जयपुर
ACB ने राजकॉम्प (Rajcomp) के ग्रुप जनरल मैनेजर छत्रपाल सिंह के ठिकानों पर छापेमारी की है। ACB जयपुर, दिल्ली, गाजियाबाद सहित कई जगहों पर सर्च कर रही है। ACB ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में यह एक्शन लिया। शुरुआती जांच में अभी तक ACB को पोर्श, डिफेंडर, स्कॉर्पियो, थार सहित कई महंगी गाड़ियां मिली हैं। मामले में कई बड़े ब्यूरोक्रेट्स भी ACB के निशाने पर हैं। प्रारम्भिक सूचनाओं के अनुसार छत्रपाल सिंह बेतहाशा दौलत का मालिक निकाला है।
जिस DOIT विभाग के खिलाफ हाईकोर्ट ने ACB को जांच के निर्देश दिए थे, उसी विभाग की कंपनी राजकॉम्प के ग्रुप जनरल मैनेजर छत्रपाल सिंह के ठिकानों पर आज एसीबी ने यह रेड डाली है। इस अफसर के लिंक ब्यूरोक्रेसी के कई बड़े अफसरों से भी हैं। ACB के आधा दर्जन से अधिक अधिकारी जांच में लगे हुए हैं।
एसीबी डीजी डॉ. रवि प्रकाश मेहरड़ा के मुताबिक एसीबी को शिकायत प्राप्त हुई थी कि राजकॉम्प के ग्रुप जनरल मैनेजर छत्रपाल सिंह ने अपने पद का दुरुपयोग करके आय से अधिक धन अर्जित किया है। शिकायत प्राप्त होने के बाद एसीबी की ओर से शिकायत का सत्यापन करवाया गया। सत्यापन में शिकायत सही पाई गई। शिकायत के सत्यापन के बाद यह पाया गया कि छत्रपाल सिंह के पास 2.39 करोड़ रुपये (85.62 प्रतिशत) की संपत्ति उनकी वैध आय से अधिक है। इसके बाद एसीबी ने एफआईआर दर्ज कर जांच की जिम्मेदारी एडिशनल एसपी संदीप सारस्वत को सौंपी। उसके बाद न्यायालय से आदेश प्राप्त करके सर्च की कार्रवाई शुरू की गई है। कार्रवाई के लिए अधिकारियों के निर्देशन में विशेष टीमों का गठन किया गया है। अलग-अलग जगह पर अलग-अलग टीमें कार्रवाई कर रही है। शनिवार सुबह से जयपुर, दिल्ली और गाजियाबाद समेत अन्य ठिकानों पर सर्च की कार्रवाई की जा रही है। दिल्ली और गाजियाबाद स्थित घर पर डिफेंडर, पोर्श, थार जैसी लक्जरी गाड़ियां भी मिली है, जिसके संबंध में जांच की जा रही है। आरोपी के ठिकानों पर दस्तावेज भी खंगाले जा रहे हैं।
राजकॉम्प के ग्रुप जनरल मैनेजर छत्रपाल सिंह के आवास और अन्य ठिकानों पर एसीबी की ओर से सर्च की कार्रवाई जारी है। बैंक खातों के संबंध में भी जानकारी जुटाई जा रही है। जयपुर में अजमेर रोड पर स्थित रिधिराज अपार्टमेंट में स्थित छात्रपाल के फ्लैट में भी सर्च की कार्रवाई चल रही है। कार्रवाई पूरी होने के बाद पूरा खुलासा किया जाएगा।
प्रदेश में बीजेपी सरकार के सत्ता में आने से पहले भी सीपी सिंह के ठिकानों पर ED का एक्शन हुआ था, जिसमें इनके प्राइवेट लॉकर्स में बड़ी मात्रा में कैश बरामद हुआ था। गौरतलब है कि पिछली सरकार में मोबाइल फोन खरीद के टेंडरों से जुड़ा काम इन्हीं के पास था। डीओआईटी में पिछले कुछ सालों में टेंडरों के नाम पर भारी लूट की गई है। पिछले साल एसीबी ने एक परिवार को दर्ज कर डीओआईटी के तत्कालीन चेयरमैन आईएएस अखिल अरोड़ा के खिलाफ अनुसंधान की अनुमति के लिए सरकार को चिट्ठी लिखी थी लेकिन बड़े अफसरों के प्रभाव में यह चिट्ठी दबा दी गई। पिछले दिनों हाईकोर्ट ने एक पीआईएल पर सुनवाई करते हुए ACB के डीजीपी को तलब किया था। इसके बाद हाईकोर्ट ने यह टिप्प्णी की थी कि डीओआईटी राजस्थान का सबसे भ्रष्ट महकमा है और साथ ही ACB को निर्देश दिए थे कि डीओआईटी में पिछले 5 सालों में जो भी टेंडर हुए हैं, उनकी जांच की जाए।
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