नागौर में 100 करोड़ रुपये की कथित MD फैक्ट्री के मामले में पुलिस ने मकान मालिक और सीनियर बैंक मैनेजर राजीव कुमार भाटी को गिरफ्तार किया है। अब पूरे ड्रग नेटवर्क की जांच जारी है।
नागौर। नागौर में सामने आई कथित 100 करोड़ रुपये की एमडी फैक्ट्री की जांच अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गई है, जहां नशे के कारोबार की कड़ियां मकान मालिक तक जुड़ती दिखाई दे रही हैं। पुलिस ने जोधपुर रोड स्थित उस मकान के मालिक राजीव कुमार भाटी को गिरफ्तार किया है, जहां अवैध ड्रग फैक्ट्री चलाई जा रही थी। भाटी नागौर सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक में सीनियर मैनेजर के पद पर कार्यरत है।
पुलिस के मुताबिक, मुख्य आरोपी महावीर ने इसी मकान को कथित तौर पर ड्रग फैक्ट्री चलाने के लिए किराए पर लिया था। जांच में सामने आया कि मकान मालिक और महावीर के ससुर पहले से एक-दूसरे को जानते थे। इसी जान-पहचान के चलते मकान बिना किसी औपचारिक लिखा-पढ़ी के किराए पर दिया गया था। पुलिस का दावा है कि राजीव भाटी को मकान में चल रही एमडी फैक्ट्री की जानकारी थी। इसी आधार पर उसे मामले में गिरफ्तार किया गया है।
20 करोड़ की MD से शुरू हुई जांच, 100 करोड़ तक पहुंचा मामला
नागौर पुलिस के नशे के खिलाफ चल रहे अभियान के दौरान दीप रोड स्थित एक मकान में अवैध एमडी फैक्ट्री पकड़ी गई थी। यहां करीब 20 करोड़ रुपये की एमडी बरामद होने के साथ पुलिस ने मुख्य आरोपी महावीर को गिरफ्तार किया था। महावीर को कुछ महीने पहले नौसेना से भगोड़ा घोषित किया गया था। पुलिस ने उससे पूछताछ शुरू की तो जांच की दिशा एक और ठिकाने तक पहुंच गई।
इसके बाद जोधपुर रोड स्थित मकान में दबिश देकर पुलिस ने 5 किलो एमडी बरामद की, जिसकी कीमत करीब 100 करोड़ रुपये बताई गई है। इसी कार्रवाई के बाद मकान मालिक की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई।
जान-पहचान में दिया मकान, पुलिस के मुताबिक चल रही थी फैक्ट्री
नागौर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आसाराम चौधरी ने जांच की प्रगति की जानकारी देते हुए बताया कि महावीर ने जोधपुर रोड वाला मकान ड्रग फैक्ट्री चलाने के लिए लिया था। पुलिस के अनुसार मकान मालिक राजीव कुमार भाटी और महावीर के ससुर की आपस में पहचान थी। इसी वजह से मकान बिना औपचारिक किरायानामा किए दे दिया गया। पुलिस ने भाटी पर आरोप लगाया है कि उसे इस बात की जानकारी थी कि उसके मकान में एमडी तैयार की जा रही है। इसी आरोप के आधार पर अब उससे पूछताछ की जा रही है।
एक और गिरफ्तारी, छह तक पहुंची आरोपियों की संख्या
मामले में पुलिस ने कुचेरा थाना क्षेत्र के रूण गांव निवासी जितेंद्र को भी गिरफ्तार किया है। इसके साथ ही मुख्य आरोपी महावीर की थार गाड़ी भी जब्त की गई है। पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि महावीर ने कथित तौर पर ड्रग फैक्ट्री से जुड़े लोगों के बीच पहले से मुनाफे का हिस्सा तय कर रखा था। इससे पुलिस को शक है कि मामला सिर्फ एक ठिकाने तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके पीछे एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा था।
अब पुलिस की नजर पूरे नेटवर्क पर
इस मामले में अब तक मुख्य आरोपी महावीर समेत छह लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। लेकिन पुलिस की जांच यहीं रुकने वाली नहीं है।
पूछताछ के जरिए पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि एमडी बनाने, उसे आगे पहुंचाने और मुनाफे के बंटवारे से जुड़े और कौन-कौन लोग इस नेटवर्क का हिस्सा थे। पुलिस चेन सिस्टम की भी पड़ताल कर रही है, ताकि ड्रग फैक्ट्री से जुड़े पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ा जा सके।
यानी नागौर में पकड़ी गई कथित ड्रग फैक्ट्री की कार्रवाई अब सिर्फ बरामदगी और गिरफ्तारियों तक सीमित नहीं रह गई है। एक मकान मालिक की गिरफ्तारी ने जांच को एक नए सवाल तक पहुंचा दिया है—आखिर इस नशे के कारोबार की आखिरी कड़ी कहां तक जाती है?
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