भरतपुर के नरेंद्र ‘निर्मल’ को मिला प्रतिष्ठित ‘पंडित बाल गोविंद शर्मा ब्रजभाषा गजल पुरस्कार-2026’

भरतपुर के वरिष्ठ साहित्यकार नरेंद्र ‘निर्मल’ को डीग में आयोजित श्री हिंदी पुस्तकालय समिति के 100वें स्थापना दिवस समारोह में ‘पंडित बाल गोविंद शर्मा ब्रजभाषा गजल पुरस्कार-2026’ से सम्मानित किया गया।

डीग। ब्रजभाषा साहित्य के क्षेत्र में भरतपुर के लिए गौरव का क्षण उस समय आया, जब वरिष्ठ साहित्यकार नरेंद्र ‘निर्मल’ को प्रतिष्ठित ‘पंडित बाल गोविंद शर्मा ब्रजभाषा गजल पुरस्कार-2026’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें डीग स्थित श्री हिंदी पुस्तकालय समिति के 100वें स्थापना दिवस एवं पुरस्कार वितरण समारोह में ब्रजभाषा गजल लेखन में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रदान किया गया।

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पुस्तकालय के अरुण सभागार में आयोजित समारोह की अध्यक्षता सिद्धपीठ पीठाधीश्वर डॉ. कौशल किशोर ने की। मुख्य अतिथि अमृत लाल मीणा (आईएएस), पूर्व मुख्य सचिव, बिहार सरकार रहे, जबकि डीग जिला पुलिस अधीक्षक कांबले शरण गोपीनाथ (आईपीएस) तथा राजस्थान ब्रजभाषा अकादमी की सचिव डॉ. लता श्रीमाली विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहीं।

समारोह में देश के छह राज्यों से आए साहित्यकारों को विभिन्न साहित्यिक प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया। इसी कड़ी में भरतपुर के वरिष्ठ साहित्यकार नरेंद्र ‘निर्मल’ को ब्रजभाषा गजल विधा में उनके सृजनात्मक योगदान के लिए यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया गया।

सम्मान स्वरूप उन्हें पुष्पहार, शॉल, श्रीफल, पटका, गाय-बछड़ा की प्रतिमा तथा ₹5,100 की सम्मान राशि भेंट की गई।

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पहले भी मिल चुके हैं कई प्रतिष्ठित सम्मान

नरेंद्र ‘निर्मल’ इससे पहले भी श्रीनाथद्वारा साहित्य मंडल द्वारा ‘ब्रजभाषा गजलश्री सम्मान’ से सम्मानित हो चुके हैं। ब्रजभाषा और हिंदी साहित्य में उनका योगदान लगातार सराहा जाता रहा है।

साहित्यिक कृतियों से बनाई अलग पहचान

नरेंद्र ‘निर्मल’ की ब्रजभाषा में ‘श्री राधे’, ‘गिरिधारी’ तथा राजस्थान ब्रजभाषा साहित्य अकादमी द्वारा प्रकाशित ‘ब्रजभाषा साहित्यकार दर्पण’ उल्लेखनीय कृतियाँ हैं।

वहीं खड़ीबोली हिंदी में उनके गजल संग्रह ‘आगाज़’, राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर द्वारा प्रकाशित गीत संग्रह ‘धूप-छाँव’ तथा जवाहरलाल नेहरू बाल साहित्य अकादमी, जयपुर से प्रकाशित बाल गीत संग्रह ‘मिन्नी जाएगी स्कूल’ भी साहित्य जगत में विशेष पहचान बना चुके हैं।

इस सम्मान के साथ भरतपुर के साहित्यिक परिदृश्य को एक और राष्ट्रीय स्तर की उपलब्धि मिली है, जिसे साहित्य प्रेमियों ने गौरवपूर्ण क्षण बताया।

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