भरतपुर के लटूरियां हनुमान मंदिर में तपस्वी बाबा रामशरण दास महाराज की 29वीं पुण्यतिथि पर संत समागम, रामकथा और विशाल भंडारे का आयोजन हुआ। देशभर से आए संतों ने सनातन धर्म और विश्व शांति का संदेश दिया।
भरतपुर
सिद्ध Shri Laturiya Hanuman Temple में शुक्रवार को आस्था, संत परंपरा और सनातन संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला। 113 वर्षीय तपस्वी बाबा रामशरण दास महाराज की 29वीं पुण्यतिथि और श्रीराम मंदिर निर्माण के उपलक्ष्य में चल रही रामकथा व संत समागम का भव्य समापन हुआ। इस अवसर पर श्रीराम यज्ञ, संत दर्शन और विशाल भंडारे में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा।
कार्यक्रम श्री लटूरियां हनुमान भक्त मण्डल और तपस्वी बाबा रामशरण दास महाराज के शिष्यों के तत्वावधान में आयोजित हुआ। समारोह में संतों ने सनातन धर्म, मानव कल्याण और विश्व शांति का संदेश देते हुए श्रद्धालुओं को धर्म और सेवा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।
समारोह में हिमालय निवासी महामण्डलेश्वर Abhiram Das Maharaj, अयोध्या के महन्त Devendra Prasadacharya Maharaj, महन्त Bindugadyacharya Maharaj, नेपाल के जगद्गुरु Swami Ramkrishnacharya Mahayogi तथा अयोध्या के रसिक पीठाधीश्वर Janmejay Sharan Ramdas Maharaj सहित कई प्रमुख संत उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता मंदिर के महन्त Bhanudas Maharaj और संत Maniram Das Maharaj के सान्निध्य में हुई।
महामंडलेश्वर अभिराम दास महाराज ने कहा कि भगवान की कृपा से ही मानव जीवन सफल होता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से नित्य भगवान के नाम का जाप करने, रामचरितमानस की चौपाइयों और सुंदरकांड का पाठ करने का संदेश दिया।
नेपाल से आए जगद्गुरु रामकृष्णाचार्य महाराज ने कहा कि सनातन धर्म मानव जीवन को सुरक्षित रखता है और विश्व में शांति की स्थापना करता है। जहां सनातन धर्म का पालन नहीं होता, वहां अशांति का वातावरण बन जाता है।
अयोध्या से पधारे महन्त बिन्दुगाद्याचार्य महाराज ने कहा कि इस युग में कष्टों से मुक्ति पाने के लिए भगवान श्रीराम का पूजन, संत सेवा और गौ सेवा अत्यंत आवश्यक है। वहीं रसिक पीठाधीश्वर जनमेजय शरण रामदास महाराज ने कहा कि संतों के दर्शन और सेवा का सौभाग्य हर किसी को नहीं मिलता, यह केवल भाग्यशाली लोगों को प्राप्त होता है।
मंदिर के महन्त भानुदास महाराज ने बताया कि तपस्वी बाबा रामशरण दास महाराज की पुण्यतिथि और श्रीराम मंदिर निर्माण के उपलक्ष्य में 26 फरवरी से 7 मार्च तक रामकथा, रामलीला, रासलीला, संत सम्मेलन और संत दर्शन जैसे अनेक धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस दौरान अयोध्या, नेपाल, वृंदावन, चित्रकूट, नर्मदा, पुष्कर, बनारस, प्रयागराज, बिहार, मध्य प्रदेश, गुजरात, दिल्ली और झारखंड सहित देश के विभिन्न स्थानों से बड़ी संख्या में संत पहुंचे।
60 हलवाइयों ने बनाई 500 मन की प्रसादी
कार्यक्रम के अंतिम दिन आयोजित भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसादी ग्रहण की। मंदिर के सेवक सीताराम गुप्ता और पार्षद महेश चंद ने बताया कि 26 फरवरी से 7 मार्च तक लाखों श्रद्धालुओं ने लटूरियां हनुमान के दर्शन किए।
भंडारे की व्यवस्था भी अपने आप में अनोखी रही। हलवाई अमर सिंह की टीम के 60 कारीगरों ने मिलकर विशाल प्रसादी तैयार की। भंडारे में करीब 50 मन सब्जी, 20 कट्टे चीनी, 400 किलोग्राम चावल, 80 किलोग्राम मेवा, 800 किलोग्राम गुड़, 10 पीपे सरसों तेल, 25 पीपे रिफाइंड, 12 डिब्बे देसी घी और सवा लाख रुपये से अधिक के मसालों का उपयोग किया गया।
हलवाई अमर सिंह ने बताया कि एक मन आटे से बनी प्रसादी से करीब 500 लोगों का भोजन तैयार हो जाता है, इसी हिसाब से पूरे भंडारे की विशाल व्यवस्था की गई।
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