कविता
सीए. विनय गर्ग
जिंदगी ऐसे ही गुजर जाएगी,
गिले शिकवे करते करते,
बचे हैं लम्हे जो भी जिंदगी के,
आओ क्यूँ न गुजारें उन्हें हँसते हँसते।।
कभी मैं खफा हो जाऊं तो तुम मना लिया करना,
और जो तुम नाराज हो गए कभी,
तो हम मना लेंगे।।
जिंदगी चार दिन की बाकी है,
नहीं रखा है कुछ रूठने मनाने में,
आओ साथ चलते हैं जिंदगी के हँसी सफर पर,
कुछ नहीं रखा है इक दूजे को नीचा दिखाने में।।
गुरुर तो उन महलों का भी न रहा,
जो खड़े थे सीना ताने – मजबूत पत्थरों की नीवों पर।
फिर हमारी तो औकात क्या है,
हम तो खुद शीशे के घरों में रहते हैं।।
क्यूँ पाले हो मन में ये अहम ये अहंकार इतना,
अहम तो अच्छे-अच्छों का न रहा।
जब समय बदलता है दोस्तो,
उसे बेरहमी से टूटते हम सबने देखा है।।
छोड़ो ये गुरुर, ये अहम और ये अहंकार दोस्तो,
न हांसिल होगा इनसे जिंदगी में कुछ भी दोस्तो।
चलो, बन जाते हैं फिर से वही अलमस्त दोस्तो,
आओ, बन जाते हैं फिर से वही अलमस्त दोस्तो।।
ये भी पढ़ें
- भरतपुर के क्रिकेटरों के लिए मौका, अंडर-14 जिला टीम का ट्रायल 25 अक्टूबर को, उम्र से लेकर दस्तावेजों तक ये शर्तें जरूरी
- बिजली बिल में सेस, सड़कों पर अंधेरा, भरतपुर में आखिर किसकी जवाबदेही?
- 1 नवंबर को स्थापना दिवस, 22 दिसंबर को दीक्षांत समारोह; MPUAT में तैयारियों को लेकर मंथन
- पंच, ब्लॉक और किक की ट्रेनिंग… भरतपुर की छात्राओं ने सीखे मुश्किल वक्त में खुद को बचाने के तरीके
- छात्राओं को बताए कानूनी अधिकार, आत्मरक्षा के साथ जागरूकता पर जोर
- राजस्थान में सरकारी कर्मचारियों की सैलरी पर फिर जांच की आंच, अक्टूबर के वेतन बिल में करना होगा यह काम
- जो किसी के आगे हाथ नहीं फैलाना चाहते, उनके लिए खुला है भरतपुर का ‘नेकी दरबार’
- राजस्थान में सनसनीखेज वारदात: खेत में मिले चाचा और दो मासूम भतीजों के शव, एक का शव पेड़ से लटका मिला
- कौन है इस मासूम का परिवार? जयपुर में लावारिस मिली 8 माह की बच्ची की पहचान में जुटी पुलिस
- 20 करोड़ से ज्यादा का बजट, टेंडर भी जारी… फिर दो साल से गड्ढों में क्यों फंसा भरतपुर का गोलपुरा बाईपास?
प्रतिक्रिया देने के लिए ईमेल करें : ok@naihawa.com
SHARE THIS TOPIC WITH YOUR FREINDS
