भरतपुर में सड़क चौड़ीकरण पर हाईकोर्ट की रोक, विकास प्राधिकरण संपत्ति पर नहीं चला सकेगा बुलडोजर

भरतपुर में सड़क चौड़ीकरण से जुड़े मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने अंजू गोयल की संपत्ति को याचिका लंबित रहने तक ध्वस्त नहीं करने का अंतरिम आदेश दिया।

भरतपुर। सड़क चौड़ीकरण की कार्रवाई के बीच अपनी संपत्ति को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट पहुंची भरतपुर की अंजू गोयल को अंतरिम राहत मिली है। हाईकोर्ट ने भरतपुर विकास प्राधिकरण को याचिका लंबित रहने तक याचिकाकर्ता की संपत्ति को ध्वस्त नहीं करने के निर्देश दिए हैं। यह आदेश 15 अक्टूबर 2026 को न्यायमूर्ति रवि चिरानिया ने पारित किया।

मामला भरतपुर विकास प्राधिकरण की ओर से 8 अक्टूबर 2026 को जारी नोटिस से जुड़ा है। नोटिस में अंजू गोयल को संपत्ति से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए तीन दिन का समय दिया गया था। प्राधिकरण सड़क को 120 फीट चौड़ा करना चाहता है।

तीन दिन में दस्तावेज देने के नोटिस को दी चुनौती

याचिकाकर्ता अंजू गोयल, पत्नी सुरेंद्र मोहन गोयल, ने हाईकोर्ट में सिविल रिट याचिका दायर कर प्राधिकरण के नोटिस को चुनौती दी। उनके अधिवक्ता मोहित खंडेलवाल ने अदालत में दलील दी कि सड़क की चौड़ाई पहले 60 फीट थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 100 फीट किया गया। अब इसे 120 फीट करने की कार्रवाई से उनके प्रतिष्ठान का कुछ हिस्सा ध्वस्त होने की आशंका है।

याचिका में यह भी कहा गया कि पर्याप्त समय और सुनवाई का अवसर दिए बिना दस्तावेज मांगे गए हैं। याचिकाकर्ता ने संपत्ति की सीमाओं के निर्धारण पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि दस्तावेजों का सत्यापन तथा उचित जांच किए बिना यह कार्रवाई की जा रही है।

पहले के अदालती आदेशों का भी दिया हवाला

याचिकाकर्ता की ओर से हाईकोर्ट के 7 जुलाई 2026 के उस आदेश का हवाला दिया गया, जो सरोज शर्मा बनाम राजस्थान राज्य एवं अन्य मामले में पारित हुआ था। इसके अलावा, एक अन्य रिट याचिका में दिए गए संरक्षण का भी उल्लेख किया गया। अदालत के आदेश में सर्वोच्च न्यायालय के In Re: Directions in the Matter of Demolition of Structures मामले में जारी निर्देशों का भी संदर्भ आया।

तीन सप्ताह में जवाब देने के लिए नोटिस

न्यायमूर्ति रवि चिरानिया ने मामले में प्रतिवादियों को साधारण डाक और रजिस्टर्ड पोस्ट के माध्यम से नोटिस जारी करने तथा तीन सप्ताह में जवाब देने के लिए कहा है। अंतरिम राहत के तहत हाईकोर्ट ने याचिका लंबित रहने के दौरान 8 अक्टूबर 2026 के नोटिस के संबंध में याचिकाकर्ता की संपत्ति को ध्वस्त करने से प्रतिवादियों को रोक दिया है।

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