राजस्थान के विश्वविद्यालयों में अब बदलेगा पढ़ाई का पैटर्न; राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने इंडस्ट्री की डिमांड के अनुसार कोर्स और विदेश से ऑनलाइन क्लास शुरू करने के दिए निर्देश।
अब सिर्फ रट्टामार किताबों से नहीं चलेगा काम, इंडस्ट्री की डिमांड के हिसाब से तैयार होंगे नए कोर्स
जयपुर: क्या आने वाले दिनों में राजस्थान के छात्र कॉलेज से निकलते ही सीधे कंपनियों की पहली पसंद बन जाएंगे? राज्यपाल एवं कुलाधिपति हरिभाऊ बागडे ने कुछ ऐसा ही बड़ा विजन सामने रखा है। शुक्रवार को लोकभवन में हुई वित्तपोषित विश्वविद्यालयों की हाई-लेवल समीक्षा बैठक में राज्यपाल ने साफ कर दिया है कि अब पुरानी और घिसी-पिट्टी शिक्षा प्रणाली से काम नहीं चलेगा।
आइए जानते हैं बैठक के वे 3 बड़े बदलाव, जो राज्य की उच्च शिक्षा की तस्वीर पूरी तरह बदलने वाले हैं:
अब देश-विदेश के एक्सपर्ट्स लेंगे ऑनलाइन क्लासेस: राज्यपाल ने निर्देश दिए हैं कि विश्वविद्यालयों को ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ बनाया जाए। इसके लिए दुनिया भर के दिग्गज विषय विशेषज्ञों को ऑनलाइन माध्यम से जोड़कर छात्रों को पढ़ाया जाएगा, ताकि ग्लोबल लेवल की नॉलेज मिल सके।
‘नीमराना मॉडल’ पर चलेगा पूरा सिस्टम: राज्यपाल ने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय सिर्फ डिग्री बांटने का अड्डा न बनें। इंडस्ट्री (उद्योगों) की क्या मांग है, इसकी समय-समय पर स्टडी की जाए और उसी हिसाब से कोर्स और कौशल विकास (Skill Development) के मॉड्यूल तैयार किए जाएं—जैसे नीमराना की रैफल्स यूनिवर्सिटी में होता है।
बिल्डिंग निर्माण में कोताही बर्दाश्त नहीं: राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान के तहत चल रहे निर्माण कार्यों को लेकर गवर्नर सख्त नजर आए। उन्होंने साफ कहा कि बजट का सही इस्तेमाल हो और अधिकारी खुद मौके पर जाकर क्वालिटी की जांच करें।
25% एनरोलमेंट बढ़ाने का मेगा टारगेट, जयपुर-जोधपुर और अलवर बनेंगे एजुकेशन हब
बैठक में उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने भी कई बड़े अपडेट्स साझा किए। अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री कुलदीप रांका ने बताया कि पूरे देश में ग्रॉस एनरोलमेंट बढ़ाने पर फोकस है, जिसके तहत राजस्थान में 25% नामांकन वृद्धि का टारगेट रखा गया है।
खास बात यह है कि पिछले दो सालों में राज्य में 76 नए कॉलेज खोले जा चुके हैं। इसके अलावा जयपुर, जोधपुर और अलवर को ऐसा सुपर हब बनाया जा रहा है जहां अलग-अलग विषयों के विश्वविद्यालयों का बेहतरीन तालमेल देखने को मिलेगा। साथ ही, विश्वविद्यालयों में ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ और स्टार्टअप-इंक्यूबेशन गतिविधियों को बढ़ावा देने के भी कड़े निर्देश दिए गए हैं।
अब देखना यह होगा कि राज्यपाल और उच्च शिक्षा मंत्री प्रेमचंद बैरवा के इस कड़े रुख के बाद राज्य के विश्वविद्यालय कितनी जल्दी इस ‘फ्यूचर-रेडी’ फॉर्मेट को अपनाते हैं।
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