भोजशाला पर हाईकोर्ट की बड़ी मुहर | ASI रिपोर्ट को माना सही, कहा- ‘यह मंदिर स्वरूप वाला स्थल’ | मूर्तियां, श्लोक और हवनकुंड…वे सबूत जिनसे हुई हिंदू पक्ष की जीत

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (MP High Court) ने भोजशाला (Bhojshala) मामले में ASI की रिपोर्ट को सही मानते हुए परिसर को हिंदू मंदिर स्वरूप वाला स्थल माना। कोर्ट ने पूजा अधिकारों पर लगी रोक भी हटाई।

‘नई हवा’ की खबरों से जुड़ने के लिए हमारे WhatsApp Channel को follow करें ।

धार 

मध्य प्रदेश के सबसे चर्चित धार्मिक विवादों में शामिल भोजशाला मामले में हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने ऐसा फैसला सुनाया है, जिसने वर्षों पुरानी बहस को फिर राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अदालत ने ASI की 98 दिन तक चली वैज्ञानिक सर्वे रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए साफ कहा कि भोजशाला परिसर का स्वरूप हिंदू मंदिर जैसा प्रतीत होता है और यह स्थल राजा भोज कालीन संस्कृत शिक्षा एवं देवी वाग्देवी सरस्वती की आराधना से जुड़ा रहा है।

NEET फिर से, लेकिन बिना झंझट | अब 21 जून को होगी परीक्षा, फीस लौटेगी और पुराना एडमिट कार्ड बेकार

भोजशाला परिसर से मिले कमल, घंटियां, संस्कृत श्लोक, देवी-देवताओं की आकृतियां और हवनकुंड जैसे प्रमाणों को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अहम माना। अदालत ने इन्हीं आधारों पर परिसर को मंदिर स्वरूप वाला स्थल मानते हुए पुराने आदेश को रद्द कर दिया और पूजा अधिकारों पर लगी रोक हटाने का निर्णय सुनाया।

इस मामले की खास बात सिर्फ फैसला नहीं, बल्कि वह तरीका भी रहा जिससे अदालत ने पूरे विवाद को परखा। जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस अशोक अवस्थी की खंडपीठ ने खुद भोजशाला परिसर पहुंचकर निरीक्षण किया। कोर्ट ने साफ कहा कि निर्णय सिर्फ कागजी दस्तावेजों पर नहीं, बल्कि प्रत्यक्ष अवलोकन और ऐतिहासिक साक्ष्यों के आधार पर दिया गया है।

अदालत के सामने ASI की विस्तृत रिपोर्ट रखी गई थी, जिसमें परिसर की दीवारों, खंभों और संरचनाओं में मंदिर स्थापत्य से जुड़े कई चिन्ह मिलने का दावा किया गया। रिपोर्ट में कमल आकृतियां, घंटियां, केले के स्तंभ, श्रीफल युक्त कलश, देवी-देवताओं की नक्काशी, संस्कृत श्लोक और धार्मिक प्रतीकों का उल्लेख किया गया। सर्वे के दौरान जमीन के नीचे मंदिरनुमा ढांचे और एक हवनकुंड जैसे अवशेष मिलने की बात भी सामने आई।

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में माना कि ये सभी संकेत इस स्थल के हिंदू धार्मिक और शैक्षणिक परंपरा से जुड़े होने की ओर इशारा करते हैं। अदालत ने यह भी कहा कि भोजशाला में हिंदू पूजा की परंपरा कभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई।

फैसले का सबसे बड़ा असर 2003 के उस आदेश पर पड़ा, जिसमें हिंदू पक्ष के पूजा अधिकार सीमित कर दिए गए थे, जबकि मुस्लिम पक्ष को नमाज की अनुमति दी गई थी। हाईकोर्ट ने उस आदेश को रद्द करते हुए कहा कि धार्मिक अधिकारों के मामले में समानता का सिद्धांत लागू होना चाहिए।

कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को भी विकल्प दिया है। फैसले में कहा गया कि यदि कमाल मौला मस्जिद से जुड़े पक्षकार चाहें तो वे सरकार से वैकल्पिक जमीन की मांग कर सकते हैं, जिस पर सरकार विचार कर सकती है।

मामले में एक और दिलचस्प पहलू वाग्देवी सरस्वती की उस प्राचीन प्रतिमा को लेकर सामने आया, जिसे हिंदू पक्ष राजा भोज की आराध्या मानता है और जो फिलहाल लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम में बताई जाती है। अदालत ने कहा कि इस संबंध में याचिकाकर्ता सरकार को ज्ञापन दे सकते हैं और सरकार उचित स्तर पर इस पर विचार कर सकती है।

1904 से संरक्षित स्मारक घोषित भोजशाला लंबे समय से धार्मिक और ऐतिहासिक विवाद का केंद्र रही है। हिंदू पक्ष इसे मां वाग्देवी सरस्वती का मंदिर और संस्कृत शिक्षा का प्राचीन केंद्र बताता रहा है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद मानता आया है।

फैसले के बाद देशभर में भोजशाला को लेकर चर्चा तेज हो गई है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार आगे इस फैसले पर किस तरह कदम बढ़ाती है।

नई हवा खबरें अपने मोबाइल पर नियमित और डायरेक्ट प्राप्त करने  के लिए व्हाट्सएप नंबर 9460426838 सेव करें और ‘Hi’ और अपना नाम, स्टेट और सिटी लिखकर मैसेज करें। आप अपनी खबर या रचना भी इस नंबर पर भेज सकते हैं।

शुभेंदु अधिकारी के इस कदम से भड़क गया बांग्लादेश

NEET पर देशभर में हड़कंप | 22 लाख छात्रों की परीक्षा रद्द, पेपर लीक के तार करोड़ों के खेल से जुड़े, CBI जांच के आदेश

‘मां मर गई… रहम कर लो साहब’ | डेथ क्लेम पास करने के बदले 7.5 लाख मांगने वाला बाबू ACB के जाल में फंसा

आखिर खत्म हुआ इंतजार | RPSC ने जारी की SI भर्ती 2021 री-एग्जाम डेट, नए अभ्यर्थियों की एंट्री बंद

नई हवा’ की  खबरें  नियमित  और अपने मोबाइल पर डायरेक्ट प्राप्त करने  के लिए  व्हाट्सएप नंबर  9460426838 सेव करें और ‘Hi’ और अपना नाम, स्टेट और सिटी लिखकर मैसेज करें