पश्चिम बंगाल के कूचबिहार में कथित ‘कटमनी’ को लेकर नया विवाद सामने आया है। ग्रामीण लाउडस्पीकर से TMC नेताओं को पैसा लौटाने का वादा याद दिला रहे हैं। कई लोगों को रकम वापस मिलने का दावा भी किया जा रहा है।
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कूचबिहार
पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों एक ऐसा नजारा देखने को मिल रहा है, जिसे देखकर लोग हैरान हैं। जिन नेताओं पर कभी सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के बदले ‘कटमनी’ लेने के आरोप लगते थे, अब वही नेता लोगों के पैसे लौटाने के वादे कर रहे हैं। गांवों में लाउडस्पीकर गूंज रहे हैं, पोस्टर-बैनर लहराए जा रहे हैं और लोग नेताओं को उनका ही वादा याद दिला रहे हैं।
कूचबिहार जिले के कई इलाकों में इन दिनों चर्चा किसी चुनावी रैली की नहीं, बल्कि ‘कटमनी वापसी अभियान’ की है। आरोप है कि आवास योजना समेत विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने और किश्तों में देरी न होने देने के नाम पर लोगों से हजारों रुपये वसूले गए थे। अब राजनीतिक माहौल बदलने और कार्रवाई के डर के बीच वही रकम वापस लौटाई जा रही है।
सबसे ज्यादा हलचल कूचबिहार साउथ के घुघुमारी ग्राम पंचायत क्षेत्र में देखने को मिली। यहां ग्रामीणों ने तृणमूल कांग्रेस की पंचायत सदस्य ज्योत्सना बर्मन के घर के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का आरोप है कि उनसे 5 हजार से लेकर 25 हजार रुपये तक लिए गए थे। विरोध बढ़ने के बाद कथित तौर पर 4 जून तक सभी का पैसा लौटाने का आश्वासन दिया गया।
अब गांव वाले इस तारीख को लेकर पूरी तरह चौकन्ने हैं। लाउडस्पीकर के जरिए लगातार घोषणा की जा रही है कि नेताओं को अपना वादा निभाना होगा। हाथों में तख्तियां लेकर लोग यह भी साफ कर रहे हैं कि अगर तय समय तक पैसा वापस नहीं मिला तो आंदोलन और तेज होगा।
स्थानीय लोगों का दावा है कि पिछली सरकार के दौरान कई परिवारों ने दबाव और डर के कारण रकम दी थी। अब माहौल बदलने के बाद वे अपना पैसा वापस मांग रहे हैं। यही वजह है कि गांवों में एक तरह से ‘हिसाब-किताब’ का दौर शुरू हो गया है।
रिपोर्टों के मुताबिक, कुछ इलाकों में लोगों को पैसा लौटाया भी जाने लगा है। माथाभांगा क्षेत्र के पचगढ़ ग्राम पंचायत इलाके में रविवार को कई ग्रामीणों को कथित तौर पर उनकी रकम वापस मिली। यहां तक कि कुछ फरार बताए जा रहे नेताओं के परिजनों ने भी लोगों को पैसे लौटाने की प्रक्रिया में हिस्सा लिया।
फकीरेर कुठी इलाके में पंचायत स्तर के नेताओं ने ग्रामीणों को बुलाकर रकम लौटाई। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई वर्षों से लंबित शिकायतों के बाद पहली बार उन्हें अपना पैसा वापस मिलता दिखाई दे रहा है।
एक ग्रामीण ने दावा किया कि उसने जमीन विवाद सुलझाने के लिए एक स्थानीय नेता को पैसे दिए थे, लेकिन काम नहीं हुआ। बाद में जब पैसे लौटाए जाने की खबर मिली तो उसने भी अपना नाम दर्ज कराया और उसे उसकी रकम वापस मिल गई।
फिलहाल पूरे इलाके की नजर 4 जून पर टिकी हुई है। लोग देखना चाहते हैं कि ‘कटमनी’ लौटाने के जो वादे किए गए हैं, वे पूरी तरह निभाए जाते हैं या फिर गांवों में शुरू हुआ यह विरोध प्रदर्शन और बड़ा रूप लेता है।
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