NEET UG 2026 परीक्षा रद्द होने के बाद देशभर में हड़कंप मच गया है। पेपर लीक मामले में CBI जांच के आदेश, राजस्थान SOG की बड़ी कार्रवाई और करोड़ों के खेल के खुलासे ने मेडिकल एंट्रेंस सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
नई दिल्ली
देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET 2026 अब देश के सबसे बड़े एग्जाम स्कैंडल में बदलती दिखाई दे रही है। पेपर लीक के धमाके के बाद सरकार ने परीक्षा रद्द करने का बड़ा फैसला लिया है। अब नई परीक्षा तारीख बाद में घोषित की जाएगी। इस फैसले ने 22 लाख छात्रों और उनके परिवारों को गहरे तनाव में डाल दिया है। 3 मई को हुई परीक्षा अब दोबारा कराई जाएगी।
NTA ने मंगलवार को जारी बयान में साफ कहा कि पेपर लीक और परीक्षा से जुड़ी गंभीर अनियमितताओं के इनपुट मिलने के बाद यह फैसला लिया गया। एजेंसी ने यह भी बताया कि मामले की जांच अब CBI करेगी। नई परीक्षा तारीख और एडमिट कार्ड शेड्यूल जल्द जारी किया जाएगा।
‘गेस पेपर’ नहीं, असली पेपर का ट्रेलर?
पूरा विवाद उस कथित ‘गेस पेपर’ से शुरू हुआ, जिसने परीक्षा से पहले ही बाजार में घूमना शुरू कर दिया था। दावा है कि उसमें मौजूद सैकड़ों सवाल असली NEET पेपर से हूबहू मिल गए।
सूत्रों के मुताबिक, कथित पेपर में करीब 410 सवाल थे और इनमें से लगभग 150 सवाल सीधे परीक्षा में आ गए। चौंकाने वाली बात ये कि इन सवालों की कुल वैल्यू करीब 600 अंक बताई जा रही है। यानी जिसने ये सामग्री पहले देख ली, उसके लिए मेडिकल सीट की आधी जंग पहले ही जीत ली गई थी।
राजस्थान से खुला सबसे बड़ा सुराग
पेपर लीक की जांच में राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) सबसे आगे दिखाई दे रही है। अब तक 45 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है।
देहरादून, सीकर और झुंझुनूं तक फैले नेटवर्क पर छापेमारी हुई। शुरुआती कार्रवाई में 13 संदिग्ध पकड़े गए थे, लेकिन पूछताछ बढ़ते ही पूरा मामला एक बड़े संगठित रैकेट की तरफ इशारा करने लगा।
जांच एजेंसियों की नजर अब सिर्फ छात्रों पर नहीं, बल्कि कोचिंग नेटवर्क, ई-मित्र सेंटर, फोटो कॉपी दुकानों और कथित करियर काउंसलरों तक पहुंच चुकी है। सीकर के एक बड़े कोचिंग संस्थान से जुड़े लोगों से पूछताछ ने शक और गहरा कर दिया है।
प्रिंटिंग प्रेस से मेडिकल सीट तक… करोड़ों का खेल!
सबसे सनसनीखेज एंगल उस कथित डील का है, जिसमें पेपर को ‘गैस पेपर’ बनाकर बाजार में उतारने का दावा सामने आया है।
सूत्रों के मुताबिक, प्रश्नपत्र जयपुर की एक प्रिंटिंग प्रेस में छापा गया। यहीं से कथित लीक की शुरुआत होने की आशंका जताई जा रही है। फिर सवालों की डील 14 लाख से 30 लाख रुपए तक में हुई। बाद में वही सामग्री छात्रों तक 5 से 7 लाख रुपए में पहुंचाई गई। यानी मेडिकल सीट अब मेहनत से ज्यादा “नेटवर्क” और “नकदी” का खेल बनती दिख रही है।
जांच एजेंसियों के रडार पर टॉपर भी
SOG अब इस संभावना की भी जांच कर रही है कि कहीं पेपर सेटिंग सिस्टम के भीतर से ही कोई लिंक तो एक्टिव नहीं था। जांच एजेंसियों को शक है कि प्रश्नपत्र तैयार करने या प्रिंटिंग चेन से जुड़े किसी व्यक्ति ने नेटवर्क को एक्सेस दिया हो सकता है।
एक कथित “क्वेश्चन बैंक लिंक” का कनेक्शन केरल के एक मेडिकल कॉलेज में पढ़ रहे MBBS छात्र से भी जुड़ रहा है। कुछ टॉपर छात्रों को भी एजेंसियों ने रडार पर लिया है। भौतिक विज्ञान के पेपर को लेकर अलग से जांच चल रही है।
अब क्या होगा?
NTA ने साफ किया है कि परीक्षा दोबारा होगी और नई तारीख जल्द घोषित की जाएगी। एजेंसी ने छात्रों और अभिभावकों से अपील की है कि वे सिर्फ आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें। लेकिन फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है — अगर देश की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली परीक्षा का पेपर इस तरह बाजार में बिक सकता है, तो फिर सिस्टम में सेंध आखिर कहां लगी?
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