मां-बाप दुनिया छोड़ गए, बहन ने भी भाई के लौटने की आस छोड़ दी… 20 साल बाद अचानक सामने आ गया बबलू | सोशल मीडिया ने मिलाया भाई, अपना घर आश्रम में भावुक मिलन

20 साल पहले घर से लापता हुए बबलू को सोशल मीडिया की तस्वीर ने परिवार से मिला दिया। भरतपुर के अपना घर आश्रम में बहन आसमा खातून ने भाई को पहचान लिया।

राजेश खंडेलवाल
राजेश खंडेलवाल, वरिष्ठ पत्रकार

भरतपुर। बीस साल पहले घर से निकला एक युवक… फिर कोई खबर नहीं। परिवार ने तलाश की, इंतजार किया और आखिरकार मान लिया कि शायद अब वह इस दुनिया में नहीं रहा। लेकिन एक तस्वीर ने दो दशक पुरानी उम्मीद को फिर जिंदा कर दिया।

बुलंदशहर की रहने वाली आसमा खातून को सोशल मीडिया के जरिए अपने खोए हुए भाई बबलू की तस्वीर मिली। भांजे अनीश खान ने तस्वीर अपनी मां को दिखाई तो आसमा ने बिना देर किए भाई को पहचान लिया। इसके बाद परिवार ने भरतपुर स्थित अपना घर आश्रम से संपर्क किया और फिर शुरू हुआ 20 साल बाद बिछड़े भाई-बहन को मिलाने का सफर।

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15 साल की उम्र में घर से निकला था बबलू

बबलू जब करीब 15 साल का था, तब मानसिक अस्वस्थता के चलते बिना बताए घर से निकल गया था। परिवार ने उसे काफी तलाशा, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। समय बीतता गया और परिजनों ने मान लिया कि शायद बबलू अब इस दुनिया में नहीं है। उधर, बबलू की जिंदगी का सफर उसे भरतपुर तक ले आया।

सेवर से मिला, फिर अपना घर आश्रम में बदली जिंदगी

27 फरवरी 2025 को बबलू को सेवर इलाके से रेस्क्यू कर अपना घर आश्रम लाया गया। यहां नियमित उपचार, देखभाल और अपनापन मिलने के बाद उसकी हालत में सुधार होने लगा।

बबलू को अपने घर और इलाके से जुड़ी कुछ बातें याद थीं। उसने कुछ जानकारियां भी दीं, लेकिन पूरी जानकारी नहीं होने के कारण आश्रम के लिए उसके परिवार तक पहुंचना संभव नहीं हो पा रहा था। फिर सोशल मीडिया पर सामने आई उसकी तस्वीर ने वह काम कर दिया, जो वर्षों की तलाश नहीं कर पाई थी।

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तस्वीर देखते ही बहन ने पहचान लिया

बबलू के भांजे अनीश खान की नजर सोशल मीडिया पर आई तस्वीर पर पड़ी। उसने अपनी मां आसमा खातून को तस्वीर दिखाई। आसमा ने तुरंत पहचान लिया कि तस्वीर में वही उनका भाई बबलू है, जो 20 साल पहले उनसे बिछड़ गया था।

इसके बाद परिजनों ने अपना घर आश्रम से संपर्क किया और बुलंदशहर से भरतपुर पहुंचे।

सामने आए तो कुछ पल बस देखते रहे

अपना घर आश्रम में जब भाई-बहन आमने-सामने आए तो दोनों कुछ देर तक एक-दूसरे को देखते रहे। फिर बबलू ने अपनी बहन को पहचान लिया। दो दशक का फासला जैसे कुछ ही पलों में मिट गया।

आसमा ने बताया कि बबलू के पिता भी उसे लंबे समय तक तलाशते रहे। बाद में सड़क दुर्घटना में उनका निधन हो गया। कुछ समय बाद मां भी बीमारी के चलते चल बसीं।

यानी बबलू के लौटने का इंतजार करते-करते परिवार की दो पीढ़ियां उसे देखे बिना ही दुनिया से चली गईं।

‘हमने बबलू को खो दिया था…’

भावुक आसमा खातून ने कहा कि उन्हें लगा था कि उन्होंने बबलू को हमेशा के लिए खो दिया है। लेकिन अपना घर आश्रम ने उनके भाई को वापस परिवार तक पहुंचा दिया।

परिवार में बबलू के भाई रुस्तम, भांजे अनीश खान सहित अन्य लोग मौजूद रहे। जरूरी कागजी कार्रवाई पूरी होने के बाद परिजन बबलू को अपने साथ बुलंदशहर लेकर रवाना हो गए।

20 साल की तलाश का अंत किसी चमत्कार से नहीं, एक तस्वीर से हुआ। सोशल मीडिया पर दिखी एक तस्वीर ने उस परिवार को उसका वह सदस्य लौटा दिया, जिसे वे बरसों पहले खोया हुआ मान चुके थे।

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