राजस्थान कांग्रेस ने पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी कर सात दिन में जवाब मांगा है। पार्टी ने अनुशासनहीनता समेत कई आरोप लगाए, विश्वेंद्र ने कहा- आत्मसम्मान से समझौता नहीं करूंगा।
जयपुर। राजस्थान कांग्रेस में निकाय चुनाव के बाद शुरू हुई खींचतान अब कारण बताओ नोटिस की चौखट तक पहुंच गई है। पूर्व मंत्री एवं डीग-कुम्हेर के पूर्व विधायक विश्वेंद्र सिंह को प्रदेश कांग्रेस की अनुशासन समिति ने नोटिस थमाकर सात दिन में जवाब मांगा है। पार्टी ने उनके खिलाफ पार्टी कार्यक्रमों से दूरी बनाने, जिला संगठन पर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाने और प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को लेकर की गई कथित बयानबाजी समेत कई मुद्दे गिनाए हैं।
मामला सिर्फ नोटिस तक सीमित नहीं है। कांग्रेस ने विश्वेंद्र सिंह से सीधे पूछा है कि पार्टी विरोधी गतिविधियों और अनुशासनहीनता के आरोपों के चलते उन्हें कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित क्यों नहीं किया जाए। यानी अब गेंद विश्वेंद्र सिंह के पाले में है और उनके जवाब के आधार पर आगे की कार्रवाई तय हो सकती है।
‘डू नॉट डिस्टर्ब’ ने भी बढ़ाई दूरी
अनुशासन समिति के चेयरमैन एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री उदयलाल आंजना की ओर से जारी नोटिस में भरतपुर और डीग जिला कांग्रेस कमेटियों की शिकायतों का हवाला दिया गया है। पार्टी का आरोप है कि विश्वेंद्र सिंह लंबे समय से कांग्रेस के कार्यक्रमों और महत्वपूर्ण बैठकों से दूरी बनाए हुए हैं। इतना ही नहीं, जिला अध्यक्षों की ओर से संपर्क किए जाने पर बातचीत करने के बजाय कथित तौर पर ‘डू नॉट डिस्टर्ब मी’ का संदेश भेजने की बात भी नोटिस में कही गई है। यानी संगठन और विश्वेंद्र सिंह के बीच दूरी अब सिर्फ बैठकों और कार्यक्रमों तक नहीं रही, बल्कि बातचीत के तरीके को लेकर भी पार्टी ने सवाल खड़े कर दिए हैं।
चार टिकट, चारों हारे… 10 वोट वाला मामला भी उठा
नोटिस में हालिया नगर निकाय चुनाव को लेकर भी विश्वेंद्र सिंह की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। कांग्रेस का कहना है कि प्रत्याशी चयन और चुनाव प्रचार में उन्होंने जिला कांग्रेस कमेटी या प्रत्याशियों का सहयोग नहीं किया। भरतपुर नगर निगम महापौर चुनाव को लेकर भी पार्टी ने गंभीर सवाल उठाया है। नोटिस में कहा गया है कि कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी ने विश्वेंद्र सिंह के आदेश पर नाम वापस लेने की बात कही, जिसके बाद भाजपा का महापौर निर्विरोध चुना गया।
दूसरी तरफ विश्वेंद्र सिंह अपने तर्क के साथ सामने आए हैं। उनका कहना है कि डीग में 40 वार्डों में कांग्रेस ने चार टिकट दिए और चारों प्रत्याशी चुनाव हार गए। उन्होंने यह भी कहा कि इनमें से एक प्रत्याशी को महज 10 वोट मिले। विश्वेंद्र सिंह का दावा है कि वह शुरुआत से ही भरतपुर और डीग के दोनों जिला अध्यक्षों की कार्यप्रणाली का विरोध करते रहे हैं, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई।
सोशल मीडिया पर सवाल उठाना भी पड़ा भारी
कांग्रेस ने डीग और भरतपुर के जिला अध्यक्षों को सोशल मीडिया के माध्यम से अक्षम बताए जाने पर भी आपत्ति जताई है। पार्टी का कहना है कि संगठन से संबंधित शिकायत या असहमति के लिए उचित संगठनात्मक मंच का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
नोटिस में जिला अध्यक्षों की नियुक्ति और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के संगठन सृजन अभियान को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल उठाने का भी जिक्र है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के खिलाफ कथित व्यक्तिगत एवं राजनीतिक टिप्पणियों को भी अनुशासन समिति ने गंभीर माना है। कांग्रेस ने इन गतिविधियों को पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला बताते हुए पार्टी हितों के खिलाफ बताया है और आरोप लगाया है कि इससे भाजपा के एजेंडे को आगे बढ़ाने में मदद मिलती है।
विश्वेंद्र सिंह का पलटवार- ‘आत्मसम्मान से समझौता नहीं करूंगा’
नोटिस के बाद विश्वेंद्र सिंह ने भी अपना पक्ष सामने रखा। उन्होंने कहा कि उन्होंने कांग्रेस से कोई इस्तीफा नहीं दिया है, बल्कि अपनी बात रखी है। उन्होंने दोनों जिला अध्यक्षों की कार्यप्रणाली पर फिर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रदेश नेतृत्व को भी उनके बारे में जानकारी है। विश्वेंद्र सिंह ने यह भी कहा कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने उनसे बातचीत की है और बातचीत में कुछ बातों को स्वीकार भी किया गया है। उनका कहना है कि वह लंबे समय से संगठन के स्तर पर अपनी आपत्तियां उठाते रहे हैं। उनका साफ कहना है कि वह अपने आत्मसम्मान से समझौता नहीं करेंगे और जहां उन्हें ठेस पहुंचेगी, वहां इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे।
अब सात दिन में सामने आएगा विश्वेंद्र सिंह का जवाब
कांग्रेस की अनुशासन समिति ने विश्वेंद्र सिंह को अपना पक्ष रखने के लिए सात दिन का समय दिया है। ऐसे में अब निगाहें उनके जवाब पर हैं। एक तरफ पार्टी ने नोटिस में अनुशासनहीनता से लेकर संगठन विरोधी गतिविधियों तक के आरोप गिनाए हैं, तो दूसरी तरफ विश्वेंद्र सिंह अपने पुराने सवालों और जिला संगठन की कार्यप्रणाली को लेकर पीछे हटने के संकेत नहीं दे रहे हैं।
राजस्थान कांग्रेस में निकाय चुनाव के बाद शुरू हुआ यह टकराव अब व्यक्तिगत बयानबाजी से निकलकर औपचारिक अनुशासनात्मक प्रक्रिया में पहुंच चुका है। आगे विश्वेंद्र सिंह का जवाब इस पूरे विवाद की दिशा तय करने वाला अहम पड़ाव होगा।
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