RGHS में बड़ा एक्शन; 69 फार्मा स्टोर ब्लैकलिस्ट, 14 के लाइसेंस रद्द | महंगी दवा बिलिंग और फर्जी दावों पर सरकार का सख्त प्रहार, ₹6500 का इंजेक्शन ₹18000 में बेचा

राजस्थान सरकार ने RGHS में बड़ी कार्रवाई करते हुए 69 फार्मा स्टोरों को पैनल से हटाया और 14 के लाइसेंस रद्द कर दिए। महंगी दवा बिलिंग, फर्जी दावों और अनियमितताओं पर सरकार ने सख्त रुख अपनाया।

जयपुर। राजस्थान सरकार ने राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) में गड़बड़ियों पर अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए दर्जनों फार्मा स्टोरों पर शिकंजा कस दिया है। वित्तीय अनियमितताओं, दवाओं की मनमानी बिलिंग और नियमों की अनदेखी के आरोपों के बाद 58 एलोपैथिक और 11 आयुर्वेदिक फार्मा स्टोरों को योजना के पैनल से बाहर कर दिया गया है। इनमें से 14 एलोपैथिक फार्मा स्टोरों के औषधि लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए गए हैं।

राज्य सरकार ने साफ कर दिया है कि आरजीएचएस में किसी भी तरह की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

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10 फार्मेसियों का सिस्टम बंद, महंगी दवा बिलिंग बनी कार्रवाई की वजह

जांच के दौरान ऐसे मामले सामने आए, जिनमें बाजार मूल्य से कई गुना अधिक कीमत पर दवाओं की बिलिंग की गई। इसके बाद 10 अनुमोदित फार्मेसी स्टोरों का टीएमएस (Transaction Management System) अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया।

जिन फार्मा स्टोरों पर खरीद और मूल्य निर्धारण में गड़बड़ी का संदेह है, उनसे खरीद बिल, जीएसटी चालान और अन्य दस्तावेज मांगे गए हैं। साथ ही जो फार्मेसियां लाभार्थियों को समय पर दवा उपलब्ध नहीं करा रही हैं, उन्हें भी नोटिस जारी किए गए हैं।

₹6,500 की दवा का ₹18,000 का दावा, जांच में खुली पोल

जांच के दौरान कई चौंकाने वाले उदाहरण सामने आए। Denosumab 60 mg Injection, जिसकी बाजार कीमत करीब 6,500 रुपये है, उसका दावा कुछ मामलों में 18,000 रुपये तक प्रस्तुत किया गया। ऐसे मामलों को गंभीर वित्तीय अनियमितता मानते हुए विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है।

सरकार अब पुराने दवा दावों का भी ऑडिट कराएगी और सिस्टम आधारित सत्यापन के जरिए फर्जी भुगतान की पहचान की जाएगी।

सामान्य बीमारी में लिखीं हजारों रुपये की दवाएं

प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने बताया कि जांच में ऐसे मामले भी सामने आए, जहां कब्ज और कमजोरी जैसी सामान्य शिकायतों में मरीजों को 10 हजार रुपये से अधिक कीमत की आयुष दवाएं लिख दी गईं। इससे सरकारी खजाने पर अनावश्यक वित्तीय भार पड़ा।

ऐसे मामलों में संबंधित चिकित्सकों और अनुमोदित फार्मेसियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है तथा किए गए भुगतान की वसूली भी की जाएगी।

सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार आरजीएचएस में पारदर्शिता, जवाबदेही और वित्तीय अनुशासन को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। पात्र लाभार्थियों को गुणवत्तापूर्ण दवाएं उचित मूल्य पर उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है और किसी भी प्रकार की अनियमितता पर कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।

अब मिलेगा ‘ग्रीन फ्लैग’, नियम तोड़ने वालों पर होगी वसूली

राजस्थान स्टेट हेल्थ एश्योरेंस एजेंसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हरजीलाल अटल ने बताया कि सभी पैनलबद्ध फार्मेसी स्टोरों को नए दिशा-निर्देशों का तत्काल पालन करने के आदेश दिए गए हैं। जो फार्मेसियां पूरी पारदर्शिता के साथ नियमों का पालन करेंगी और उत्कृष्ट कार्य करेंगी, उन्हें “ग्रीन फ्लैग” से सम्मानित किया जाएगा।

वहीं एजेंसी की अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी निधि पटेल ने बताया कि अब दवा दावों में सही पैक साइज, उत्पाद कोड और एमआरपी दर्ज करना अनिवार्य होगा। गलत पैकेजिंग, फर्जी मूल्य निर्धारण, कृत्रिम मूल्य वृद्धि या अप्रमाणित दावे मिलने पर अतिरिक्त भुगतान की वसूली के साथ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। जेनेरिक दवाओं को ब्रांडेड बताकर दावा पेश करने वालों पर भी सख्त कार्रवाई होगी।

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