अब खुद समझदार बनेगा आपका AC | जयपुर में शुरू हुआ ऐसा सिस्टम, जो बिना बंद किए घटाएगा बिजली का बिल

जयपुर डिस्कॉम ने फ्लॉक एनर्जी के साथ मिलकर एसी पर मुफ्त स्मार्ट IoT डिवाइस लगाने का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है। इससे बिजली की खपत 3 से 6 प्रतिशत तक कम होगी और ग्रिड पर दबाव भी घटेगा।

जयपुर। अगर आपके घर में एयर कंडीशनर चलता है तो आने वाले दिनों में वह सिर्फ कमरे को ठंडा ही नहीं करेगा, बल्कि बिजली की बचत भी खुद करेगा। जयपुर डिस्कॉम ने एक नई तकनीक के जरिए ऐसा पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है, जिसमें एसी पर मुफ्त स्मार्ट आईओटी डिवाइस लगाकर पीक ऑवर्स के दौरान बिजली की खपत अपने आप नियंत्रित की जाएगी।

इस पहल की शुरुआत प्रौद्योगिकी कंपनी फ्लॉक एनर्जी के सहयोग से की गई है। फिलहाल वैशाली नगर, मानसरोवर और मालवीय नगर में करीब 2,000 घरेलू बिजली उपभोक्ताओं के एयर कंडीशनरों पर यह स्मार्ट डिवाइस मुफ्त लगाई जा रही है। यदि प्रयोग सफल रहा तो भविष्य में इसे बड़े स्तर पर लागू किया जा सकता है।

डिस्कॉम के अनुसार यह देश की पहली ऐसी पहल है, जिसमें किसी बिजली वितरण निगम ने घरेलू उपभोक्ताओं के बिजली उपयोग को ऑटोमेटेड डिमांड रिस्पांस (ADR) तकनीक के जरिए नियंत्रित करने का फैसला किया है। इसका उद्देश्य गर्मी के दिनों में बिजली की सबसे ज्यादा मांग वाले समय में ग्रिड पर पड़ने वाले दबाव को कम करना और उपभोक्ताओं के बिजली बिल में बचत कराना है।

ऐसे काम करेगी स्मार्ट डिवाइस

यह डिवाइस दो हिस्सों में होती है। पहला हिस्सा घर के बिजली सॉकेट में लगाया जाता है, जबकि दूसरा हिस्सा एयर कंडीशनर पर लगाया जाता है। दोनों यूनिट घर के वाई-फाई नेटवर्क के जरिए ग्रिड प्रबंधन प्रणाली से जुड़ी रहती हैं।

जब बिजली की मांग अपने चरम पर पहुंचती है, तब यह सिस्टम कमरे के तापमान को लगभग समान बनाए रखते हुए एसी का तापमान स्वतः 1 डिग्री सेल्सियस बढ़ा देता है। इससे ठंडक पर खास असर नहीं पड़ता, लेकिन बिजली की खपत कम हो जाती है।

डिस्कॉम का दावा है कि यदि एसी रोजाना 6 से 8 घंटे चलता है तो इस तकनीक से बिजली की खपत में 3 से 6 प्रतिशत तक कमी लाई जा सकती है।

ग्रिड पर दबाव भी होगा कम

करीब 2,000 एसी को इस तकनीक से जोड़ने पर बिजली की मांग में लगभग 1 मेगावाट तक की कमी आने का अनुमान है। इससे केवल उपभोक्ताओं का बिजली बिल ही कम नहीं होगा, बल्कि ग्रिड पर ओवरलोड की स्थिति भी घटेगी। फॉल्ट और ट्रिपिंग की घटनाओं में कमी आने से उपभोक्ताओं को अधिक स्थिर वोल्टेज और बेहतर बिजली आपूर्ति मिलने की भी उम्मीद है।

डिस्कॉम ने यह पायलट प्रोजेक्ट राजस्थान विद्युत नियामक प्राधिकरण के डिमांड फ्लेक्सिबिलिटी एवं डिमांड साइड मैनेजमेंट विनियम-2026 के तहत शुरू किया है। यदि इसके परिणाम सकारात्मक रहे तो भविष्य में इस तकनीक का दायरा और बढ़ाया जा सकता है।

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