अचानक क्यों निलंबित कर दिए गए एडीजे? | छह मामलों की जांच के बीच हाईकोर्ट की सख्त कार्रवाई

राजस्थान हाईकोर्ट (Rajasthan High Court) ने भीनमाल (Bhinmal) के एडीजे राजेंद्र साहू को छह मामलों की प्रारंभिक जांच के बीच तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। जांच प्रभावित न हो इसलिए उठाया गया कड़ा कदम।

जोधपुर 

राजस्थान के न्यायिक गलियारों में बुधवार को अचानक हलचल तेज हो गई। वजह बना एक ऐसा आदेश, जिसने जालोर जिले के भीनमाल न्यायालय से जुड़े न्यायिक तंत्र को चौंका दिया। राजस्थान हाईकोर्ट ने भीनमाल में पदस्थापित अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजेंद्र साहू को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

यह आदेश कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के निर्देश पर जारी हुआ है और इसके पीछे चल रही प्रारंभिक जांच को अहम वजह बताया जा रहा है। हाईकोर्ट प्रशासन के अनुसार एडीजे साहू के खिलाफ छह अलग-अलग मामलों में गंभीर आरोपों की प्रारंभिक जांच चल रही है।

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सूत्रों का कहना है कि अदालत प्रशासन को आशंका थी कि यदि संबंधित अधिकारी अपने पद पर बने रहते हैं, तो जांच प्रभावित हो सकती है। ऐसे में साक्ष्यों और गवाहों की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए निलंबन का कदम उठाया गया।

हालांकि आरोपों का पूरा ब्यौरा अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन न्यायिक हलकों में यह चर्चा है कि मामला अदालत की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक अनियमितताओं से जुड़ा हो सकता है। फिलहाल हाईकोर्ट ने इन विवरणों को गोपनीय रखा है।

राजस्थान हाईकोर्ट ने यह कार्रवाई राजस्थान सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1958 के प्रावधानों के तहत की है। निलंबन के दौरान एडीजे राजेंद्र साहू का मुख्यालय अब जोधपुर स्थित हाईकोर्ट तय किया गया है। उन्हें निर्देश दिया गया है कि वे तुरंत रजिस्ट्रार जनरल के समक्ष अपनी उपस्थिति दर्ज कराएं और बिना अनुमति जोधपुर मुख्यालय नहीं छोड़ें।

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नियमों के मुताबिक निलंबन अवधि में उन्हें न्यायिक कार्यों से अलग रखा जाएगा, लेकिन उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता मिलता रहेगा। यह भत्ता उनके मूल वेतन का एक हिस्सा होता है, जो जांच पूरी होने तक दिया जाता है।

अब पूरे मामले की निगरानी जोधपुर स्थित हाईकोर्ट मुख्यालय करेगा। प्रारंभिक जांच पूरी होने के बाद ही आगे की विभागीय कार्रवाई तय की जाएगी।

उधर, भीनमाल जैसे अहम न्यायिक केंद्र पर एडीजे स्तर के अधिकारी के अचानक निलंबन से स्थानीय वकीलों और वादियों के बीच चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। अदालत में लंबित मामलों की सुनवाई प्रभावित न हो, इसके लिए जल्द ही वैकल्पिक न्यायिक व्यवस्था किए जाने की संभावना जताई जा रही है।

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