पंच, ब्लॉक और किक की ट्रेनिंग… भरतपुर की छात्राओं ने सीखे मुश्किल वक्त में खुद को बचाने के तरीके

रामेश्वरी देवी कन्या महाविद्यालय भरतपुर में सात दिवसीय आत्मसुरक्षा शिविर का समापन हुआ। छात्राओं ने पंच, ब्लॉक, किक और सरकारी हेल्पलाइन की जानकारी प्राप्त की।

भरतपुर। मुश्किल परिस्थिति में घबराने के बजाय खुद को संभालना और अपनी सुरक्षा के लिए सही कदम उठाना भी एक जरूरी हुनर है। इसी हुनर को विकसित करने के उद्देश्य से रामेश्वरी देवी कन्या महाविद्यालय में आयोजित सात दिवसीय आत्मसुरक्षा प्रशिक्षण शिविर का समापन हुआ। शिविर में छात्राओं को आत्मरक्षा की व्यावहारिक तकनीकों के साथ आपात स्थिति, छेड़छाड़ और साइबर अपराध से निपटने के लिए उपलब्ध हेल्पलाइन सेवाओं की जानकारी भी दी गई।

महाविद्यालय के महिला अध्ययन प्रकोष्ठ के तत्वावधान में रानी लक्ष्मीबाई केंद्र के अंतर्गत आयोजित समापन समारोह की अध्यक्षता प्राचार्या डॉ. मधु शर्मा ने की। उन्होंने कहा कि महाविद्यालय में महिला सशक्तिकरण और सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए लगातार जागरूकता कार्यक्रम और आत्मसुरक्षा शिविर आयोजित किए जाते हैं। छात्राओं को कठिन परिस्थितियों में घबराने के बजाय उनका दृढ़ता से सामना करना सीखना चाहिए।

डॉ. मधु शर्मा ने छात्राओं से ऐसे प्रशिक्षण शिविरों में बढ़-चढ़कर भाग लेने का आह्वान करते हुए कहा कि अपनी ऊर्जा, इच्छाशक्ति और हौसले को ताकत बनाकर वे मुश्किल परिस्थितियों का सामना कर सकती हैं। आत्मरक्षा की तकनीकें सीखना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

पंच, ब्लॉक और किक का अभ्यास, हेल्पलाइन की भी जानकारी

कार्यक्रम का संचालन करते हुए महिला अध्ययन प्रकोष्ठ प्रभारी डॉ. निशा गोयल ने बताया कि आयुक्तालय के आदेशानुसार महाविद्यालय में स्वस्थ और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से इस तरह के प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण का लक्ष्य छात्राओं को आत्मनिर्भर और साहसी बनाना है। भविष्य में भी ऐसे शिविर आयोजित किए जाते रहेंगे। आत्मसुरक्षा के लिए आत्मविश्वास के साथ शारीरिक और मानसिक रूप से सशक्त होना जरूरी है।

शिविर की प्रशिक्षिका निर्मला जी ने छात्राओं को आत्मसुरक्षा का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि महिलाएं पूरी तरह सशक्त होंगी, तभी समाज में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर समानता के साथ आगे बढ़ सकेंगी। प्रशिक्षण सत्र में छात्राओं को पंच, ब्लॉक और किक जैसी आत्मरक्षा तकनीकों का अभ्यास कराया गया। साथ ही किसी आपात स्थिति, छेड़छाड़ या साइबर अपराध का सामना करने के लिए विभिन्न सरकारी हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी दी गई।

छात्राओं को 112 आपातकालीन पुलिस सहायता, 1090 महिला गरिमा हेल्पलाइन, 1098 चाइल्ड हेल्पलाइन और 1930 साइबर धोखाधड़ी हेल्पलाइन के बारे में बताया गया। इसके अतिरिक्त राजस्थान पुलिस की विशेष सुरक्षा सेवा ‘राजकॉप सिटिजन ऐप’ के उपयोग की जानकारी भी दी गई।

छात्राओं ने साझा किए प्रशिक्षण के अनुभव

प्रशिक्षण में भाग लेने वाली छात्राओं बुलबुल और साक्षी ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि मुश्किल परिस्थितियों में सूझबूझ से काम लेते हुए अपनी सुरक्षा के लिए कदम उठाना चाहिए। उन्होंने प्रशिक्षण को उपयोगी बताते हुए कहा कि आत्मरक्षा की इन तकनीकों और उनसे मिली सीख को केवल अपने तक सीमित नहीं रखेंगी, बल्कि परिवार और समाज तक पहुंचाने का प्रयास करेंगी। समापन समारोह में प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली छात्राओं को प्राचार्या डॉ. मधु शर्मा और समिति प्रभारी की ओर से प्रमाण पत्र एवं पुरस्कार प्रदान किए गए। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. सरोज ने किया।

ये रहे उपस्थित

कार्यक्रम में समिति सदस्य डॉ. लक्ष्मी गुप्ता, विनय खण्डेलवाल, सुश्री अंजू मीना और हरीश कुमार स्वर्णकार उपस्थित रहे। संकाय सदस्यों में डॉ. अलका गोयल, श्रीमती साधना शर्मा, दीवान सिंह, योगेन्द्र सिंह, सुश्री अंशुलता बंसल, सुश्री प्रीती मौर्य, सुश्री प्रिया शर्मा, सुश्री पुनीता खंडूरी, श्रीमती मुक्ता शर्मा, सुश्री निधि, सुश्री करिश्मा सिंह, डॉ. पूजा राठी, सुश्री अनुश्री, श्री विकाश कुमार और श्रीमती शिवानी सिंघल सहित छात्राएं मौजूद रहीं।

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