भरतपुर में लैण्ड पूलिंग योजना विरोधी किसान मोर्चा की बैठक में BDA प्रशासन के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया गया। किसानों ने आरोप लगाया कि आंदोलन को भू-माफियाओं का आंदोलन बताकर सरकार को गुमराह किया जा रहा है और मुख्यमंत्री से मुलाकात की मांग की।
भरतपुर
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भरतपुर में लैण्ड पूलिंग योजना (LPS) के विरोध की लड़ाई अब नए चरण में प्रवेश करती दिखाई दे रही है। बुधवार शाम लटूरिया वाले हनुमानजी मंदिर पर आयोजित लैण्ड पूलिंग योजना विरोधी किसान मोर्चा की बैठक में किसानों ने बीडीए प्रशासन के खिलाफ तीखे तेवर दिखाए। बैठक में सर्वसम्मति से निंदा प्रस्ताव पारित कर आरोप लगाया गया कि बीडीए अधिकारी किसानों के आंदोलन को ‘भू-माफियाओं का आंदोलन’ बताकर राज्य सरकार तक गलत और भ्रामक सूचनाएं पहुंचा रहे हैं।
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बैठक में किसानों ने स्पष्ट किया कि उनका संघर्ष अपनी जमीन, आजीविका और भविष्य को बचाने के लिए है। साथ ही आंदोलन को और व्यापक बनाने की रणनीति भी तैयार की गई। निर्णय लिया गया कि एलपीएस से प्रभावित किसान स्थानीय भाजपा नेताओं से मुलाकात कर उन्हें योजना से होने वाले नुकसान और बीडीए की कथित तानाशाही कार्यप्रणाली से अवगत कराएंगे। साथ ही मुख्यमंत्री से किसानों की सीधी मुलाकात कराने का अनुरोध भी किया जाएगा।
बैठक में तुहिया गांव के पूर्व सरपंच सुरेश सिंह ने कहा कि एलपीएस का विरोध किसी एक गांव का नहीं, बल्कि शहर के आसपास बसे किसानों की सामूहिक चिंता है। उन्होंने किसानों से एकजुट रहने का आह्वान करते हुए कहा कि वे गांव-गांव जाकर जनजागरण अभियान चलाएंगे और किसानों को योजना के प्रभावों से अवगत कराएंगे।
किसान दीवान सिंह तुहिया ने आरोप लगाया कि बीडीए बिना किसी आर्थिक मुआवजे के किसानों की जमीन को एलपीएस में शामिल करने की दिशा में बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि यह योजना भविष्य में शहर के चारों ओर स्थित हर गांव तक पहुंच सकती है, इसलिए अभी से व्यापक विरोध जरूरी है।
जिरौली निवासी दयाचंद पचौरी ने कहा कि किसानों को एक-दूसरे का साथ देना होगा। उनके अनुसार एलपीएस किसानों को भूमिहीन बनाने की दिशा में बढ़ने वाली योजना है और इसका विरोध करने वाले किसानों को पूरा सहयोग मिलना चाहिए।
जघीना निवासी चन्द्रपाल ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि यह योजना सफल हो गई तो शहर के आसपास खेती करने वाले किसानों की जमीनें धीरे-धीरे प्रभावित होंगी। उन्होंने किसानों से समय रहते जागरूक होकर विरोध करने का आह्वान किया।
मडरपुर निवासी एलपीएस प्रभावित किसान नरेन्द्रपाल शर्मा ने इस योजना को किसानों के लिए ‘काला कानून’ बताते हुए कहा कि सभी प्रभावित किसानों को अपनी असहमति दर्ज करानी चाहिए और इसके खिलाफ मजबूती से खड़ा होना चाहिए।
पूर्व प्रतिपक्ष नेता इन्द्रजीत भारद्वाज ने राजस्थान लैण्ड पूलिंग स्कीम अधिनियम-2016 पर सवाल उठाते हुए कहा कि अन्य राज्यों जैसे पंजाब, हरियाणा और दिल्ली की तुलना में राजस्थान के किसानों को विकसित भूखंड कम मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई राज्यों में आवासीय भूखंड के साथ व्यावसायिक भूखंड और फसल नुकसान का मुआवजा भी दिया जाता है, जबकि राजस्थान के कानून में किसानों को आर्थिक मुआवजे का स्पष्ट प्रावधान नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि एलपीएस में सहमति के लिए आवश्यक प्रतिशत का स्पष्ट उल्लेख नहीं है, जिससे किसानों में भ्रम और असंतोष पैदा हो रहा है।
महावीर सिंह नगला झीलरा ने विभिन्न गांवों में जाकर किसानों को एलपीएस से होने वाली संभावित क्षति के बारे में जागरूक करने की जानकारी दी।
बैठक में महावीर झीलरा, भगवान सिंह सैह का नगला, मलाह के वीरपाल, पंडित हजारी लाल, सुन्दर मडौली और सोहनलाल नगला झीलरा सहित अनेक किसान मौजूद रहे।
बैठक के अंत में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि किसानों की समस्याओं और मांगों को सीधे मुख्यमंत्री के समक्ष रखने के लिए समय मांगा जाएगा। यदि किसानों को मुलाकात का अवसर नहीं मिलता है तो आंदोलन को और उग्र रूप देने पर विचार किया जाएगा। इसके लिए किसान स्थानीय भाजपा नेताओं के आवासों पर पहुंचकर मुख्यमंत्री से मुलाकात का समय दिलाने का अनुरोध करेंगे।
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