राजस्थान में पंचायती राज चुनाव 2026 का ऐलान हो गया है। 41 जिला परिषद, 457 पंचायत समितियों और 14,403 ग्राम पंचायतों में चुनाव होंगे। जानिए तारीखें, वोटिंग पैटर्न और पूरा कार्यक्रम।
जयपुर। राजस्थान में आखिरकार गांवों की सरकार के चुनाव का इंतजार खत्म हो गया। पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव का आधिकारिक ऐलान हो गया है। राज्य निर्वाचन आयोग ने जयपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुनाव कार्यक्रम जारी कर दिया। राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने चुनाव की तारीखों का ऐलान किया। इसी के साथ ग्रामीण राजस्थान में आदर्श आचार संहिता तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है।
चुनाव कार्यक्रम सामने आते ही अब गांवों में राजनीतिक गतिविधियां तेज होने वाली हैं। पंचायतों से लेकर जिला परिषद तक सत्ता की तस्वीर बदलने के लिए राजनीतिक दलों के सामने बड़ा मैदान तैयार है। खास बात यह है कि आयोग को 15 नवंबर से पहले पूरी चुनावी प्रक्रिया पूरी करनी है।
4 चरणों में होगा पंचायत चुनाव
राज्य निर्वाचन आयोग पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव चार चरणों में कराएगा। चुनाव कार्यक्रम के मुताबिक पंचायत चुनाव की लोक सूचना 8 अक्टूबर को जारी होगी। इसके बाद नामांकन की प्रक्रिया शुरू होगी।
- 13 अक्टूबर — नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख
- सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक नामांकन दाखिल किए जा सकेंगे
- 14 अक्टूबर — नामांकन पत्रों की जांच
- 15 अक्टूबर — नाम वापस लेने की अंतिम तारीख
पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव के लिए अलग-अलग चरणों में अधिसूचनाएं जारी होंगी। पहले चरण की अधिसूचना 8 अक्टूबर, दूसरे चरण की 13 अक्टूबर, तीसरे चरण की 19 अक्टूबर और चौथे चरण की 21 अक्टूबर को जारी होगी।
इन तारीखों पर होगा मतदान
पहले चरण का मतदान 13 अक्टूबर, दूसरे चरण का 16 अक्टूबर और तीसरे चरण का 23 अक्टूबर को होगा। चुनाव प्रक्रिया के व्यापक कार्यक्रम के तहत चौथे चरण की प्रक्रिया भी निर्धारित समय सीमा में पूरी की जाएगी।
41 जिला परिषद और 457 पंचायत समितियों में चुनाव
इस बार पंचायत चुनाव का पैमाना काफी बड़ा है। प्रदेश में 41 जिला परिषद और 457 पंचायत समितियों के चुनाव होंगे। इसके साथ ही 14,403 ग्राम पंचायतों में सरपंच और वार्ड पंच चुने जाएंगे।
चुनाव के जरिए कुल:
- 41 जिला प्रमुख
- 1,403 जिला परिषद सदस्य
- 457 प्रधान
- 8,245 पंचायत समिति सदस्य
- 14,403 सरपंच
- 1,30,589 वार्ड पंच
चुने जाएंगे।
कहीं बैलेट पेपर तो कहीं EVM से होगा मुकाबला
पंचायती राज चुनाव में मतदान की व्यवस्था भी अलग-अलग रहेगी। सरपंच और वार्ड पंच का चुनाव बैलेट पेपर से होगा। वहीं पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्यों के चुनाव EVM से कराए जाएंगे।
सरपंच और वार्ड पंच के चुनाव बिना राजनीतिक दलों के आधिकारिक चुनाव चिह्न के होंगे, जबकि पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्य के चुनाव दलीय आधार यानी पार्टी सिंबल पर होंगे।
महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण
पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण लागू रहेगा। ग्रामीण नेतृत्व में महिलाओं की हिस्सेदारी के लिहाज से यह चुनाव बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आरक्षण के आंकड़ों के मुताबिक सरपंच पदों में एसटी के लिए 3,058, एससी के लिए 2,493 और ओबीसी के लिए 1,961 पद आरक्षित किए गए हैं। वहीं बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ और सलूंबर जिलों में एसटी के सभी 1,253 सरपंच पद आरक्षित रहेंगे।
वार्ड पंचों में 21,962 पद एससी, 19,117 पद एसटी और करीब 15,000 पद ओबीसी के लिए आरक्षित किए गए हैं।
4 करोड़ से ज्यादा मतदाता तय करेंगे गांवों की नई तस्वीर
इन चुनावों में प्रदेश के करीब 4.03 करोड़ पंजीकृत मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। इनमें 51.82 प्रतिशत पुरुष और 48.18 प्रतिशत महिला मतदाता हैं।
मतदाताओं की संख्या के लिहाज से जयपुर सबसे आगे है, जहां करीब 18.99 लाख वोटर हैं। वहीं जैसलमेर में सबसे कम 4.36 लाख मतदाता हैं।
इन चुनावों के जरिए ग्रामीण राजस्थान में 1.69 लाख से अधिक प्रतिनिधियों के चयन का रास्ता साफ होगा।
22 दिसंबर को इन चार जिलों में होगा बड़ा फैसला
जिला प्रमुख और प्रधान के चुनाव का भी कार्यक्रम सामने आ गया है। कोटा, श्रीगंगानगर, बारां और करौली में जिला प्रमुख और प्रधान के चुनाव 22 दिसंबर को होंगे।
इन पदों पर होने वाले चुनाव इसलिए भी अहम होंगे क्योंकि जिला परिषद और पंचायत समितियों में बहुमत का असर सीधे जिला प्रमुख और प्रधान के चुनाव पर पड़ेगा।
आचार संहिता लगते ही बदल गया सरकारी कामकाज का माहौल
चुनाव कार्यक्रम घोषित होते ही ग्रामीण क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। इसके साथ सरकारी तबादलों और नई नीतिगत घोषणाओं पर रोक लग गई है। इसके अलावा मंत्रियों के सरकारी वाहनों और सरकारी गेस्ट हाउस तथा डाक बंगलों के इस्तेमाल पर भी पाबंदी रहेगी।
अब अगले कुछ सप्ताह राजस्थान के गांवों में चुनावी हलचल के नाम रहेंगे। हाल ही में हुए नगरीय निकाय चुनावों के बाद पंचायत चुनाव भाजपा और कांग्रेस समेत दूसरे दलों के लिए ग्रामीण इलाकों में अपनी ताकत परखने का अगला बड़ा मैदान बन गए हैं।
भाजपा और कांग्रेस के साथ CPI-M, RLP, BAP, BSP, RLD और AAP भी पंचायत चुनाव में अपनी मौजूदगी और प्रभाव दिखाने की तैयारी में हैं। जिला प्रमुख और प्रधान के पदों तक पहुंचने के लिए राजनीतिक दलों के बीच मुकाबला अब गांव-गांव दिखाई देने वाला है।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि चार चरणों में होने वाली इस चुनावी जंग के बाद गांवों की सरकार की कमान किसके हाथ जाती है।
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