जयपुर
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा 6 विधायकों को सलाहकार बनाए जाने पर बवाल खड़ा हो गया है। भाजपा ने इसे असंवैधानिक कदम बताते हुए राजयपाल से इन नियुक्तियों को रद्द करने की मांग की है और आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री गहलोत पार्टी की बगावत को रोकने के लिए असंवैधानिक कदम उठाकर रेवड़ियां बांट रहे हैं।
भाजपा के वरिष्ठ नेता और उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने मुख्यमंत्री सलाहकारों की नियुक्तियों और संसदीय सचिवों की सम्भावित नियुक्ति को लेकर सवाल खड़े करते हुए राज्यपाल कलराज मिश्र को पत्र लिखा है। राठौड़ ने राज्यपाल से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के 6 सलाहकारों की नियुक्ति को तुरंत प्रभाव से रद्द करने और संसदीय सचिवों की सम्भावित नियुक्तियां नहीं करने को लेकर राज्य सरकार को पाबंद करने की मांग की है।
राठौड़ ने प्रेस वार्ता में कहा कि सरकार पर संकट के समय मुख्यमंत्री ने पांच सितारा होटल में प्रलोभन दिया था, कसमें वादे पूरे करने के लिए अब 6 सलाहकारों की अवैधानिक नियुक्ति की है। साथ ही कुछ लोगों को संसदीय सचिव बनाने की कवायद भी तेज हो गई है। सलाहकारों की राजनीतिक नियुक्ति और संसदीय सचिवों की नियुक्ति संवैधानिक रूप से गलत है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट और अलग—अलग अदालतों के आदेशों का हवाला देते हुए कहा कि कई प्रदेशों ने संसदीय सचिव नियुक्त किए तब उन्हें अयोग्य घोषित किया गया था। मुख्यमंत्री गहलोत संभावित विद्रोह को दबाने के लिए रेवड़ी बांट रहे हैं।
एक राज्यमंत्री पर हर महीने होते हैं 20 लाख खर्च
राठौड़ ने कहा कि सरकार सफेद हाथी पालने जा रही है। एक राज्यमंत्री के वेतन—भत्ते, स्टाफ सहित अन्य खर्चे मिलाकर हर महीने 20 लाख रुपए खर्च होते हैं। पहले ही दो रिटायर्ड आईएएस सलाहकार बने हुए हैं। पूरे देश में ये पहले मुख्यमंत्री हैं, जिन्होंने इतने सलाहकार बनाए हैं। क्या मुख्यमंत्री इतने कमजोर हैं कि उन्हें 8 सलाहकारों की जरूरत है।
सलाहकारों को पत्रावली भेजी तो कानून की अवहेलना
राठौड़ ने कहा कि मुख्यमंत्री अगर सलाहकारों को पत्रावली भी भेजें तो कानून की अवहेलना है। राठौड़ ने पोस्ट ऑफ प्रॉफिट जैसे उदाहरण देते हुए कहा कि इन नियम के तहत सांसद या विधायक लाभ का कोई पद धारण नहीं कर सकते।
उन्होंने मंत्रिमंडल के पुनर्गठन को लेकर कांग्रेस पार्टी में उठे असंतोष पर कहा कि कांग्रेस पार्टी जूतों में दाल बांटने का काम करती है। ऐसे में उनके अपने जौहरीलाल मीणा, सफ़िया जुबेर, खिलाड़ी लाल बैरवा, रामकेश मीणा पार्टी और पार्टी नेताओं के खिलाफ ही ऐसे बयान दे रहे हैं।
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