संस्कृति हमारी पहचान, साहित्य हमारी शक्ति | जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के मंच से सीएम भजनलाल शर्मा का बड़ा संदेश

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के उद्घाटन सत्र में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा—संस्कृति और साहित्य भारत की आत्मा हैं। उन्होंने विरासत संरक्षण, पुस्तकों के महत्व और साहित्य को जीवन का हिस्सा बनाने की अपील की।

कविता से कथा तक का सफ़र | जयपुर लिट्रेचर फेस्टिवल में ‘इच्छा मृत्यु’ के साथ अंशु हर्ष का नया अध्याय

जयपुर लिट्रेचर फेस्टिवल में लेखिका अंशु हर्ष के पहले नॉवल ‘इच्छा मृत्यु’ का लोकार्पण। सत्र “पोएट्री – खुद से बात” में कविता से नॉवल तक की रचनात्मक यात्रा पर गहन संवाद।

ठंड…

सुबह से ही कड़ाके की ठंड थी। हाड़ कंपाने वाली बर्फीली हवाएं तीर की तरह चुभ रहीं थीं। ऊपर से कोहरा तो जैसे बर्फ के छोटे कणों के रूप में बरस रहा था। कांता बाई ने

ठिठुरती शाम…

ठिठुरती शाम की हथेलियों में
धूप की आखिरी किरण काॅंपती है,
श्वासों की उठती भाप में

साहित्य समाज का पथ प्रदर्शक है: राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े | लालसोट में 31 साहित्यकार शॉल व स्मृति चिन्ह से सम्मानित, अनुराग सेवा संस्थान का भव्य समारोह

दौसा के लालसोट में राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने 31 साहित्यकारों को सम्मानित किया। अनुराग सेवा संस्थान के साहित्यकार सम्मान समारोह में साहित्य को समाज का पथ प्रदर्शक बताया।

अनुराग सेवा संस्थान लालसोट के 31 वर्ष पूर्ण | ‘अनुराग–31’ में 11 राज्यों के 31 साहित्यकार होंगे सम्मानित, 20 दिसंबर को भव्य समारोह

नुराग सेवा संस्थान लालसोट ने अपनी स्थापना के इकतीस वर्ष पूरे होने पर इस बार उत्सव को और भव्य बना दिया है। “अनुराग–31” थीम के तहत साहित्य, संस्कृति, क्रीड़ा, आध्यात्म, पर्यावरण संरक्षण, लोक-संस्कृति और सामाजिक समरसता पर

लोहागढ़ साहित्य सुमन’ का भव्य विमोचन | 61 साहित्यकारों को मिला ‘लोहागढ़ साहित्य मनीषी’ सम्मान, कविताओं से गूंजा भरतपुर

राजस्थान जन सांस्कृतिक परिषद् के तत्वावधान में रविवार को भरतपुर में साहित्य और संस्कृति का अनोखा संगम देखने को मिला। परिषद् द्वारा आयोजित ‘लोहागढ़ साहित्य सुमन’ पुस्तक विमोचन, साहित्यकार सम्मान एवं काव्य गोष्ठी का आयोजन

मेरी गलती क्या है…

आजकल मेरा पोता जो चेन्नई में पढ़ रहा है, छुट्टियों में घर आया हुआ है, लेकिन अक्सर वह दोस्तों के यहां चला जाता है। जब घर में रहता है तो हमेशा मोबाइल में ही आंखें गड़ाए रहता है। आज जब दोपहर में

दादा जी, माफ कर देना …

श्राद्ध पक्ष शुरू हो गए थे। घर में बड़ी श्रद्धा से पितरों के लिए श्राद्ध किए जा रहे थे। उस दिन दादा जी के श्राद्ध पर सुबह से उनकी पसंद का खाना बन रहा था। सुरभि को बार – बार याद आ रहा था कि जब तक दादा जी

‘सब के लिए खिलौने’

डॉ. अलका अग्रवाल (Dr. Alka Agarwal) की पुस्तक ‘सब के लिए खिलौने’ एक महत्वपूर्ण बाल नाटक संकलन है ,जो आधुनिक बच्चों की शैक्षणिक और नैतिक आवश्यकताओं को पूरा करता है। इसके सभी नाटकों के प्रमुख पात्र