नई दिल्ली
UGC विशेषज्ञ समिति ने कहा कि इसी सत्र से लागू हो नियम
शैक्षणिक सत्र 2021 में अब देश के सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में पाठ्यक्रमों का 40 फीसदी हिस्सा ऑनलाइन पढ़ाया जा सकता है। जबकि बाकी 60 फीसदी पाठ्यक्रम की पढ़ाई क्लासरूम में कराई जाएगी। इस तरह के सुझाव विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति ( NEP) 2020 के क्रियान्वयन के लिए बनाई गई विशेषज्ञ समिति ने अपने ड्राफ्ट में दिए हैं। समिति ने यह भी कहा है कि यह व्यवस्था शैक्षणिक सत्र 2021 से ही लागू की जाए। आपको बता दें कि विद्यालयों से लेकर उच्च शिक्षा तक सभी संस्थानों में आने वाले एकेडमिक सेशन से राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत कोर्स को पढ़ाने की तैयारी की जा रही है। इसी क्रम में यूजीसी ने विशेषज्ञों की एक समिति तैयार की है। इस कमेटी ने पाठ्यक्रमों का 60 फीसदी हिस्सा क्लासेस में और 40 फीसदी हिस्सा ऑनलाइन पढ़ाने का सुझाव दिया है।
ऑनलाइन पढ़ाने की जल्द मिल सकती है अनुमति
UGC विशेषज्ञ समिति का सुझाव सामने आने के बाद अब इस पर अमल करवाने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। इससे लग रहा है कि उच्च शिक्षण संस्थानों को किसी भी पाठ्यक्रम का 40 प्रतिशत हिस्सा ऑनलाइन माध्यम से पढ़ाने की जल्द अनुमति मिल सकती है। आयोग के सचिव प्रो. रजनीश जैन ने यूजीसी विशेषज्ञ समिति के तैयार ड्राफ्ट को राज्यों और विश्वविद्यालयों को भेजा है। इस ड्राफ्ट रिपोर्ट पर सभी को 6 जून तक अपने सुझाव भेजने को कहा गया है। जैन ने कहा है, यूजीसी ने तय किया है कि उच्च शिक्षण संस्थानों को किसी पाठ्यक्रम का 40 प्रतिशत हिस्सा ऑनलाइन माध्यम से पढ़ाने की अनुमति दी जाए और संबंधित कोर्स का शेष 60 प्रतिशत हिस्सा आफलाइन माध्यम से पढ़ाया जाए। उन्होंने कहा कि दोनों प्रारूपों में परीक्षा भी ऑनलाइन माध्यम से ली जा सकती है। नई शिक्षा नीति के तहत तैयार इस ड्राफ्ट का मदद से स्टूडेंट्स को बेहतर ढंग से सीखने के साथ ही दूसरों से भी सीखने का मौका मिलेगा।
विशेषज्ञ समिति ने और क्या कहा
विशेषज्ञ समिति का मानना है कि इससे पठन पाठन के कई स्वरूपों को मान्यता मिलेगी जिसमें आमने सामने बैठकर पढ़ने और डिजिटल माध्यम से शिक्षा ग्रहण करना शामिल है। मसौदा में मिश्रित शिक्षा के तहत शिक्षक की भूमिका को परिभाषित करते हुए कहा गया है कि मिश्रित पठन पाठन में शिक्षकों की भूमिका ज्ञान प्रदान करने वाले से आगे बढ़कर कोच और मार्गदर्शक की होगी और शिक्षकों का छात्रों की सीखने की प्रक्रिया पर अधिक प्रभाव होगा।
विशेषज्ञ समिति ने कहा है कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में मिश्रित शिक्षा की व्यवस्था को शिक्षण-पठन पाठन के नए प्रारूप लागू करने के लिए मूल्यांकन के क्षेत्र पर ध्यान देने की जरूरत है। विश्वविद्यालयों एवं कालेजों में सतत समग्र मूल्यांकन (सीसीई) को प्रोत्साहित किए जाने की जरूरत है। यूजीसी समिति ने इस प्रकार की शिक्षा के लिए इंटरनेट, बैंडविड्थ, हार्डवेयर सहित जरूरी आधारभूत संरचना सुनिश्चित कराने की जरूरत पर भी जोर दिया है।
ये भी पढ़ें
- 70 साल तक नौकरी या युवाओं का ‘करियर लॉक’? राजस्थान में डॉक्टरों की रिटायरमेंट उम्र बढ़ाने पर बवाल | RMCTA ने खोला मोर्चा, बोला—ये फैसला भारी पड़ेगा
- अब टोल पर नहीं लगेगा ब्रेक: देश का पहला ‘बिना बैरियर’ सिस्टम लॉन्च | गाड़ी दौड़ेगी, पैसा अपने आप कटेगा
- भरतपुर में कॉलेज एडमिशन का काउंटडाउन शुरू: 1 मई से फॉर्म, 15 मई आखिरी मौका | 27 मई को आएगी पहली लिस्ट, जानिए पूरी टाइमलाइन
- नई परिभाषा …
- पुराना PF अब नहीं रहेगा ‘लापता’ | बिना UAN वाले अकाउंट भी होंगे एक्टिव, EPFO ला रहा नया डिजिटल हथियार
- बरगी डैम में मौत की लहरें, तूफान में डूबा क्रूज | 30 सवारियों में मची चीख-पुकार, कई लापता—रेस्क्यू जारी, 6 शव बरामद | वीडियो
- गाड़ियां अब करेंगी ‘बात’ और सड़क देगी पहले ही खतरे का अलर्ट | V2X टेक्नोलॉजी से बदलने वाला है भारत का ड्राइविंग सिस्टम
- अलवर एक्सप्रेसवे पर मौत की आग, 5 जिंदा जले | चलते सफर में खत्म हुआ पूरा परिवार, आग के गोले में बदली कार
- कलाकार रामखिलाड़ी की कूची में ‘मां’ का संघर्ष | पत्थरों में गढ़ी ममता, पसीने से लिखी सपनों की कहानी
- ACB का बड़ा ट्रैप ऑपरेशन | नगर पालिका में 50,000 की रिश्वत लेते सहायक कर्मचारी और दलाल गिरफ्तार
