8 करोड़ के पोषाहार घोटाले में बड़ा धमाका | 8 साल बाद ACB का शिकंजा, महिला पर्यवेक्षक, AAO और संविदा-कर्मियों समेत 18 लोग गिरफ्तार | फर्जी बिलों से डकार गए बच्चों का निवाला

नागौर के चर्चित 8.75 करोड़ रुपए के पोषाहार घोटाले में एसीबी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग के 18 आरोपियों को गिरफ्तार किया। फर्जी बिलों और चालानों से सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने का आरोप।

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नागौर 

आंगनबाड़ी के बच्चों के पोषाहार में करोड़ों का खेल करने वालों पर आखिरकार एसीबी का शिकंजा कस गया। वर्ष 2018 में सामने आए चर्चित पोषाहार घोटाले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने मंगलवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग से जुड़े 18 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। इनमें कनिष्ठ लिपिक (LDC), महिला पर्यवेक्षक, एएओ और संविदा कर्मी शामिल हैं।

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यह मामला सिर्फ फर्जी बिलों का नहीं, बल्कि बच्चों के हिस्से के पोषण पर डाका डालने के आरोपों से जुड़ा है। जांच में सामने आया कि फर्जी चालान और कागजी सप्लाई दिखाकर पोषाहार के नाम पर लाखों-करोड़ों रुपए का भुगतान उठाया गया और सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाया गया।

नागौर एसीबी की टीम ने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कल्पना सोलंकी के नेतृत्व में यह कार्रवाई की। गिरफ्तारियां परबतसर, डेगाना, कुचामन सिटी, मकराना और जायल क्षेत्र से की गईं। सभी आरोपियों को एसीबी कोर्ट में पेश किया गया है, जबकि इस पूरे घोटाले में एक और आरोपी नरेंद्र दायमा की गिरफ्तारी अभी बाकी बताई जा रही है।

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इस घोटाले की जड़ें 2018 तक जाती हैं, जब गोपनीय सूचना मिलने के बाद एसीबी ने लगातार चार दिन तक कार्रवाई की थी। उस समय करीब 50 लाख 75 हजार रुपए बरामद किए गए थे। शुरुआती जांच में ही मामला बड़ा नजर आने लगा था, लेकिन अब सामने आया है कि पूरा घोटाला 8 करोड़ 75 लाख रुपए से भी ज्यादा का है।

एसीबी की एडिशनल एसपी कल्पना सोलंकी ने बताया कि इस केस में पहले भी कुछ गिरफ्तारियां हो चुकी थीं, लेकिन लंबी जांच और दस्तावेजी पड़ताल के बाद अब 18 और लोगों को गिरफ्तार किया गया है। मामले में 29 हजार से अधिक पन्नों की विशाल चार्जशीट पेश की जा चुकी है, जिसने विभागीय भ्रष्टाचार की कई परतें खोल दी हैं।

सूत्रों के मुताबिक, पोषाहार सप्लाई के नाम पर फर्जी कागज तैयार किए गए, बिल पास हुए और भुगतान उठा लिया गया, जबकि जमीन पर कई जगह वास्तविक वितरण ही नहीं हुआ। अब एसीबी पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।

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