NEET-PG 2026 की परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और कैंडिडेट-लेवल वेरिफिकेशन की मांग को लेकर DMA India ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है।
नई दिल्ली। NEET-PG 2026 के नतीजे आने के बाद परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। डेमोक्रेटिक मेडिकल एसोसिएशन (DMA India) ने हजारों डॉक्टरों की ओर से परीक्षा में कैंडिडेट-लेवल वेरिफिकेशन की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग करते हुए याचिका दायर की है।
यह याचिका संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत Union of India, नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) और नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के खिलाफ दाखिल की गई है। याचिका लीगल सेल फॉर डॉक्टर्स, एडवोकेट सत्यम सिंह राजपूत और एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड सुश्री नीमा के माध्यम से दाखिल की गई है।
मामले का विवरण Democratic Medical Association Vs Union of India & Others है। इसकी डायरी संख्या 61605/2026 है और याचिका 1 अक्टूबर 2026 को दाखिल की गई।
30 अगस्त को परीक्षा, 24 सितंबर को आया रिजल्ट
NEET-PG 2026 की परीक्षा 30 अगस्त को आयोजित हुई थी, जबकि इसका परिणाम 24 सितंबर को घोषित किया गया। अब परीक्षा में अभ्यर्थियों को अपने प्रदर्शन का विस्तृत सत्यापन उपलब्ध कराने की मांग को लेकर यह मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने है।
DMA का कहना है कि NEET-PG जैसी परीक्षा में कुछ अंकों का अंतर भी अभ्यर्थी की रैंक और आगे मिलने वाले पोस्टग्रेजुएट करियर विकल्पों पर असर डाल सकता है। ऐसे में केवल अंतिम स्कोर या रैंक बताना पर्याप्त नहीं है, बल्कि अभ्यर्थी के लिए यह जानने की व्यवस्था होनी चाहिए कि उसका स्कोर किस आधार पर बना।
DMA ने नहीं मांगा सामूहिक री-इवैल्यूएशन, फिर मांग क्या है?
DMA ने स्पष्ट किया है कि उसकी मांग सामूहिक पुनर्मूल्यांकन की नहीं है। संगठन प्रत्येक अभ्यर्थी के लिए ऐसी सुरक्षित सत्यापन व्यवस्था चाहता है, जिसमें वह अपने परीक्षा रिकॉर्ड से जुड़े महत्वपूर्ण विवरण देख सके।
DMA की मांगों में शामिल हैं—
- अभ्यर्थी के सामने वास्तविक परीक्षा में प्रस्तुत किए गए प्रश्न और विकल्प उपलब्ध कराए जाएं।
- अभ्यर्थी ने प्रत्येक प्रश्न के लिए क्या उत्तर दर्ज किया, इसकी जानकारी मिले।
- संबंधित प्रश्न की आधिकारिक आंसर की उपलब्ध कराई जाए।
- प्रत्येक प्रश्न के आधार पर कितने अंक दिए गए, यह स्पष्ट हो।
- अभ्यर्थी को अपने संपूर्ण परीक्षा रिकॉर्ड को सुरक्षित तरीके से प्राप्त करने की सुविधा मिले।
- आपत्ति दर्ज कराने के लिए स्पष्ट और निर्धारित समय-सीमा वाली objection window हो।
- यदि परीक्षा से जुड़ी कोई त्रुटि प्रमाणित होती है तो उसके अनुरूप अंक या रैंक में सुधार की व्यवस्था हो।
‘हर डॉक्टर को पता चले कि उसके अंक कैसे बने’
DMA India के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अमित व्यास ने कहा कि NEET-PG हजारों युवा डॉक्टरों के लिए केवल एक परीक्षा नहीं, बल्कि उनके करियर का निर्णायक पड़ाव है। उनके अनुसार कुछ अंकों का अंतर भी रैंक और आगे के पोस्टग्रेजुएट विकल्पों को प्रभावित कर सकता है, इसलिए परीक्षा प्रक्रिया केवल पारदर्शी होने की बात तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उसे वेरिफाई किया जा सकने वाला होना चाहिए।
डॉ. अमित व्यास ने कहा कि प्रत्येक अभ्यर्थी को यह देखने का अधिकार होना चाहिए कि उसके सामने कौन सा प्रश्न और विकल्प आया, उसने क्या उत्तर दिया, आधिकारिक उत्तर क्या था और उसके अंक किस आधार पर तय हुए। उनके मुताबिक ऐसी व्यवस्था से अभ्यर्थियों और परीक्षा प्रणाली, दोनों के बीच विश्वास मजबूत होगा।
वकील बोले- यह री-इवैल्यूएशन नहीं, सत्यापन का मामला
याचिका से जुड़े एडवोकेट सत्यम सिंह राजपूत ने कहा कि याचिका का उद्देश्य ऐसी सार्थक जानकारी उपलब्ध कराना है, जिससे प्रत्येक अभ्यर्थी अपने प्राप्त अंकों के आधार को स्वयं सत्यापित कर सके। उन्होंने इसे सामूहिक पुनर्मूल्यांकन की मांग से अलग बताया। उनका कहना है कि जब अंक और रैंक सीधे आगे होने वाली काउंसलिंग को प्रभावित करते हैं, तब अभ्यर्थियों के पास आपत्ति उठाने के लिए स्पष्ट और सत्यापन योग्य व्यवस्था भी होनी चाहिए। मामला अब सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष है और आगे की प्रक्रिया न्यायालय के निर्देशों के अनुसार आगे बढ़ेगी।
‘छात्रों को अतिरिक्त अंक नहीं, सिर्फ स्पष्टता चाहिए’
DMA के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. शुभ प्रताप सोलंकी ने कहा कि छात्र किसी तरह की सहानुभूति, अतिरिक्त अंक या विशेष सुविधा नहीं मांग रहे हैं। उनकी मांग केवल परीक्षा प्रक्रिया को स्पष्ट और सत्यापन योग्य बनाने की है। उन्होंने कहा कि यदि परीक्षा व्यवस्था सही है तो पारदर्शिता उसके प्रति विश्वास को और मजबूत करेगी। डॉ. सोलंकी ने NEET-PG अभ्यर्थियों से अपील की कि वे केवल सत्यापित जानकारी पर भरोसा करें और अपनी प्रवेश एवं काउंसलिंग की तैयारी जारी रखें। DMA ने इस पूरे मामले को परीक्षा एजेंसी के साथ टकराव के रूप में नहीं, बल्कि NEET-PG जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा के पीछे विश्वसनीय, पारदर्शी और सत्यापन योग्य व्यवस्था सुनिश्चित करने से जुड़ा मुद्दा बताया है। फिलहाल इस याचिका पर आगे की दिशा सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही और उसके निर्देशों से तय होगी।
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