जयपुर
राजस्थान सरकार ने प्रदेश में खोले गए नए महाविद्यालयों और क्रमोन्नत हुए महाविद्यालयों में आख़िरकार शैक्षणिक एवं अशैक्षणिक कैडर के 985 पद सृजित कर दिए। हाल ही में इसके आदेश जारी हो गए हैं। काफी समय से इन पदों के सृजन की मांग की जा रही थी। किन्तु इन कॉलेज को राजमेस सोसाइटी की तर्ज पर संचालित करने का विरोध भी शुरू हो गया है।
आपको बता दें कि अशोक गहलोत सरकार ने 5 अगस्त, 2020 को 37 नए महाविद्यालय खोलने तथा 6 अगस्त, 2020 को कुछ महाविद्यालयों में स्नातक व स्नातकोत्तर स्तर पर नए विषय खोलने तथा स्नातक महाविद्यालयों को स्नातकोत्तर महाविद्यालयों में क्रमोन्नत करने संबंधी आदेश जारी किए थे। इन्हीं महाविद्यालयों में अब जाकर शैक्षणिक एवं अशैक्षणिक कैडर के 985 पद सृजित कर दिए गए हैं।
पहले आनाकानी कर रही थी सरकार
नए कॉलेज खोलने के समय आदेशों में साफ लिखा गया कि इन नए महाविद्यालयों के लिए किसी तरह के शैक्षणिक अथवा अशैक्षणिक पद की स्वीकृति इस वित्तीय वर्ष में या भविष्य में नहीं दी जाएगी और न ही भवन निर्माण या रिपेयर, फर्नीचर, बिजली पानी, ऑफिस व्यय आदि के लिए कोई राशि दी जाएगी।
ध्वस्त हो जाएगा उच्च शिक्षा का ढांचा
राजस्थान विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय शिक्षक संघ (रुक्टा-राष्ट्रीय) के महामंत्री डॉ.सुशील कुमार बिस्सू ने बताया कि संगठन ने इन प्रावधानों को राज्य की उच्च शिक्षा के व्यापक हितों की घोर उपेक्षा तथा उच्च शिक्षा के पूरे ढांचे को ध्वस्त करने वाले मानते हुए इन प्रावधानों और शर्तों का विरोध किया था तथा इस विषय को विभिन्न मंचों पर उठाया और मुख्यमंत्री तथा उच्च शिक्षा मंत्री के समक्ष इस विसंगति को प्रमुखता से उठाया कि समुचित संख्या में पद सर्जन एवं अन्य ढांचागत सुविधाओं की वित्तीय स्वीकृति जारी हो। सरकार ने तर्कसंगत मांगों पर कार्यवाही करते हुए हल ही में इन महाविद्यालयों के लिए शैक्षणिक और अशैक्षणिक वर्ग में 985 पद सृजित कर दिए हैं।
राजमेस सोसाइटी की तर्ज पर संचालित करने का विरोध
संगठन के महामंत्री डॉ. बिस्सू ने मेडिकल कॉलेजेज के लिए गठित राजमेस सोसाइटी की तर्ज पर सोसाइटी के माध्यम से इन नए महाविद्यालयों के संचालन का विरोध किया है। उन्होंने नवीन महाविद्यालयों को सोसाइटी के अधीन संचालित करने के निर्णय को वापस लेने की मांग की है।
सोसाइटी द्वारा संचालित करना अव्यावहारिक: डॉ.सुशील कुमार बिस्सू
डॉ.बिस्सू ने बताया कि इन महाविद्यालयों को मेडिकल कॉलेजेज की तर्ज पर सोसाइटी द्वारा संचालित करने की सरकार की मंशा अव्यावहारिक और उच्च शिक्षा के प्रसार में बाधक है। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज की प्रति विद्यार्थी प्रतिवर्ष फीस लगभग 7.5 लाख रुपए होती है, जिससे मेडिकल कॉलेज का संचालन सम्भव है। किन्तु अधिकांश नवीन राजकीय महाविद्यालय ग्रामीण क्षेत्रों में खोले गए हैं, जिनमें प्रति विद्यार्थी प्रतिवर्ष फीस लगभग मात्र एक हजार रुपए होती है। जमीनी हालात यह हैं कि यह एक हजार रुपए भी अनेक विद्यार्थी वहन नहीं कर सकते। ऐसे में फीस वृद्धि का तो प्रश्न ही नहीं उठता, फिर सोसाइटी द्वारा कैसे संचालित हो सकेंगे?
सोसायटी से संचालित करने का कदम उच्च शिक्षा को पतन की ओर ले जाएगा: डा. दीपक शर्मा
संगठन अध्यक्ष डॉ. दीपक कुमार शर्मा ने बताया कि राजकीय महाविद्यालयों का संचालन सोसाइटी के अधीन करने से ना तो इन महविद्यालयों के संचालन की समुचित वित्तीय व्यवस्था संभव होगी, ना ही ये महाविद्यालय UGC मापदंडों को पूरा कर पाएंगे। राज्य सरकार का यह निर्णय राज्य में उच्च शिक्षा को पतन की ओर ले जाने वाला होगा, जिसका संगठन विरोध करता है एवं इस प्रस्ताव को वापस लेने की मांग करता है।
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