भरतपुर के हलैना में किसान सम्मेलन में ERCP को राष्ट्रीय परियोजना घोषित करने, बाणगंगा नदी में पानी लाने और भारत-अमेरिका ट्रेड डील का विरोध करते हुए किसानों ने सरकार के खिलाफ आवाज उठाई।
भरतपुर
भरतपुर जिले के कस्बा हलैना में आयोजित किसान सम्मेलन किसानों की पीड़ा और आक्रोश का मंच बन गया। सम्मेलन में पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ERCP) को तुरंत राष्ट्रीय परियोजना घोषित करने और वर्षों से सूखी पड़ी बाणगंगा नदी में पानी लाने की जोरदार मांग उठी। इसके साथ ही भारत-अमेरिका के बीच हुए व्यापारिक समझौते (ट्रेड डील) को किसानों, मजदूरों और छोटे व्यापारियों के लिए विनाशकारी बताया गया।
किसान पंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने केंद्र सरकार पर अमेरिका के दबाव में निर्णय लेने का आरोप लगाते हुए कहा कि इस समझौते के बाद कपास, मक्का, सोयाबीन, सेब और पशुपालन से जुड़े उत्पादों के किसान बुरी तरह प्रभावित होंगे। उन्होंने कहा कि अमेरिका के उत्पाद शून्य कर पर भारत में सस्ते मिलेंगे, जबकि भारतीय उत्पादों पर 18 प्रतिशत टैरिफ लगेगा, जिससे किसानों और छोटे व्यापारियों की स्थिति कमजोर होगी।
हरियाणा की धनकड़ खाप पंचायत के प्रधान डॉ. ओमप्रकाश धनकड़ ने केंद्र सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि आज देश के अधिकांश पड़ोसी देशों से रिश्ते खराब हो चुके हैं और देश के भीतर नफरत का माहौल बनाया जा रहा है।
अलवर के किसान नेता वीरेंद्र मोर ने कहा कि देशभर का किसान संघर्षरत है, लेकिन सरकार उनकी समस्याओं पर ध्यान नहीं दे रही। उन्होंने आरोप लगाया कि कृषि बजट लगातार घट रहा है और किसानों व पशुपालकों की सुविधाओं में कटौती की जा रही है। डीग के किसान नेता मोहन सिंह गुर्जर ने कहा कि खेती अब घाटे का सौदा बन चुकी है, किसानों को लागत तक नहीं मिलती और अधिकांश किसान कर्जदार हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का लाभ भी नहीं मिल रहा।
प्रोफेसर डॉ. संजय शर्मा ने कहा कि वर्ष 2014 में किसानों की आय दोगुनी करने का वादा किया गया था, लेकिन वह पूरा नहीं हुआ। उन्होंने देश में बढ़ती आर्थिक और सामाजिक असमानता के लिए सरकार की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया।
पूर्व सांसद पंडित रामकिशन ने मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा से अपने प्रभाव का उपयोग कर ERCP को जल्द राष्ट्रीय परियोजना घोषित कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं इस परियोजना का उद्घाटन कर चुके हैं, फिर भी इसे राष्ट्रीय दर्जा नहीं मिलना सवाल खड़े करता है। उन्होंने बाढ़ नियंत्रण के लिए गम्भीर नदी पर बांध या एनीकट बनाने की आवश्यकता बताई।
किसान सम्मेलन के आयोजक इन्दल सिंह जाट ने कहा कि वर्ष 2007 से क्षेत्र के किसान पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। वैर, भुसावर, हलैना सहित पूरे भरतपुर जिले में पानी का गंभीर संकट है, ट्यूबवेल सूख चुके हैं और बाणगंगा नदी में पानी नहीं है। उन्होंने कहा कि हर साल चम्बल नदी का अतिरिक्त पानी समुद्र में चला जाता है, जबकि क्षेत्र के किसान पानी के लिए तरस रहे हैं।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की उदासीनता और राजनीतिक कारणों से ERCP परियोजना 10 वर्ष विलंबित हो चुकी है और इसकी लागत 37 हजार करोड़ से बढ़कर 70 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। उन्होंने मांग की कि केंद्र सरकार इसे राष्ट्रीय परियोजना घोषित कर बजट आवंटित करे, ताकि योजना जल्द पूरी हो सके।
सम्मेलन में भरतपुर और डीग जिलों को एनसीआर से बाहर करने की मांग भी उठाई गई। साथ ही यमुना जल समझौते के तहत द्वितीय चरण का पानी भरतपुर और डीग को दिलाने की मांग दोहराई गई।
इस अवसर पर पूर्व सांसद पंडित रामकिशन के 100 वर्ष पूर्ण होने पर किसानों ने उनका अभिनंदन किया। किसान नेता इन्दल सिंह जाट, अरावली संरक्षण यात्रा के प्रतिनिधियों और बाहर से आए अतिथियों का भी सम्मान किया गया। सम्मेलन में क्षेत्र के अनेक किसान नेताओं, जनप्रतिनिधियों और सैकड़ों किसानों ने भाग लिया।
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