राजस्थान सरकार ने राजस्थान सेवा नियम 1951 में 4 बड़े संशोधन किए हैं। जानें सरोगेसी मैटरनिटी लीव, एकल महिला CCL और ट्रेनिंग बॉन्ड के नए नियमों के बारे में।
जयपुर। राजस्थान की भजनलाल सरकार ने राज्य कर्मचारियों के प्रशासनिक और सेवा नियमों में एक ऐसा क्रांतिकारी फैसला लिया है, जिसका असर प्रदेश के लाखों कर्मचारियों और अधिकारियों पर सीधे तौर पर पड़ेगा। वित्त विभाग (नियम प्रभाग) द्वारा जारी ‘राजस्थान सेवा (संशोधन) नियम, 2026’ की अधिसूचना के तहत कई दशकों पुराने नियमों को बदलते हुए नए ऐतिहासिक प्रावधान जोड़े गए हैं।
जानिए इस नए आदेश के पीछे की पूरी कहानी और वे 4 बड़े फैसले जो हर सरकारी कर्मचारी को प्रभावित करेंगे:
मातृत्व अवकाश के नियमों में बड़ा उलटफेर: आखिर किसे मिलेगा 180 दिन की छुट्टी का लाभ?
राजस्थान सरकार ने सेवा नियमों में नियम 103D शामिल करके एक नए युग की शुरुआत की है। अब सरोगेसी (Surrogacy) के जरिए संतान सुख पाने वाली महिला कर्मचारियों को भी विशेष मातृत्व अवकाश (Maternity Leave) का अधिकार दे दिया गया है:
सरोगेट मदर (Surrogate Mother): किसी अन्य जोड़े के लिए बच्चे को जन्म देने वाली शादीशुदा महिला कर्मचारी (उम्र 25 से 35 वर्ष) को 180 दिन (6 महीने) की पूरी सवैतनिक छुट्टी दी जाएगी।
कमिशनिंग मदर (Commissioning Mother): सरोगेसी प्रक्रिया से बच्चा अपनाने वाली महिला कर्मचारी (उम्र 23 से 50 वर्ष) को 90 दिन का अवकाश मिलेगा।
खास बात: इस छुट्टी को कर्मचारी के नियमित लीव अकाउंट से नहीं काटा जाएगा और सर्विस बुक में इसका पृथक इंद्राज किया जाएगा।
एकल महिला कर्मचारियों के लिए खुला CCL का नया रास्ता: जानें क्या बदला?
नियम 103C में बड़ा संशोधन करते हुए सरकार ने एकल महिला कर्मचारियों की वर्षों पुरानी मांग को स्वीकार कर लिया है:
स्पेल की सीमा दोगुनी: जहां सामान्य महिला कर्मचारियों को साल में अधिकतम 3 बार (स्पेल) ही चाइल्ड केयर लीव मिलती है, वहीं अविवाहित, विधवा या तलाकशुदा (Single Female) कर्मचारियों के लिए इसे बढ़ाकर 6 स्पेल कर दिया गया है।
न्यूनतम अवधि: प्रत्येक स्पेल कम से कम 5 दिनों का होना अनिवार्य रहेगा।
ट्रेनिंग के बाद नौकरी छोड़ने वालों पर कसेगा शिकंजा: कितना लगेगा जुर्माना?
सरकारी खर्च पर ट्रेनिंग लेने के बाद अचानक इस्तीफा देने या दूसरी नौकरी पकड़ने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों पर नियम 22A के तहत कड़ी कार्रवाई का रास्ता साफ कर दिया गया है:
खर्च की वसूली: ट्रेनिंग पूरी होने के 1 से 2 साल के भीतर पद छोड़ने पर सरकार द्वारा ट्रेनिंग पर किए गए पूरे खर्च (वेतन और TA/DA को छोड़कर) की पाई-पाई वसूल की जाएगी।
सेवा बॉन्ड अनिवार्य: कर्मचारियों को ट्रेनिंग पर जाने से पहले अनिवार्य रूप से सुरक्षा बॉन्ड (Bond) निष्पादित करना होगा। हालांकि, केंद्र सरकार, PSU या बैंक आदि में उचित माध्यम से चयन होने पर नए बॉन्ड की शर्त के साथ इसमें छूट का प्रावधान रखा गया है।
नियम 22B का खात्मा: आखिर क्यों हटाना पड़ा यह पुराना प्रावधान?
नए संशोधनों को लागू करने के साथ ही राज्य सरकार ने राजस्थान सेवा नियमों में लंबे समय से चले आ रहे नियम 22B और उससे जुड़े सभी सरकारी निर्णयों को पूरी तरह से विलोपित (Delete) कर दिया है।
वित्त विभाग द्वारा जारी यह अधिसूचना तत्काल प्रभाव से पूरे राजस्थान में लागू कर दी गई है।
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