भरतपुर (Bharatpur) की पूंछरी में हुरंगा महोत्सव-2026 के दौरान रंगों और ब्रजभाषा का अनोखा संगम देखने को मिला। कवि सम्मेलन में हरिश्चंद्र ‘हरि’ को ‘ललिता सखी’ और पं. गोपाल शर्मा को ‘पूंछरी का लोठा’ सम्मान दिया गया।
भरतपुर
गिरिराज महाराज की तलहटी पूंछरी बुधवार को रंग, रस और रसमय शब्दों के अनोखे संगम की साक्षी बनी, जब राजस्थान जन सांस्कृतिक परिषद् एवं गिरिराज धरण सेवक दल के संयुक्त तत्वावधान में हुरंगा महोत्सव-2026 एवं अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का भव्य आयोजन हुआ। मुकुट मुखारविंद मंदिर परिसर में नगाड़ों की गूंज, गुलाल के उड़ते गुबार और ब्रजभाषा की मिठास ने पूरे वातावरण को ब्रज की पारंपरिक होली के रंग में सराबोर कर दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रांतीय अध्यक्ष वेद प्रकाश वेद ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. मोहकम सिंह उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में जिला अध्यक्ष प्रो. डॉ. अशोक कुमार गुप्ता एवं ब्रज के सुप्रसिद्ध साहित्यकार श्याम सिंह जघीना ‘मधुर’ ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। कवि सम्मेलन का संचालन युवा कवि अभिषेक अमर ने प्रभावशाली अंदाज में किया।
जब ‘हरि’ बने ‘ललिता सखी’, और मंदिर प्रांगण बना ब्रज का रंगमंच
महोत्सव का सबसे अनोखा और आकर्षण का केंद्र बना ब्रजभाषा के वरिष्ठ गीतकार हरिश्चंद्र ‘हरि’ का सम्मान। उन्हें ‘ललिता सखी’ की उपाधि से विभूषित करते हुए साड़ी, अंगिया और सोलह श्रृंगार से सुसज्जित किया गया। इस अलौकिक रूप में उन्होंने जब नृत्य प्रस्तुत किया, तो मंदिर प्रांगण तालियों और उल्लास से गूंज उठा। उपस्थित जनसमूह ने इस अद्भुत प्रस्तुति को ब्रज संस्कृति की जीवंत झलक बताया।
वहीं, गिरिराज सेवा और समाज में योगदान के लिए पंडित गोपाल शर्मा (कोर्ट वाले) को ‘पूंछरी का लोठा’ की सम्मानजनक उपाधि से नवाजा गया। उन्हें अंगरखा, धोती, साफा और दुपट्टा पहनाकर गदा भेंट की गई।
दुग्धाभिषेक से शुरू हुआ आयोजन, कविता की धाराओं में बहता रहा ब्रज
कार्यक्रम का शुभारंभ मुकुट मुखारविंद गिरिराज महाराज के दुग्धाभिषेक और पूजन से हुआ। इसके बाद हरिश्चंद्र ‘हरि’ ने गिरिराज वंदना और सरस्वती वंदना प्रस्तुत कर आध्यात्मिक वातावरण निर्मित किया।
कवि सम्मेलन में एक के बाद एक कवियों ने ब्रजभाषा, प्रेम, भक्ति और सामाजिक भावनाओं से ओतप्रोत रचनाएं प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
- राजेंद्र अनुरागी: “कान्हा तुम्हारे बिना राधा को झूला कौन झुलाएगा…”
- लोकेश सिंघल: “लल्ला मोहे होरी खिलाय दे…”
- हरिश्चंद्र ‘हरि’: “डार-डार रंग में करूंगो सरावोर तोय…”
- राकेश राजस्थानी: “उड़ रहे रंग हजार बृज की होली में…”
- वेद प्रकाश वेद: “कहीं विश्वास टूटा है, कहीं पर आस टूटी है…”
- अनीता सिंह सुरभि: “गिरवर धारी गिरिराज को नमन है…”
इसके अलावा डॉ. कृष्ण कन्हैया, वीरेंद्र पाठक, चंद्रभान चंचल, सुरेश शर्मा, अभिषेक अमर, सी.एस. कृष्णा, रूपेश स्नेही, प्रहलाद शर्मा, योगेंद्र जांगिड और अन्य कवियों ने भी अपनी रचनाओं से ब्रज संस्कृति का रस घोल दिया।
पुस्तकों का विमोचन और साहित्यकारों का सम्मान
इस अवसर पर लोकेश सिंघल की पुस्तक ‘अनुभूतियों के स्वर’ और सी.एस. कृष्णा द्वारा संपादित ‘आचमन’ का विमोचन अतिथियों ने किया। साथ ही राजेंद्र अनुरागी, वेद प्रकाश वेद, हरिश्चंद्र ‘हरि’ और श्याम सिंह जघीना ‘मधुर’ को साफा और दुपट्टा पहनाकर सम्मानित किया गया।
हुरंगा में झलकी ब्रज की जीवंत परंपरा
मंदिर परिसर में आयोजित हुरंगा में नगाड़ों की थाप, बम वादन, फूलों की वर्षा और गुलाल के रंगों के बीच महिलाओं के नृत्य ने ब्रज की पारंपरिक लठ्ठमार होली की अनुभूति कराई। पूरा परिसर “राधे-राधे” और “जय गिरिराज महाराज” के जयकारों से गूंजता रहा।
कार्यक्रम की सफलता में गिरिराज धरण सेवक दल के मोती मुखिया, पवन सिंघल, गोविंद सिंघल, कन्हैया पंडित, अमर सिंह तहसीलदार, तरुण सिं्घल सहित अनेक सहयोगियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। अंत में प्रांतीय सचिव राजेंद्र अनुरागी और जिला सचिव लोकेश सिंघल ने सभी अतिथियों, कवियों और श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया।
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