राजस्थान के सरकारी कॉलेजों में बड़ा बदलाव: मुख्य सचिव के तीखे तेवर और 669 कॉलेजों के लिए नया फरमान | जानिए अब क्या बदलने वाला है?

राजस्थान के सरकारी कॉलेजों के लिए मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास का बड़ा फरमान; अब सभी 669 राजकीय महाविद्यालयों की होगी मासिक परफॉर्मेंस रैंकिंग। जानें बैठक की पूरी अंदरूनी खबर।

जयपुर: राजस्थान के शिक्षा जगत में इन दिनों कुछ बड़ा पक रहा है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के विजन को जमीन पर उतारने के मोर्चे पर उतरे मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने गुरुवार को महात्मा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ गवर्नेंस एंड सोशल साइंसेज में प्रदेशभर के सरकारी कॉलेजों के प्राचार्यों की क्लास ली। मीटिंग का अंदाज़ ऐसा था कि अच्छे-अच्छों के पसीने छूट जाएं। आइए जानते हैं इस हाई-प्रोफाइल बैठक की अंदर की वो बातें, जो अब सोशल मीडिया से लेकर गलियारों तक चर्चा का विषय बन चुकी हैं—

कॉलेजों की अब खैर नहीं, लागू होगा सख्त ‘ग्रेडिंग सिस्टम’

मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने उच्च शिक्षा विभाग को दो टूक निर्देश दे दिए हैं। प्रदेश के सभी 669 राजकीय महाविद्यालयों की अब हर महीने परफॉर्मेंस की कच्चा-चिट्ठा खुलेगा। यानी किस कॉलेज में पढ़ाई हो रही है और कौन सिर्फ खानापूर्ति कर रहा है, इसकी मासिक प्रदर्शन रैंकिंग (Performance Ranking) जारी होगी। जो कॉलेज फिसड्डी साबित होंगे, उनकी खैर नहीं होगी और बेहतरीन प्रदर्शन करने वालों को इनाम मिलेगा।

इन 10 नामी कॉलेजों के प्राचार्यों ने दिया हिसाब-किताब

बैठक में चुनिंदा कॉलेजों के प्रिंसिपल्स ने अपनी परफॉर्मेंस पेश की। इनमें प्रमुख रूप से शामिल रहे:

  • एसपीसीजी कॉलेज अजमेर
  • राजकीय महाविद्यालय कोटा
  • एसबीआरएम राजकीय महाविद्यालय नागौर
  • राजकीय डूंगर महाविद्यालय बीकानेर
  • राज ऋषि राजकीय महाविद्यालय अलवर
  • एमएसजे राजकीय महाविद्यालय भरतपुर
  • राजकीय महाविद्यालय सिरोही
  • महाराणा प्रताप पीजी राजकीय महाविद्यालय चित्तौड़गढ़
  • मीरा गर्ल्स कॉलेज उदयपुर
  • राजकीय लोहिया महाविद्यालय चुरू

इन सभी के प्राचार्यों ने अपने कॉलेज के शिक्षकों, कमरों, लैब्स और नवाचारों की पूरी कुंडली मुख्य सचिव के सामने रखी।

100 साल पुराने कॉलेजों का होगा इतिहास दर्ज, वेबसाइट्स को देनी होगी सही जानकारी

मुख्य सचिव ने एक और चौंकाने वाला आदेश दिया है। राजस्थान के कई सरकारी कॉलेज 100 साल से भी ज्यादा पुराने और गौरवशाली इतिहास वाले हैं। अब इनके इतिहास का दस्तावेजीकरण (Documentation) किया जाएगा और स्थापना दिवस धूमधाम से मनाए जाएंगे।

साथ ही, चेतावनी दी गई है कि सभी कॉलेज अपनी वेबसाइट्स को तुरंत अपडेट करें। शोध प्रकाशनों के लिंक से लेकर हर जरूरी जानकारी वेबसाइट पर होनी चाहिए, वरना लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।

अब नहीं चलेगा पुराना ढर्रा: बाजार की मांग वाले कोर्स और ‘माय भारत’ पोर्टल पर जोर

बैठक में साफ किया गया कि अब डिग्री थमाने से काम नहीं चलेगा। बाजार की मांग और अंतरराष्ट्रीय स्तर के हिसाब से पाठ्यक्रम (Curriculum) बदलने होंगे। कौशल विकास और रोजगारपरक शिक्षा पर फोकस रहेगा। इसके अलावा, ज्यादा से ज्यादा युवाओं को ‘माय भारत’ पोर्टल से जोड़ने का फरमान भी जारी किया गया है। इतना ही नहीं, कॉलेज स्तर पर ही रोजगार मेले लगाकर युवाओं को नौकरियां दिलाने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।

‘बी’ ग्रेड वाले कॉलेज अब ‘ए’ की रेस में, हॉस्टल और लाइब्रेरी भी होंगे हाई-टेक

जिन कॉलेजों की नैक (NAAC) रेटिंग अभी ‘बी’ ग्रेड है, उन्हें हर हाल में ‘ए’ ग्रेड तक पहुंचाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाने को कहा गया है। इसके अलावा, छात्रों के हॉस्टल अब भगवान भरोसे नहीं रहेंगे; उनके नियमित निरीक्षण और रखरखाव के आदेश दिए गए हैं। साथ ही, पुस्तकालयों (Libraries) के डिजिटलीकरण पर भी बड़ा जोर दिया गया है ताकि हर छात्र डिजिटल रूप से सशक्त हो सके।

बैठक में ये दिग्गज रहे मौजूद

इस हाई-वोल्टेज बैठक में उच्च शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव कुलदीप रांका और कॉलेज एजुकेशन कमिश्नर नथमल डिडेल के अलावा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए तमाम संबंधित अधिकारी और कॉलेजों के प्राचार्य जुड़े रहे।

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