भरतपुर की पॉक्सो अदालत ने बयाना क्षेत्र में नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में आरोपी सागर को 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने 19 गवाहों और 24 दस्तावेजों के आधार पर फैसला सुनाया।
भरतपुर। भरतपुर की विशेष पॉक्सो अदालत ने नाबालिग से दुष्कर्म के एक गंभीर मामले में आरोपी सागर को दोषी ठहराते हुए 10 वर्ष के कठोर कारावास और आर्थिक दंड की सजा सुनाई है। अदालत ने माना कि आरोपी ने नाबालिग को हथियार के बल पर धमकाकर उसके साथ दुष्कर्म किया था। अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर न्यायालय ने यह फैसला सुनाया।
अभियोजन के अनुसार, मामला बयाना थाना क्षेत्र का है। पीड़िता के पिता ने 17 सितंबर 2025 को थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि उनकी 15 वर्ष 6 माह की नाबालिग बेटी रात को घर के अंदर सो रही थी। इसी दौरान रात करीब 1:30 से 2:00 बजे आरोपी सागर कथित रूप से घर में घुस आया।
आरोप है कि आरोपी ने नाबालिग को कट्टा दिखाकर जान से मारने की धमकी दी और उसके साथ जबरन दुष्कर्म किया। पीड़िता के रोने की आवाज सुनकर परिवार के लोग जाग गए और मौके पर ही आरोपी को पकड़ लिया। इसके बाद घटना की सूचना पुलिस को दी गई और मामला दर्ज कराया गया।
पुलिस अनुसंधान के बाद आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 64(1), 332(सी) तथा पॉक्सो एक्ट की धारा 3/4 के तहत आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया गया।
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 19 गवाहों के बयान दर्ज कराए और 24 दस्तावेज अदालत में प्रस्तुत किए। इन साक्ष्यों के आधार पर विशिष्ट न्यायाधीश (पॉक्सो) संख्या-2, भरतपुर सचिन गुप्ता ने आरोपी को दोषी करार दिया।
अदालत ने आरोपी सागर को धारा 332(सी) BNS के तहत 2 वर्ष के कारावास और ₹5,000 के अर्थदंड तथा धारा 64(1) BNS के तहत 10 वर्ष के कठोर कारावास और ₹50,000 के अर्थदंड से दंडित किया।
राज्य सरकार की ओर से विशिष्ट लोक अभियोजक (पॉक्सो) संख्या-2 भरतपुर चन्द्र किशोर भारद्वाज ने प्रभावी पैरवी की।
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