बाल विकास परियोजना कुम्हेर में मौजूदा आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के स्थान पर नए चयन की कथित मौखिक चर्चा से असमंजस बढ़ा है। नारी शक्ति संगठन ने लिखित आदेश की मांग की।
कुम्हेर (रामचरन धाकड़)। वर्षों से आंगनवाड़ी केंद्रों पर सेवाएं दे रहीं कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के सामने अब एक ऐसा सवाल खड़ा हो गया है, जिसका स्पष्ट जवाब उन्हें नहीं मिल रहा। चर्चा है कि मौजूदा कार्मिकों के स्थान पर नए चयन किए जा सकते हैं। यही बात अब कुम्हेर क्षेत्र की आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के बीच भय और असमंजस का कारण बन रही है।
बाल विकास परियोजना कुम्हेर में प्रशासनिक बदलाव को लेकर पहले से चल रहे विवाद के बीच सामने आए इस मुद्दे ने मामला और संवेदनशील कर दिया है। नारी शक्ति संगठन की अध्यक्ष लक्ष्मी यादव ने महिला एवं बाल विकास विभाग, डीग की उपनिदेशक की ओर से मौजूदा आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं के स्थान पर नवीन चयन किए जाने संबंधी कथित मौखिक निर्देशों पर चिंता जताई है।
डर इस बात का कि कहीं कल केंद्र पर कोई और न मिल जाए
लक्ष्मी यादव के मुताबिक, वर्षों से अपने-अपने आंगनवाड़ी केंद्रों पर काम कर रही महिलाओं के बीच अचानक नए चयन की बात सामने आने के बाद असुरक्षा की स्थिति पैदा हुई है। कार्मिकों को आशंका है कि कहीं उन्हें बिना स्पष्ट लिखित आदेश और पूर्व सूचना के काम से अलग कर उनके स्थान पर नए लोगों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू न कर दी जाए। यही वजह है कि संगठन अब मौखिक निर्देशों की जगह लिखित और स्पष्ट प्रशासनिक आदेश सामने रखने की मांग कर रहा है।
मौखिक आदेश से कैसे तय होगा कार्मिकों का भविष्य?
नारी शक्ति संगठन की अध्यक्ष लक्ष्मी यादव ने सवाल उठाया कि लंबे समय से सेवाएं दे रहीं आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के भविष्य से जुड़ा इतना महत्वपूर्ण फैसला आखिर मौखिक निर्देशों के आधार पर कैसे लिया जा सकता है। उनका कहना है कि यदि वास्तव में मौजूदा कार्मिकों को हटाकर नए चयन की कोई प्रक्रिया प्रस्तावित है तो उसका आधार, नियम, प्रक्रिया और सक्षम स्तर का आदेश स्पष्ट होना चाहिए। केवल मौखिक रूप से ऐसी बात सामने आने से कार्मिकों में भ्रम के साथ मानसिक तनाव भी बढ़ रहा है।
मामला सिर्फ नौकरी का नहीं, आंगनवाड़ी व्यवस्था का भी
लक्ष्मी यादव ने कहा कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं महिला एवं बाल विकास विभाग की जमीनी व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उनके भविष्य को लेकर अनिश्चितता का असर केवल संबंधित कार्मिकों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे आंगनवाड़ी केंद्रों के संचालन और विभागीय सेवाओं पर भी असर पड़ सकता है।
उन्होंने परियोजना स्टाफ में कार्यरत महिलाओं के हितों को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि लंबे समय से सेवाएं दे रहे कार्मिकों की आजीविका और भविष्य को प्रभावित करने वाला कोई भी निर्णय पारदर्शी प्रक्रिया, स्पष्ट नियम और उचित अवसर के आधार पर होना चाहिए।
फिलहाल संगठन की मांग—पहले लिखित आदेश, फिर आगे की प्रक्रिया
नारी शक्ति संगठन ने मांग की है कि जब तक सक्षम स्तर से स्पष्ट लिखित आदेश जारी नहीं होता, तब तक मौजूदा आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं को लेकर किसी नई चयन प्रक्रिया या मौखिक निर्देश के आधार पर कोई कार्रवाई नहीं की जाए।
लक्ष्मी यादव ने कहा कि संगठन पूरे मामले पर नजर रखेगा। यदि कार्यरत आंगनवाड़ी कार्मिकों के हित प्रभावित होते हैं तो उनकी आवाज प्रशासन और शासन स्तर तक उठाई जाएगी।
उन्होंने स्पष्ट चेतावनी भी दी कि यदि बिना स्पष्ट लिखित आदेश, पारदर्शी प्रक्रिया और उचित अवसर के मौजूदा कार्मिकों को हटाने अथवा उनके स्थान पर नए चयन की कार्रवाई की गई तो नारी शक्ति संगठन धरना-प्रदर्शन सहित लोकतांत्रिक आंदोलन करेगा।
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फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि नए चयन को लेकर चल रही चर्चा वास्तव में किसी औपचारिक प्रशासनिक निर्णय का हिस्सा है या फिर मौखिक निर्देशों तक सीमित है। इसका स्पष्ट जवाब सामने आने के बाद ही कुम्हेर की आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के भविष्य की तस्वीर साफ होगी।
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