मैं गुरू हूं…! हरि रूठे गुरू ठौर है, गुरू रूठे नहीं ठौर

मानव जीवन से अज्ञानता रूपी अंधकार को मिटाना ही मेरा मूल ध्येय है। तम से उजाले की ओर ले जाने को मैं ध्यानमग्न ही नहीं रहता, अपने लक्ष्य से टस से मस तक नहीं होता। मेरी थकान तब काफूर हो जाती है, जब शिष्य बुलंदी

अरमान…

ना कोई चाहत ना कोई आस
करती हूं बस एक यही प्रयास
ना कोई मुझसे हो निराश

वट वृक्ष…

बचपन में कंधों पर घुमाते,
हर छोटी बड़ी फरमाइश को
पूरा करते पिता

श्री हिंदी पुस्तकालय समिति डीग ने की साहित्यकार पुरस्कारों की घोषणा

श्री हिंदी पुस्तकालय समिति डीग के अपने स्थापना दिवस पर होने वाले साहित्यकार सम्मान समारोह में सम्मानित होने वाले साहित्यकारों के पुरस्कारों की घोषणा की। समिति के अध्यक्ष

इंसानियत…

इस वर्ष कुछ ज्यादा ही भीषण गर्मी पड़ रही थी। सुबह से ही नलों में गरम पानी आ रहा था। शालिनी ने जब सूरज को आग उगलते देखा तो गर्मी से बचाव के उपाय में

भव सागर सहज तर जाएं…

चार दिनों का है ये जीवन
खुशियों से हो जाए रोशन

जयपुर में मुंशी प्रेमचंद साहित्य रत्न सम्मान प्रतियोगिता-2024 के पोस्टर का विमोचन

अखिल भारतीय कायस्थ महासभा, जयपुर और आरएचएल रेनोवा कैंसर सेंटर के तत्वावधान में अवेयरनेस टॉक के साथ मुंशी प्रेमचंद साहित्य रत्न सम्मान प्रतियोगिता-2024

अगले क्षण का कुछ पता नहीं…

सबसे पहले हम
उसी का हाथ छोड़ते हैं,
जिसका हाथ सबसे पहले

तू मेरी धरती मेरा आकाश…

मां तू मेरे जीवन का विश्वास है।
तेरी सांसों से जीवन को सांस मिली,
तेरी उंगली से आंखों की राह खुली,

अनमोल रिश्ता…

मन की हर बात जिसे कह
दिल हल्का हो जाता,
सबसे अच्छी सहेली, दोस्त,