गुरु महिमा …

गुरु केवल ज्ञान नहीं देते, वे जीवन का मार्ग भी प्रकाशित करते हैं। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर पढ़िए डॉ. अनिता जैन ‘विपुला’ की हृदयस्पर्शी कविता, जिसमें गुरु को ज्ञान-गंगा, जीवन-सार और मुक्ति का द्वार बताया गया है।

मैं गुरू हूं…! हरि रूठे गुरू ठौर है, गुरू रूठे नहीं ठौर

मानव जीवन से अज्ञानता रूपी अंधकार को मिटाना ही मेरा मूल ध्येय है। तम से उजाले की ओर ले जाने को मैं ध्यानमग्न ही नहीं रहता, अपने लक्ष्य से टस से मस तक नहीं होता। मेरी थकान तब काफूर हो जाती है, जब शिष्य बुलंदी

मैं गुरू हूं…! हरि रूठे गुरू ठौर है, गुरू रूठे नहीं ठौर

मानव जीवन से अज्ञानता रूपी अंधकार को मिटाना ही मेरा मूल ध्येय है। तम से उजाले की ओर ले जाने को मैं ध्यानमग्न ही नहीं रहता, अपने लक्ष्य से टस से मस तक नहीं होता। मेरी थकान तब काफूर हो जाती है, जब शिष्य बुलंदी

गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु, गुरु देवो महेश्वरा: गुरु साक्षात परम ब्रह्मा, तस्मै श्री गुरुवे नम:

समाजिक व्यवस्था की निर्माण प्रक्रिया में गुरु एक अभिन्न अंग है। हिंदू धर्म व्यवस्था में गुरु को ब्रह्मा, विष्णु और महेश का रूप