धौलपुर
राजस्थान के धौलपुर जिले के बसेड़ी थाना क्षेत्र के गांव नगला दरवेशा में दुर्लभ जीव पैंगोलिन घुस आया। एक बार तो इस विचित्र जानवर को देखते ही ग्रामीण घबरा गए और उन्होंने तुरंत इसकी सूचना वन विभाग को दी। डेढ़ घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन कराने के बाद बसेडी वन विभाग की टीम ने पैंगोलिन को पकड़कर हिंगोटा नर्सरी में छोड़ दिया।
दुर्लभ जीव पैंगोलिन गांव के पूर्व सरपंच विनोद के घर में पाया गया। ग्रामीणों ने उस पर हमला न करने की समझदारी दिखते हुए इसकी सूचना तकाल वन विभाग की टीम को दी। गांव में पहुंची वन विभाग की टीम ने विचित्र जीव के पैंगोलिन होने की पुष्टि की। डेढ़ घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन कराने के बाद बसेडी वन विभाग की टीम ने पैंगोलिन को पकड़कर हिंगोटा नर्सरी में छोड़ दिया।
फॉरेस्टर गुलाब सिंह ने बताया कि विचित्र जानवर के गांव में पहली बार आने की सूचना पर उनकी टीम पहुंची। जिसके बाद टीम ने रेस्क्यू कर पैंगोलिन को हिंगोटा नर्सरी में भिजवा दिया जहां से डीएफओ के निर्देश पर उसे धौलपुर नर्सरी भिजवाया गया है। धौलपुर के डीएफओ केसी मीना ने बताया कि पैंगोलिन एक अति दुर्लभ प्राणी है। तस्करों के रडार पर रहने वाला पैंगोलिन नमी वाले इलाको में पाया जाता है। धौलपुर के जंगलों में कई बार पैंगोलिन को देखा गया है। गांव में पैंगोलिन के पहुंचने के बाद उसे रेस्क्यू कर धौलपुर नर्सरी में छोड़ा गया है। जहां उसकी देखभाल की जाएगी।
अति दुर्लभ है पैंगोलिन
डीएफओ के सी मीना ने बताया कि पैंगोलिन फोलिडोटा गण का एक स्तनधारी प्राणी है। इसके शरीर पर केराटिन के बने शल्कनुमा संरचना होती है। जिससे यह अन्य प्राणियों से अपनी रक्षा करता है। शर्मिला माने जाने वाला पैंगोलिन ऐसे शल्कों वाला अकेला ज्ञात स्तनधारी है। यह अफ़्रीका और एशिया में प्राकृतिक रूप से पाया जाता है।
इसे भारत में सल्लू साँप भी कहते हैं।अंधविश्वासी प्रथाओं के कारण इनका अक्सर शिकार किया जाता है। जिसकी वजह से पैंगोलिन की सभी जातिया अब संकटग्रस्त मानी जाती हैं और उन सब पर विलुप्ति का ख़तरा मंडरा रहा है। उन्होंने बताया कि धौलपुर में कई बार इस अति दुर्लभ जीव को देखा गया है। जानकारों के अनुसार तस्करों द्वारा तस्करी करने के बाद पैंगोलिन को बड़ी कीमत पर बेचा जाता है
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