल और नवाचार के माध्यम से प्रदेश की प्रगति में आगे आने का आह्वान किया।
परिचर्चा के मुख्य वक्ता और पूर्व शिक्षामंत्री डॉ. बी. डी. कल्ला ने अपने विचार रखते हुए कहा कि राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान को और मजबूत करने की आवश्यकता है। उन्होंने राजस्थानी भाषा को सूची में शामिल करने के लिए राज्य सरकार से पहल करने का आग्रह भी किया।
वरिष्ठ पत्रकार और स्तंभकार जितेंद्र सिंह शेखावत ने राजस्थान के गठन और एकीकरण की ऐतिहासिक प्रक्रिया पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि किस प्रकार विभिन्न रियासतों के एकीकरण से आधुनिक राजस्थान का स्वरूप सामने आया।
कार्यक्रम में राजस्थान के गठन और एकीकरण से जुड़े दस्तावेजों और दुर्लभ छायाचित्रों की विशेष प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसे उपस्थित लोगों ने काफी रुचि के साथ देखा। इस प्रदर्शनी के माध्यम से राजस्थान के इतिहास की कई महत्वपूर्ण झलकियां सामने आईं।
समारोह में शहर के अनेक उद्योगपति, व्यापारी, सामाजिक कार्यकर्ता और चैंबर कार्यकारिणी के सदस्य भी उपस्थित रहे। इनमें चैंबर के वरिष्ठ उपाध्यक्ष डी. एस. भंडारी, अतिरिक्त मानद सचिव दुलीचंद कडेल, संयुक्त सचिव डॉ. इंदर सिंह कुदरत और हेमजीत मालू सहित कई गणमान्य लोग शामिल थे।
कार्यक्रम का संचालन देवेंद्र कुमार भगत ने किया। अंत में ललित तिवाड़ी ने सभी अतिथियों और सहयोगी संस्थाओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सभी के सहयोग से ही यह आयोजन सफल हो पाया। समारोह के बाद अतिथियों के लिए हाई टी का आयोजन भी किया गया, जहां आपसी संवाद और विचार-विमर्श का सिलसिला देर तक चलता रहा।
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