राजस्थान (Rajasthan) में पहली बार वर्चुअल और ग्रुप नेट मीटरिंग लागू। अब बिना छत के भी सोलर (Solar) संभव, अपार्टमेंट, गांव, स्कूल-अस्पताल और उद्योगों को बड़ा फायदा।
जयपुर
अब सोलर बिजली सिर्फ सिर्फ उनके लिए नहीं जिनके पास बड़ी छत है। अब अपार्टमेंट में रहने वाले, गांव-ढाणी के उपभोक्ता, सरकारी-निजी दफ्तर, स्कूल-अस्पताल और यहां तक कि उद्योग—सब अब बिना अपनी छत के भी सौर ऊर्जा से जुड़ सकेंगे। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की पहल पर राजस्थान में वर्चुअल नेट मीटरिंग और ग्रुप नेट मीटरिंग की व्यवस्था जमीन पर उतर गई है।
मुख्यमंत्री के दिशा-निर्देशों के बाद राजस्थान डिस्कॉम्स ने इस व्यवस्था को लागू करने के लिए राजस्थान विद्युत नियामक आयोग में याचिका पेश की थी। हाल ही में आयोग द्वारा ग्रिड इंटरएक्टिव डिस्ट्रिब्यूटेड रिन्यूएबल एनर्जी सिस्टम्स तृतीय संशोधन विनियम-2025 अधिसूचित किए गए, जिसके बाद मंगलवार को डिस्कॉम्स ने इसकी क्रियान्विति के दिशा-निर्देश जारी कर दिए।
यह व्यवस्था प्रदेश में पहली बार लागू की गई है और इसका सबसे बड़ा फायदा उन उपभोक्ताओं को मिलेगा, जो अब तक सिर्फ इसलिए सोलर से दूर थे क्योंकि छत या पर्याप्त जगह उपलब्ध नहीं थी। अब सोलर प्लांट किसी दूसरी जगह लगाकर भी उसकी बिजली अपने मीटर में एडजस्ट कराई जा सकेगी।
डिस्कॉम्स ने नए विनियमों के तहत तकनीकी स्वीकृति की प्रक्रिया भी आसान कर दी है।
10 किलोवाट तक की घरेलू सोलर परियोजनाएं बिना किसी तकनीकी अध्ययन के स्वतः स्वीकृत मानी जाएंगी। इससे अधिक क्षमता वाली परियोजनाओं के लिए तकनीकी अध्ययन की समय-सीमा मौजूदा उपभोक्ताओं के लिए 15 दिन और नए कनेक्शन के लिए 30 दिन तय की गई है।
अब सोलर संयंत्र केवल रूफ-टॉप तक सीमित नहीं रहेंगे। इन्हें बालकनी, उपलब्ध भूमि, सार्वजनिक भूमि, जलाशयों सहित अन्य स्थानों पर भी लगाया जा सकेगा। घरेलू उपभोक्ताओं को व्हीलिंग चार्ज, बैंकिंग चार्ज और क्रॉस-सब्सिडी सरचार्ज से पूरी छूट दी गई है।
वर्चुअल नेट मीटरिंग क्या है?
इस व्यवस्था में एक स्थान पर लगे सोलर प्लांट से बनी बिजली को उसी डिस्कॉम क्षेत्र के कई उपभोक्ताओं के बिल में समायोजित किया जा सकता है। यानी अपार्टमेंट, कॉलोनी या संस्था कहीं और सोलर लगाकर उसका लाभ अपने-अपने मीटरों में ले सकती है।
ग्रुप नेट मीटरिंग कैसे काम करेगी?
यदि किसी उपभोक्ता के पास घर, दुकान, ऑफिस या अन्य संस्थान अलग-अलग जगह हैं, तो वह एक ही स्थान पर सोलर प्लांट लगाकर उससे बनी बिजली को अपने अन्य कनेक्शनों में उपयोग कर सकेगा। स्कूल, अस्पताल और चैरिटेबल संस्थानों के लिए यह व्यवस्था खास तौर पर फायदेमंद मानी जा रही है।
उपभोक्ताओं को क्या-क्या राहत मिलेगी?
घरेलू उपभोक्ताओं को सभी तरह के शुल्कों से पूरी छूट मिलेगी। अन्य श्रेणियों में भी कई चार्ज में राहत दी गई है। रेस्को मॉडल में अधिभार सामान्य ओपन एक्सेस दरों के 50 प्रतिशत पर सीमित रहेगा। बैटरी एनर्जी स्टोरेज से जुड़ी परियोजनाओं पर अतिरिक्त प्रोत्साहन मिलेगा—
- 5 प्रतिशत बैटरी क्षमता पर व्हीलिंग चार्ज में 75 प्रतिशत छूट
- 30 प्रतिशत से अधिक क्षमता पर 100 प्रतिशत छूट
इसके साथ ही पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत राज्य सरकार ने आवेदन शुल्क, सिक्योरिटी डिपॉजिट, मीटर परीक्षण शुल्क और एग्रीमेंट फीस में भी छूट दी है, ताकि ज्यादा से ज्यादा रूफ-टॉप सोलर लग सकें।
ग्रुप और वर्चुअल नेट मीटरिंग को मंजूरी मिलने से प्रदेश में सस्ती, सुलभ और स्वच्छ बिजली के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा। इससे न सिर्फ उपभोक्ताओं का बिजली खर्च घटेगा, बल्कि नेट-जीरो लक्ष्य की दिशा में राजस्थान की रफ्तार भी तेज होगी और कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी।
उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार पहले ही एकीकृत स्वच्छ ऊर्जा नीति-2024 जारी कर चुकी है, जिसमें नेट मीटरिंग और ग्रॉस मीटरिंग के साथ-साथ वर्चुअल और ग्रुप नेट मीटरिंग के प्रावधान शामिल किए गए थे।
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