उदयपुर में कुलिश शोध संस्थान के उद्घाटन समारोह में गुलाब कोठारी ने कहा कि पत्रकारिता शब्दों से नहीं बल्कि नीयत से समझी जाती है। कार्यक्रम में कुलपति और कुलाधिपति ने भी विचार रखे।
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उदयपुर
समय के साथ बदलती सभ्यता, भाषा और जीवन मूल्यों पर एक गहरी सोच को जन्म देती है—और यही सोच गुरुवार को जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ विश्वविद्यालय के प्रतापनगर परिसर में आयोजित कार्यक्रम में सामने आई, जहां कर्पूरचन्द्र कुलिश शोध संस्थान का शुभारंभ किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत से पहले कुलपति सचिवालय में बनाए गए शोध संस्थान कक्ष का उद्घाटन कोठारी परिवार के सदस्यों द्वारा किया गया। इसके बाद आईटी सभागार में आयोजित मुख्य समारोह में शहर के प्रबुद्धजन और विश्वविद्यालय के पदाधिकारी मौजूद रहे।
इस अवसर पर पत्रिका समूह के प्रधान संपादक Gulab Kothari ने पत्रकारिता, समाज और संस्कृति की गहराई पर विचार रखते हुए कहा कि पत्रकारिता केवल खबरों का प्रकाशन नहीं, बल्कि हर परिणाम के पीछे छिपी नीयत को समझने की प्रक्रिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि शब्दों से ज्यादा जरूरी उसकी मंशा है, और पत्रकारिता को भी इसी दृष्टि से समझा जाना चाहिए।
कोठरी ने यह भी कहा कि बदलते समय में समाज, शिक्षा और संस्कृति की भूमिकाओं को नए नजरिए से देखने की आवश्यकता है। उनके अनुसार संस्कृति भले ही बाहरी रूप से बदलती दिखे, लेकिन उसकी मूल आत्मा हमेशा स्थायी रहती है, और उसे सुरक्षित रखने में समाज और परिवार की भूमिका अहम है।
कार्यक्रम में कुलपति कर्नल प्रो. एसएस सारंगदेवोत ने कर्पूरचन्द्र कुलिश के जीवन और पत्रकारिता यात्रा पर प्रकाश डालते हुए उनके संघर्ष, लेखन और पत्रकारिता में दिए गए योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि यह शोध संस्थान केवल एक औपचारिक शुरुआत नहीं, बल्कि विचारों और शोध की नई दिशा का प्रारंभ है।
समारोह की अध्यक्षता कर रहे Bhanwarlal Gurjar ने बताया कि इस संस्थान के माध्यम से कर्पूरचन्द्र कुलिश के जीवन, विचारों और पत्रकारिता सिद्धांतों पर अकादमिक शोध को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही यहां पत्रकारिता अध्ययन और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर व्याख्यानमालाएं और कार्यशालाएं भी आयोजित की जाएंगी।
पूरा कार्यक्रम विचार, संस्कृति और पत्रकारिता के मूल्यों पर केंद्रित रहा, जहां यह संदेश उभरकर सामने आया कि पत्रकारिता सिर्फ सूचना नहीं, बल्कि दृष्टि और जिम्मेदारी का नाम है।
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