जिस दिन तीसरी या चौथी संतान हुई, उसी दिन उस बच्चे के नाम 50 हजार की एफडी | घटती आबादी के कारण इस समाज ने किया ये फैसला

जी हां; सही पढ़ा आपने। देश का एक समाज ऐसा है जिसने अपने कार्यों से समाज के सभी वर्गों में अपना लोहा तो मनवाया है; लेकिन घटती आबादी ने

अपनों से दुत्कारी महिलाएं बरसों से रख रही हैं करवा-चौथ का व्रत |‘अपना घर आश्रम’ बना इनका सहारा

भरतपुर का अपना घर आश्रम। ये वो घर है जिसे 90 महिलाओं ने अब अपना ही घर बना लिया है। और ये वो महिलाएं हैं जिनको उनके परिवार के लोगों ने

सुखद खबर: वाल्मीकि समाज की बेटी के सिर से उठा पिता का साया तो गांवों वालों ने निभाई ब्याह की सारी रस्में

राजस्थान का एक जिला है जालौर और इस जिला मुख्यालय से दस किमी दूर एक गांव है सांकरणा। जातिगत विद्वेष के बीच इस गांव से बेहद सुखद खबर आई है। और इसी सुखद खबर ने इस गांव को

सावन लागौ चले पुरवैया उड़जा काग लिवा ला भईया. . .

श्रावण मास में युवतियों का सबसे प्यारा त्यौहार तीज है। वर्षा ऋतु में चारों तरफ की धरा भी सघन हरितिमा से मुस्कराने लगती है। चारों ओर उमंग और उल्लास का

जिस शख्स को मृत मानकर कर दिया ब्रह्मभोज, 25 साल बाद भरतपुर में मिला, उड़ीसा से आया बेटा पिता को देख बिलख पड़ा

उड़ीसा के कटक में जिस शख्स को मृत मानकर ब्रह्मभोज कर दिया गया वह शख्स भरतपुर के अपना घर आश्रम में मिल गया। उड़ीसा से जब बेटा पिता को लेने यहां पहुंचा पिता-पुत्र दोनों

असहायों के लिए ‘अन्नपूर्णा’ बना भरतपुर ऑयल मिलर्स एसोसिएशन

भरतपुर ऑयल मिलर्स एसोसिएशनअसहायों के लिए ‘अन्नपूर्णा’ बनकर सामने आया जब उसने सोमवार से उनके लिए निशुल्क भोजन व्यवस्था शुरू की। पहले दिन ही बड़ी संख्या में असहाय लोग

अच्छी पहल: भरतपुर ऑयल मिलर्स एसोशिएशन कराएगा असहायों को नि:शुल्क भोजन 

भरतपुर ऑयल मिलर्स एसोशिएशन ने एक अच्छी पहल शुरू की है। एसोशिएशन की ओर से असहायों को नि:शुल्क भोजन

नोखा की बेटियां जिन्होंने महका दी अपना घर आश्रम की रसोई

कहते हैं एक बेटी दो घरों को रोशन करती है। लेकिन नोखा की बेटियों के काम ने तो पूरे देश में अपने जन्मस्थली का नाम रोशन कर

अपना घर आश्रम उदयपुर में हुआ एक अदभुत मिलन, 40 साल से बिछड़े हुए भाई को भाई से मिलाया

पुनर्वास के बढ़ते क्रम में अपना घर आश्रम उदयपुर में किशन लाल पटेल प्रभु जी को सी.एम. कछावा की सूचना पर 15.04.2022 को रेस्क्यू कर सेवा व उपचार हेतु आश्रम में

बैंककर्मी गए तो थे कर्ज की वसूली करने, परिवार का हाल देखा तो ‘सपनों का आशियाना’ ही बनवा दिया

इस कहानी के हीरो हैं बैंककर्मी और कहानी का दूसरा अहम किरदार है; एक छोटा सा गरीब परिवार। दरअसल बैंककर्मी कर्ज की वसूली करने के लिए इस गरीब परिवार का