भरतपुर बार एसोसिएशन (Bharatpur Bar Association) में डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में अधिवक्ताओं को संविधान की रक्षा और सामाजिक न्याय के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया गया।
भरतपुर
अदालत की बहसों से अलग, इस बार शब्दों ने हथौड़े की तरह दस्तक दी। मंच था महाराजा सूरजमल सभागार और मौका—डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती। लेकिन यह महज श्रद्धांजलि सभा नहीं थी, बल्कि वकालत के असली धर्म की याद दिलाने वाला एक सख्त आईना भी था।
दी बार एसोसिएशन भरतपुर और अधिवक्ता परिषद राजस्थान, जिला भरतपुर के संयुक्त आयोजन में वकीलों का जमावड़ा लगा, जहां औपचारिकताओं से ज्यादा विचारों की गर्माहट दिखी। अध्यक्षता कर रहे बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कृष्ण कुमार उपाध्याय ने मंच संभाला, जबकि संचालन देवेंद्र पाल सिंह ने अपने अंदाज़ में पूरे कार्यक्रम को बांधे रखा।
कार्यक्रम की शुरुआत बाबा साहेब के चित्र पर माल्यार्पण से हुई, लेकिन असली हलचल तब शुरू हुई जब अधिवक्ता परिषद राजस्थान के प्रदेश मंत्री चंद्र किशोर भारद्वाज माइक पर आए। उन्होंने सीधी बात कही—भीम से भारत रत्न तक का सफर सिर्फ इतिहास नहीं, एक जिम्मेदारी है।
उनका संदेश साफ था: अधिवक्ता सिर्फ केस लड़ने वाला नहीं, बल्कि संविधान का सजग प्रहरी है—जिसे पीड़ित, शोषित, दलित और उपेक्षित वर्ग को न्याय दिलाने के लिए आगे आना होगा।
सभागार में मौजूद हर अधिवक्ता के सामने जैसे एक सवाल खड़ा था—क्या वकालत सिर्फ पेशा रह गई है, या अब भी उसमें समाज बदलने की ताकत बची है?
विशिष्ट अतिथियों में महासचिव यादराम सिंह मौर्य, राजेंद्र खंडेलवाल, गांधी देव ठाकुर, बने सिंह, अरविंद सिंह सोलंकी, राजेश कुक्कल और नरेंद्र गौतम ने भी अपने विचार रखते हुए अम्बेडकर के जीवन, संघर्ष और विचारों को आज के संदर्भ में जोड़ने की कोशिश की।
अध्यक्षीय भाषण में कृष्ण कुमार उपाध्याय ने कहा कि बाबा साहेब को याद करना तभी सार्थक है, जब उनकी शिक्षाओं को व्यवहार में उतारा जाए। मंच से एक के बाद एक वक्ताओं—यादराम सिंह मौर्य, राजेंद्र खंडेलवाल, बने सिंह—ने भी यही बात दोहराई कि संविधान की आत्मा को जिंदा रखना ही असली श्रद्धांजलि है।
सभागार में मौजूद अधिवक्ताओं की लंबी कतार भी इस संदेश की गवाह बनी। ऋषिपाल तिवारी, उत्तम शर्मा, पदम सिंह, सुनील राज, प्रहलाद सिंह, हरिमोहन दूर, विजय सिंह पुनिया, रमेश चंद वर्मा, मनवीर सिंह, करतार सिंह, यशवंत सिंह फौजदार, आरके सिंह, विशाल तिवारी, ताराचंद पुरिया, गजराज सिंह, पूरन सिंह कर्दम, ईश्वर सिंह, विनोद कुमार, सज्जन कुमार, युधिष्ठिर सिंह और प्रवेश कुमार जैसे कई नामों की मौजूदगी ने इस आयोजन को सिर्फ कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक सामूहिक संकल्प का रूप दे दिया।
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