न पार्षद, न चुनाव लड़ा… फिर भी बन गए सभापति, धौलपुर में 6 नामांकन वापस और गिरीश गर्ग की सीधे एंट्री

धौलपुर नगर परिषद सभापति चुनाव में बड़ा उलटफेर हुआ। सात उम्मीदवारों में से छह ने नामांकन वापस लिया और बिना पार्षद का चुनाव लड़े गिरीश गर्ग निर्विरोध सभापति चुने गए।

धौलपुर। धौलपुर नगर परिषद की राजनीति में शुक्रवार को ऐसा सियासी मोड़ आया, जिसकी तस्वीर कुछ घंटे पहले तक साफ नहीं थी। सभापति पद के लिए मैदान में उतरे सात उम्मीदवारों में से छह ने आखिरी समय में अपने नामांकन वापस ले लिए और मुकाबला अचानक खत्म हो गया। मैदान में अकेले बचे उद्योगपति गिरीश गर्ग को निर्विरोध सभापति चुन लिया गया।

सबसे दिलचस्प बात यह है कि गिरीश गर्ग न तो नगर परिषद के पार्षद हैं और न ही उन्होंने इस बार वार्ड का चुनाव लड़ा था। यानी बिना पार्षद बने ही वे धौलपुर नगर परिषद के सभापति की कुर्सी तक पहुंच गए। उपलब्ध नियमों के अनुसार, ऐसे व्यक्ति को सभापति का पद संभालने के छह महीने के भीतर पार्षद का चुनाव लड़कर निर्वाचित होना होगा।

शुभेंदु से मिलीं ममता की उम्मीदवार, फिर अचानक छोड़ी नंदीग्राम की रेस, खिसियाई ममता ने कांग्रेस के हाथ थमाया समर्थन

सात मैदान में उतरे, छह ने एक-एक कर छोड़ा रास्ता

सभापति पद के लिए सत्यदेव कंसाना, सीमा शर्मा, निशांत सिंह, कमलजीत, शराफत खान, सुभाष शर्मा और गिरीश गर्ग के नामांकन मैदान में थे। नाम वापसी के अंतिम दिन सत्यदेव कंसाना, सीमा शर्मा, निशांत सिंह, कमलजीत, शराफत खान और सुभाष शर्मा ने अपने नामांकन वापस ले लिए।

इसके बाद सिर्फ गिरीश गर्ग का नामांकन बचा और उन्हें निर्विरोध सभापति घोषित कर दिया गया। नामांकन जांच के बाद भी यही सात उम्मीदवार मैदान में बचे थे और किसी राजनीतिक दल ने किसी प्रत्याशी को आधिकारिक चुनाव चिन्ह नहीं दिया था।

भाजपा के 11, कांग्रेस के 27… फिर भी तस्वीर यहां पहुंची

धौलपुर नगर परिषद का 60 सदस्यीय बोर्ड भी इस पूरे घटनाक्रम को दिलचस्प बनाता है। चुनाव परिणाम में कांग्रेस 27 पार्षदों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई, जबकि भाजपा के खाते में 11 सीटें आईं। सभापति के चुनाव के लिए 31 पार्षदों के समर्थन की जरूरत थी।

बहुमत से सिर्फ चार सीट दूर कांग्रेस ने अपने समर्थक पार्षदों और कुछ निर्दलीयों को एकजुट करने की कवायद शुरू कर दी थी। दूसरी ओर भाजपा ने भी अपने निर्वाचित पार्षदों को धौलपुर-भरतपुर-अछनेरा रोड स्थित एक होटल में ठहराया था।

लेकिन सबसे अहम बात यह रही कि किसी भी राजनीतिक दल ने सभापति पद के लिए अपने प्रत्याशी को आधिकारिक सिंबल नहीं दिया। ऐसे में चुनावी मुकाबला कागज पर निर्दलीय उम्मीदवारों के बीच रह गया।

पिछले चुनाव की हार से इस बार निर्विरोध कुर्सी तक

गिरीश गर्ग के लिए यह सिर्फ एक चुनावी जीत नहीं बल्कि लंबे समय से देखे जा रहे राजनीतिक सपने के पूरा होने जैसा भी है। पिछले नगर निकाय चुनाव में उनके परिवार की एक सदस्य को भाजपा ने सभापति पद के लिए मैदान में उतारा था, लेकिन पार्टी के ही पार्षदों की क्रॉस वोटिंग के चलते उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। इस बार बदले हुए नगरीय निकाय नियमों के तहत गिरीश गर्ग ने पार्षद का चुनाव लड़े बिना ही सभापति पद के लिए दावेदारी पेश की। आखिरकार मुकाबला मतदान तक पहुंचा ही नहीं और छह प्रत्याशियों के नामांकन वापस लेने के बाद वे निर्विरोध धौलपुर नगर परिषद के सभापति बन गए।

सीएम से लेकर भाजपा के बड़े नेताओं का जताया आभार

निर्विरोध निर्वाचन के बाद गिरीश गर्ग ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और भाजपा के बड़े नेताओं का आभार जताया। उनके निर्विरोध चुने जाने की खबर सामने आते ही समर्थकों में उत्साह का माहौल बन गया। उनके घर पर समर्थकों और शुभचिंतकों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। लोगों ने उनका स्वागत किया और बधाई दी। धौलपुर नगर परिषद सभापति पद का चुनाव कार्यक्रम पहले से तय था। नाम वापसी की अंतिम समय-सीमा 18 सितंबर दोपहर 3 बजे थी, जबकि मतदान आवश्यक होने पर 21 सितंबर को होना था। लेकिन नाम वापसी के बाद मतदान की नौबत ही नहीं आई।

धौलपुर की राजनीति में इस पूरे घटनाक्रम की खास बात यही रही कि जिस कुर्सी के लिए 31 पार्षदों के समर्थन का गणित जुटाया जा रहा था, वहां आखिर में छह नामांकन वापस हुए और बिना वार्ड का चुनाव लड़े गिरीश गर्ग सीधे सभापति की कुर्सी तक पहुंच गए।

नई हवा खबरें अपने मोबाइल पर नियमित और डायरेक्ट प्राप्त करने  के लिए व्हाट्सएप नंबर 9460426838 सेव करें और ‘Hi’ और अपना नाम, स्टेट और सिटी लिखकर मैसेज करें। आप अपनी खबर या रचना भी इस नंबर पर भेज सकते हैं।

गाड़ी का इंश्योरेंस खत्म है तो पेट्रोल पंप पर रुक सकता है सफर! | ‘नो इंश्योरेंस, नो फ्यूल’ की तैयारी, नंबर प्लेट स्कैन होते ही खुल जाएगा बीमा का पूरा रिकॉर्ड

जयपुर की बैंक लूट में भरतपुर की युवती का बड़ा कनेक्शन, बॉयफ्रेंड तक पहुंची बैंक की अंदरूनी जानकारी | 41.70 लाख की लूट में कमरे से मिले 26.80 लाख

₹15 हजार वाली सीमा अब पुरानी; PF के दायरे में आएंगे ज्यादा कर्मचारी, कैबिनेट के फैसले से बदलेगा EPFO का गणित | 51 लाख नए कर्मचारियों को कवरेज का अनुमान

UPI से ₹2,000 से ज्यादा का पेमेंट करेंगे तो क्या अब जेब कटेगी? नया नियम समझ लीजिए, ग्राहक पर नहीं पड़ेगा सीधा बोझ

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *