दिल्ली में कोटा की कला का दमदार आगाज़ | राष्ट्रीय समूह प्रदर्शनी का शुभारंभ | ‘शिवम’, ‘राधा-कृष्ण’ और ‘सांस्कृतिक नृत्य’ ने खींचा कला प्रेमियों का ध्यान

नई दिल्ली के होटल द ललित में आर्ट जंक्शन (Art Junction) द्वारा आयोजित राष्ट्रीय समूह कला प्रदर्शनी में कोटा के कलाकारों की कृतियों ने बिखेरा जलवा, समकालीन भारतीय कला का शानदार प्रदर्शन।

नई दिल्ली 

राष्ट्रीय राजधानी के प्रतिष्ठित होटल द ललित में समकालीन भारतीय दृश्यकला को समर्पित एक भव्य समूह कला प्रदर्शनी का शुभारंभ हुआ, जहाँ रंग, रेखा और रूपबंधों ने भारतीय संवेदनाओं को जीवंत रूप में सामने ला दिया। ‘आर्ट जंक्शन’ द्वारा आयोजित इस प्रदर्शनी में देश के विभिन्न हिस्सों से आए कलाकारों की सृजनात्मक उपस्थिति ने आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की।

इस प्रतिष्ठित प्रदर्शनी में डॉ. रमेश चन्द मीणा, डॉ. बसंत लाल बामनिया तथा राम खिलाड़ी मीणा की चयनित कृतियों ने कोटा की कलात्मक पहचान को राष्ट्रीय मंच पर मजबूती से स्थापित किया।

‘शिवम’ में तांत्रिक और लोक चेतना का संगम

डॉ. रमेश चन्द मीणा की मिश्रित माध्यम में निर्मित ‘शिवम’ शीर्षक चित्रकृति लोक कला और तांत्रिक परंपराओं का अद्भुत समन्वय प्रस्तुत करती है। ज्यामितीय संरचना, प्रतीकात्मक रूपबंध और संतुलित रंग योजना चित्र में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करती है। केंद्र में स्थित बिंब चेतना के आंतरिक प्रवाह और शिवत्व के दार्शनिक तत्वों का संकेत देता है, जबकि परिधि के अलंकरण लोक जीवन की संवेदनात्मक उपस्थिति को सजीव बनाते हैं।

‘राधा-कृष्ण’ में प्रेम और आध्यात्मिकता की समकालीन अभिव्यक्ति

डॉ. बसंत लाल बामनिया की ‘राधा-कृष्ण’ शीर्षक मिक्स मीडिया कृति भावनात्मक गहराई और प्रतीकात्मकता का प्रभावशाली उदाहरण है। रूपांतरणवादी शैली में निर्मित आकृतियाँ प्रेम, विरह और आध्यात्मिक एकत्व की अनुभूति कराती हैं। सूक्ष्म रेखांकन, गहन रंग पृष्ठभूमि और लयात्मक रूपबंध चित्र को रहस्यमयता और भाव-गहनता से परिपूर्ण बनाते हैं।

‘सांस्कृतिक नृत्य’ में लोकजीवन की धड़कन

राम खिलाड़ी मीणा की ‘सांस्कृतिक नृत्य’ शीर्षक कृति भारतीय आदिवासी लोक-संस्कृति की जीवंत अभिव्यक्ति है। कैनवास पर एक्रेलिक माध्यम से अंकित गतिशील स्त्री आकृतियाँ उत्सव, लय और सांस्कृतिक आत्मीयता का प्रभावी संप्रेषण करती हैं। लाल पृष्ठभूमि और पारंपरिक प्रतीकों का संयोजन लोक स्मृतियों को दृश्य रूप में सामने लाता है, जबकि रंगों और टेक्सचर का सशक्त प्रयोग चित्र में ऊर्जा और गति का संचार करता है।

समकालीन संवेदनाओं का जीवंत मंच

प्रदर्शनी में प्रदर्शित कलाकृतियाँ समकालीन जीवन, सामाजिक यथार्थ, सांस्कृतिक परंपराओं और बदलते परिवेश की विविध संवेदनाओं को अभिव्यक्त करती हैं। पारंपरिक और आधुनिक कला दृष्टियों के समन्वय ने इस आयोजन को विषयवस्तु और शैली की दृष्टि से समृद्ध बनाया है।

9 फरवरी से शुरू हुई यह प्रदर्शनी 9 मार्च 2026 तक प्रतिदिन प्रातः 11:00 बजे से सायं 6:00 बजे तक दर्शकों के लिए खुली रहेगी (रविवार अवकाश)। कला प्रेमियों, विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए यह आयोजन भारतीय समकालीन कला के विविध आयामों को करीब से समझने का दुर्लभ अवसर प्रदान कर रहा है।

नई हवा खबरें अपने मोबाइल पर नियमित और डायरेक्ट प्राप्त करने  के लिए व्हाट्सएप नंबर 9460426838 सेव करें और ‘Hi’ और अपना नाम, स्टेट और सिटी लिखकर मैसेज करें। आप अपनी खबर या रचना भी इस नंबर पर भेज सकते हैं।

CGHS क्लेम पर बड़ी राहत | मेडिकल रीइम्बर्समेंट लिमिट 5 लाख से बढ़कर अब हो गई इतने लाख

रेलवे कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत: अब प्रमोशन तय समय में | रेलवे बोर्ड ने जारी किया ‘मॉडल सिलेक्शन कैलेंडर’, इतने दिन में पूरी होगी प्रक्रिया

‘नई हवा’ की खबरों को Subscribe करने के लिए हमारे WhatsApp Channel से जुड़ें।