जोधपुर में PCPNDT टीम ने डिकॉय ऑपरेशन कर पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन से अवैध भ्रूण लिंग परीक्षण करने के आरोपी को गिरफ्तार किया। 50 हजार रुपये और मोबाइल से जुड़ी मशीन बरामद।
जयपुर/जोधपुर। भ्रूण लिंग परीक्षण पर सख्ती के बावजूद राजस्थान में कानून को चकमा देने के लिए अब हाईटेक तरीके अपनाए जा रहे हैं। जोधपुर में ऐसा ही एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां मोबाइल फोन से जुड़ने वाली पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन के जरिए कथित तौर पर अवैध भ्रूण लिंग परीक्षण किया जा रहा था। राज्य पीसीपीएनडीटी टीम ने सुनियोजित डिकॉय ऑपरेशन चलाकर आरोपी को उसी समय दबोच लिया, जब वह एक गर्भवती महिला की सोनोग्राफी कर रहा था।
आरोपी की पहचान ओमाराम चौधरी के रूप में हुई है, जो बनाड रोड स्थित श्री सागर क्लीनिक का संचालन करता है। कार्रवाई के दौरान टीम ने आरोपी के कब्जे से पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड डिवाइस, उससे जुड़ा मोबाइल फोन और कथित रूप से लिंग परीक्षण के बदले लिए गए 50 हजार रुपये बरामद किए।
पहले पावटा बुलाया, फिर अपनी गाड़ी में क्लीनिक ले गया
राज्य पीसीपीएनडीटी टीम को लंबे समय से आरोपी की गतिविधियों पर संदेह था। सूचना पुख्ता होने के बाद परियोजना निदेशक सोनल मीणा और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अंजली अजीत जोरवाल के नेतृत्व में डिकॉय ऑपरेशन की योजना बनाई गई।
जांच के दौरान आरोपी ने डिकॉय गर्भवती महिला को पहले पावटा बुलाया। वहां से वह उसे अपनी स्कॉर्पियो में बैठाकर बनाड रोड स्थित क्लीनिक ले गया। क्लीनिक में उसने एक हैंडहेल्ड पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड प्रोब को मोबाइल फोन से जोड़कर सोनोग्राफी शुरू की। जैसे ही टीम को तय संकेत मिला, पुलिस ने मौके पर पहुंचकर आरोपी को हिरासत में ले लिया।
मोबाइल बना स्क्रीन, ऐप से चल रही थी मशीन
प्राथमिक जांच में सामने आया है कि आरोपी जिस डिवाइस का इस्तेमाल कर रहा था, वह एक हैंडहेल्ड पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड प्रोब था, जिसे तार के जरिए मोबाइल फोन से जोड़ा जाता था। मोबाइल में इंस्टॉल विशेष ऐप ही मशीन की स्क्रीन का काम करता था और उसी पर भ्रूण की तस्वीर दिखाई देती थी।
अधिकारियों के अनुसार इस तरह के पोर्टेबल डिवाइस का उपयोग विदेशों में अपेक्षाकृत अधिक होता है, लेकिन भारत में भ्रूण लिंग परीक्षण करना या करवाना PCPNDT Act के तहत पूरी तरह प्रतिबंधित और दंडनीय अपराध है। यही वजह है कि देश में प्रत्येक वैध सोनोग्राफी मशीन का पंजीकरण और जीपीएस आधारित निगरानी अनिवार्य की गई है।
लंबे समय से थी निगरानी
मिशन निदेशक डॉ. जोगाराम ने बताया कि आरोपी के नर्सिंग होम पर काफी समय से नजर रखी जा रही थी। पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद ही डिकॉय ऑपरेशन को अंजाम दिया गया। फिलहाल आरोपी से पूछताछ की जा रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि वह कब से इस तरीके से अवैध लिंग परीक्षण कर रहा था तथा इस नेटवर्क से और कौन-कौन लोग जुड़े हो सकते हैं।
इस कार्रवाई में स्वास्थ्य विभाग, पीसीपीएनडीटी टीम और पुलिस के अधिकारियों ने संयुक्त रूप से भाग लिया।
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