भरतपुर में बीडीए की लैंड पुलिंग योजना के खिलाफ किसानों ने विरोध प्रदर्शन कर कलेक्ट्रेट के बाहर धरना दिया और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। किसानों ने योजना को काला कानून बताते हुए निरस्त करने की मांग की।
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भरतपुर
भरतपुर विकास प्राधिकरण (BDA) की प्रस्तावित लैंड पूलिंग योजना (एलपीएस) के विरोध में मंगलवार को जिले में बड़ा किसान आंदोलन देखने को मिला। लैंड पुलिंग योजना विरोधी किसान मोर्चा के बैनर तले एक दर्जन से अधिक गांवों के किसान शहर के मुख्य बाजारों में उतर आए और सरकार विरोधी नारेबाजी करते हुए जोरदार प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारी किसान हाथों में बैनर और पोस्टर लेकर ‘एलपीएस काला कानून वापस लो’ और ‘किसानों की जमीन नहीं चलेगी’ जैसे नारे लगाते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे। यहां उन्होंने कलेक्ट्रेट के बाहर धरना दिया और मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को विस्तृत ज्ञापन सौंपा। पूर्वनेता प्रतिपक्ष इंद्रजीत भारद्वाजने कहा कि एलपीएस योजना किसान और आम आदमी के विरोध की योजना है। जो भूमि किसान इस योजना में देगा उसका कोई भी मुआवजा किसान को नहीं मिलेगा। जो जमीन बीडीए किसानों को देगी उसका आंतरिक और बाह्य विकास शुल्क और कनर्वजन शुल्क किसान से लिया जाएगा। तबतक किसान को बदले में मिली जमीन का पट्टा नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा कि बीडीए तानाशाही से किसानों और भूखंड धारी लोगों की असहमति होने के बाद भी बहुफसली जमीन को बिना मुआवजा दिए जो ले रही है उससे किसान व भूखंडधारी लोगों को आर्थिक नुकसान होगा। खेती की जमीन से उसे दूर होना पडे़गा। उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि एलपीएस योजना को लागू नहीं किया जाए।
किसानों ने आरोप लगाया कि भरतपुर विकास प्राधिकरण उनकी उपजाऊ और बहुफसली कृषि भूमि को लैंड पुलिंग योजना के तहत अधिग्रहित कर रहा है। किसानों का कहना है कि योजना के तहत भूमि का बड़ा हिस्सा (लगभग 55 प्रतिशत) रोड, पार्क, सुविधा क्षेत्र और ईडब्ल्यूएस-एलआईजी जैसी योजनाओं के लिए लिया जा रहा है, जबकि किसानों को केवल 45 प्रतिशत विकसित भूमि दी जा रही है, जिस पर भी भारी शुल्क व विकास लागत वसूली जा रही है।
प्रदर्शनकारी किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि स्कीम नंबर-13, एसपीजेड कॉलोनी, चंबल लिफ्ट परियोजना सहित कई योजनाओं में पहले ही उनकी जमीन अधिग्रहित हो चुकी है। अब बची हुई जमीन को भी एलपीएस योजना के तहत शामिल किया जा रहा है, जिससे किसानों की आजीविका पर गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।
जिला व्यापार महासंघ के अध्यक्ष संजीव गुप्ता ने किसानों की मांगों को जायज बताते हुए महासंघ का समर्थन दिया। किसान सभा के अध्यक्ष कामरेड नत्थीलाल ने चेतावनी देते हुए कहा कि किसानों के हक के लिए बीडीए को एलपीएस योजना को हटा देना चाहिए। किसान नेता इंदल सिंह जाट ने किसानों के आंदोलन को समर्थन देते हुए कहा कि जब जब किसान हमको आवाज देंगे हम किसानों के साथ खड़े होकर उनकी आवाज को बुलंद करेंगे। किसान नेता यदुनाथ दारापुरिया, हवलदार रम्मो सिंह, कामरेड गांधी देव, श्रीराम चंदेला आदि ने अपने संबोधन में कहा कि एलपीएस योजना किसानों के लिए काला कानून है। प्रशासनको इसे वापस लेना चाहिए।
किसानों का कहना है कि इससे वे बेरोजगार हो जाएंगे और छोटे भूखण्डधारियों एवं किसानों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा। किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि योजना के तहत उन्हें विकसित भूखण्ड के नाम पर अतिरिक्त शुल्क, लीज राशि और विकास शुल्क चुकाना पड़ेगा।
ज्ञापन में किसानों ने मांग की कि लैंड पुलिंग योजना को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए और पहले से लागू योजनाओं में प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा व राहत प्रदान की जाए। साथ ही स्कीम नंबर-13 सहित अन्य योजनाओं में कथित अनियमितताओं की उच्चस्तरीय जांच की भी मांग की गई।
धरना स्थल पर किसानों ने साफ चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
ये भी रहे मौजूद
इस मौके पर पूर्व सरपंच रामवीर सिंह बबुआ, सोहन सिंह, विनीत भारद्वाज खड़ैरा, भगवान सिंह सरपंच रामनगर, भगवान सिंह सह का नगला, सोहनलाल नगला झीलरा, जगराम धाकड़, अशोक करौला, मानसिंह सागर, शंकर सिहं रामपुरा, सुंदर सिहं म़ड़ौली, राहुल बघेल, वीरपाल सिंह, गिर्राज सिंह, पंडित हजारीलाल शर्मा, गोपाल सिंह, रन्ना सिंह, महीपाल, अमर सिंह, जहान सिंह, चोब सिंह, रघवीर सिंह, रामशरण, रामकिशन सह का नगला, सहाब सिंह आदि ने बाजारमें बीडीए के खिलाफ नारे लगाए। अंत में किसान मोर्चा के अध्यक्ष दौलत सिंह ने सभी मौजूद किसानों का आभार जताया। महावीर सिंह झीलरा ने व्यापारियों और विभिन्न संगठनों द्वारा किए गए स्वागत और जलपान की व्यवस्था के लिए उनका धन्यवाद ज्ञापित किया।
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