अब हफ्ते में छह दिन चलेगा न्याय | जैसलमेर में फुल कोर्ट मीटिंग से निकला बड़ा फैसला, हाईकोर्ट के दरवाज़े अब दो शनिवार भी खुलेंगे

राजस्थान हाईकोर्ट (Rajasthan High Court) अब महीने में दो शनिवार खुला रहेगा। जैसलमेर में फुल कोर्ट मीटिंग में लंबित मामलों के निस्तारण को लेकर बड़ा फैसला लिया गया। सालभर में हाईकोर्ट को 24 अतिरिक्त कार्यदिवस मिलेंगे।

जैसलमेर 

न्यायिक इतिहास में एक अहम मोड़ पर राजस्थान हाईकोर्ट पहुंचता दिख रहा है। जैसलमेर (Jaisalmer) में हुई फुल कोर्ट मीटिंग के दौरान हाईकोर्ट को लेकर एक बड़ा और दूरगामी फैसला लिया गया है। अब राजस्थान हाईकोर्ट महीने में दो शनिवार भी खुला रहेगा, जिससे सालभर में कोर्ट को 24 अतिरिक्त कार्यदिवस मिलेंगे।

यह निर्णय वेस्ट ज़ोन रीजनल कॉन्फ्रेंस से ठीक पहले आयोजित फुल कोर्ट बैठक में लिया गया। बैठक में राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा मौजूद रहे। चर्चा के दौरान अदालतों में लगातार बढ़ते लंबित मामलों के बोझ को गंभीरता से रखा गया, जिसके बाद कार्यदिवस बढ़ाने पर सभी न्यायाधीशों की सर्वसम्मति बनी।

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फुल कोर्ट मीटिंग में सिर्फ समय बढ़ाने तक ही बात सीमित नहीं रही। न्यायिक सुधार, ई-कोर्ट, डिजिटल सिस्टम और आधुनिक न्यायिक प्रक्रियाओं को और मजबूत करने पर भी गहन मंथन हुआ। यह साफ तौर पर माना गया कि न्यायिक समय बढ़ाए बिना लंबित मामलों के तेजी से निस्तारण का लक्ष्य हासिल करना मुश्किल है।

हाईकोर्ट के इस फैसले को न्यायिक व्यवस्था के लिए अहम कदम माना जा रहा है। शनिवार को कोर्ट खुलने से केस डिस्पोजल की रफ्तार बढ़ेगी, और आम लोगों को समय पर न्याय मिलने की उम्मीद भी मजबूत होगी।

इसी बीच जैसलमेर में दो दिवसीय वेस्ट ज़ोन रीजनल कॉन्फ्रेंस भी जारी है। सम्मेलन का मुख्य विषय है —
“Advance Rule of Law Through Technology – Challenges and Opportunities”।
इस कॉन्फ्रेंस में न्याय व्यवस्था में तकनीक के बढ़ते उपयोग, डिजिटल कोर्ट सिस्टम, एआई आधारित फैसले और आधुनिक न्यायिक प्रक्रियाओं से जुड़ी चुनौतियों और अवसरों पर चर्चा प्रस्तावित है।

सम्मेलन की अध्यक्षता चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत कर रहे हैं। उनके साथ सुप्रीम कोर्ट के 20 न्यायाधीश भी मौजूद हैं। राजस्थान के अलावा गुजरात, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र हाईकोर्ट के न्यायाधीशों सहित 100 से अधिक जिला एवं सत्र न्यायाधीश इस मंथन का हिस्सा बने हैं।

रेत के शहर जैसलमेर में हो रही ये बैठकें सिर्फ सम्मेलन नहीं, बल्कि उस दिशा का संकेत हैं जहां तेज़, तकनीक-संपन्न और जवाबदेह न्याय व्यवस्था की नींव रखी जा रही है।

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